मांजरेकर ने लिखा कि 1996 इंग्लैंड दौरे पर द्रविड़ से तो लोगों को उम्मीद थी कि वे बढ़िया प्रदर्शन करेंगे लेकिन सौरव गांगुली सबके लिए सरप्राइज रहे। संजय ने आगे कहा कि द्रविड़ तो लगता था कि टीम इंडिया के लिए ही बने हैं लेकिन जब मैंने उन्हें खेलते देखा और जिस तरह से उन्होंने बैटिंग की, तभी मुझे अंदाजा हो गया था कि अब मेरा ‘समय पूरा’ हो गया है।
मांजरेकर जब तक इंटरनेशल क्रिकेट खेले उनकी पहचान एक तकनीकी रूप से सक्षम खिलाड़ी के तौर पर रही। खासतौर पर उनका रिकॉर्ड विदेशी पिचों पर शानदार रहा। उनको उनकी तकनीक के लिए साथी खिलाड़ी उन्हें कई बार मि. पर्फेक्ट कहा करते थे, लेकिन
सचिन तो उन्हें मि. डिफ्रेंट कहा करते थे।