इंग्लैंड के खिलाफ 2007 में जब रोहित शर्मा ने भारत के लिए पहला मैच खेला था तब उनकी उम्र महज 20 साल थी। इस समय चयनकर्ताओं और कई दिग्गज खिलाड़ियों को रोहित से काफी उम्मीदें थी। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में अपनी प्रतिभा भी दिखाई थी और उनकी बल्लेबाजी देखकर हर किसी को यही लगता था कि यह खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में बड़ा नाम बनेगा। हालांकि ऐसा हुआ नहीं, रोहित कई सालों तक टीम से अंदर-बाहर होते रहे और उनका प्रदर्शन भी बहुत साधारण रहा। इसके बाद 2013 से रोहित ने भारत के लिए पारी की शुरुआत करना शुरू किया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
2013 के बाद रोहित ने सलामी बल्लेबाज के रूप में खुद को स्थापित किया और 2021 में उन्हें तीनों फॉर्मेट में अहम जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें वनडे और टी-20 टीम की कप्तानी सौंपी गई है और टेस्ट टीम का उपकप्तान बनाया गया है। अब रोहित भारत के सबसे अहम खिलाड़ी बन चुके हैं। पिछले कई सालों से विराट कोहली का जो कद भारत में था। अब रोहित का कद भी उसी स्तर का हो चुका है।
2012 तक 30 के औसत से रन बनाए
रोहित ने 2007 में डेब्यू करने के बाद से 2012 तक 121 मैचों में 30.22 के औसत से 2509 रन बनाए थे। इन पांच सालों में उनके बल्ले से सिर्फ दो शतक निकले थे। इस दौरान उन्होंने मध्यक्रम या फिनिशर के रूप में बल्लेबाजी की थी। अधिकतर मैचों में रोहित शर्मा गलत शॉट खेलकर आउट हो रहे थे। लंबे समय तक दिग्गज खिलाड़ियों ने उनका समर्थन किया, लेकिन जब रोहित की यह आदत नहीं बदली तो उन्हें लगातार आलोचना का सामना करना पड़ा। कई पारियों में रोहित बेहतरीन लय में रहते थे, लेकिन अचानकर गलत शॉट खेलकर आउट हो रहे थे।
2013 के बाद बदली रोहित की किस्मत
सहवाग और गंभीर जैसे खिलाड़ियों के बाहर जाने के बाद धोनी ने 2013 चैंपियंस ट्रॉफी में रोहित से पारी की शुरुआत करने को कहा और यहीं से उनकी किस्मत बदल गई। उन्होंने पहले मैच में बेहतरीन अर्धशतक लगाया और बाद में धवन के साथ मिलकर कई कीर्तिमान बनाए। 2013 के बाद रोहित ने 268 मैचों में 48.64 के औसत से 12940 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 39 शतक भी निकले। वनडे में उन्होंने तीन दोहरे शतक लगाए और आगे चलकर टेस्ट टीम में भी अपनी जगह बनाई। अब रोहित तीनों फॉर्मेट में भारत के नियमित ओपनर बन चुके हैं। भारत हो या इंग्लैंड या ऑस्ट्रेलिया उन्होंने हर जगह खुद को साबित किया है।
2021 में बने देश के सबसे अहम क्रिकेटर
रोहित ने आईपीएल में बहुत पहले ही अपनी कप्तानी का जलवा दिखा दिया था। दुनिया की सबसे अमीर क्रिकेट लीग में उन्होंने अपनी टीम मुंबई को पांच बार खिताब जिताया था। हालांकि अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में विराट कोहली का सितारा इस समय बुलंदियों पर था और रोहित को किसी भी फॉर्मेट में कप्तानी का मौका नहीं मिला। भारत में तीनों फॉर्मेट के लिए एक ही कप्तान रखने का चलन है। इस वजह से भी रोहित को कप्तानी नहीं मिली। भारत के टी-20 वर्ल्डकप में खराब प्रदर्शन के बाद विराट ने टी-20 की कप्तानी छोड़ी और रोहित को यह जिम्मेदारी मिली। इसके बाद विराट की जगह रोहित को वनडे का कप्तान भी बनाया गया।
अब रोहित टीम के सबसे अहम खिलाड़ी बन चुके हैं। टी-20 और वनडे टीम के कप्तान होने के साथ ही रोहित टेस्ट टीम के उपकप्तान भी हैं। आने वाले समय में भारतीय टीम का प्रदर्शन कैसा रहेगा। यह बहुत हद तक रोहित के प्रदर्शन पर ही निर्भर करता है। अगर रोहित आईपीएल की तरह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में भी प्रदर्शन करते हैं तो निश्चित रूप से वो आने वाले कुछ सालों तक न सिर्फ भारत बल्कि विश्व क्रिकेट में राज करेंगे।