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WC: 'पूरी दुनिया में बेइज्जती न कराओ', भारतीय गेंदबाजों पर आरोप लगाने वाले PAK के हसन रजा को वसीम अकरम का जवाब

Sat, 04 Nov 2023 05:38 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, कराची

सार

एक स्पोर्ट्स चैनल से बात करते हुए वसीम अकरम ने कहा- मैं पिछले कुछ दिनों से इसके बारे में पढ़ रहा हूं। उनका बयान मजाक जैसा लगता है। वसीम अकरम ने गेंद चुने जाने की पूरी प्रक्रिया बताई है।
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वसीम अकरम ने हसन रजा को जवाब दिया है - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर हसन रजा का विवादित बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल, हसन ने भारतीय तेज गेंदबाजों को अलग गेंद देने और मदद पहुंचाने का आरोप लगाया था, जिससे कि भारतीय तेज गेंदबाजों को मदद मिल सके। एक पाकिस्तानी समाचार चैनल से बात करते हुए हसन रजा ने दावा किया था कि मेजबान टीम को विपक्षी टीम की तुलना में एक अलग गेंद मिली थी और उन्हें लगता है कि यही कारण है कि भारतीय तेज गेंदबाजों को अतिरिक्त सीम मूवमेंट और स्विंग मिल रही है। हालांकि, इस बयान की जमकर आलोचना हुई थी और अब वसीम अकरम ने भी इसकी आलोचना की है। उन्होंने तो यहां तक कहा है कि हसन को खुद की बेइज्जती करानी हो तो कराएं, लेकिन हमारी और इस देश की बेइज्जती न करवाएं।
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हसन रजा ने क्या कहा था?

उन्होंने कहा- हम देख रहे हैं कि जब भारत के खिलाड़ी बल्लेबाजी कर रहे होते हैं, तो वे वास्तव में अच्छी बल्लेबाजी करते हैं और जब भारत गेंदबाजी करता है तो अचानक गेंद हरकतें करना शुरू कर देती है। उनके पक्ष में सात-आठ करीबी डीआरएस कॉल आए हैं। सिराज और शमी जिस तरह से गेंद को स्विंग करा रहे थे, उससे लग रहा था कि आईसीसी या बीसीसीआई उन्हें दूसरी पारी में अलग-अलग गेंद दे रहे हैं। गेंद का निरीक्षण करने की जरूरत है। स्विंग के लिए गेंद पर कोटिंग की एक अतिरिक्त परत भी हो सकती है।

वसीम अकरम ने की आलोचना

इसके जवाब में एक स्पोर्ट्स चैनल से बात करते हुए वसीम अकरम ने कहा- मैं पिछले कुछ दिनों से इसके बारे में पढ़ रहा हूं। उनका बयान मजाक जैसा लगता है, क्योंकि उनका दिमाग जगह पर नहीं है। बेइज्जी अपनी तो करानी ही करानी है, हमारी भी न कराओ पूरी दुनिया के सामने। वसीम अकरम ने साथ ही गेंद को स्विंग करानी की कला के बारे में भी विस्तार से बताया है। साथ ही बताया है कि मैच के लिए गेंद कैसे चुनी जाती है। 

वसीम अकरम ने बताई पूरी प्रक्रिया

अकरम ने कहा- यह बहुत ही आसान है। अंपायर आता है मैच से पहले। 12 गेंद का एक डब्बा होता है। वहां चार अंपायर होता है, रेफरी हैं और न जाने कितने लोग होते हैं। जो टीम टॉस जीतती है, अगर वह बॉलिंग कर रही है, तो उन 12 गेंद में से एक गेंद उठाया जाता है कि पहले गेंदबाजी करने वाली टीम उससे गेंदबाजी करेगी। इसके बाद वह टीम एक और गेंद उठाती है और उसे अपना दूसरा ऑप्शन बनाती है। दोनों गेंद फिर अंपायर अपने पास रखता है अपने दोनों पॉकेट में, ताकि अगर पहली गेंद खराब होती है तो दूसरे ऑप्शन वाली गेंद को निकाल के दिया जाए। इसके बाद बाकी बचे आठ गेंद को अंपायर दूसरे ड्रेसिंग रूम ले जाते हैं उसी बॉक्स में। वही चार अंपायर और रेफरी वहां होते हैं। वहां जाकर दूसरी टीम भी दो गेंद चुनती है। फिर वह सभी ऑफिशियल्स फोर्थ अंपायर और मैच रेफरी के पास जाते हैं और उन्हें बताते हैं कि दोनों टीमों ने अपनी-अपनी गेंद कौन सी चुनी है और वह उन्हें सौंप देते हैं। वहां रेफरी और अंपायर के साथ-साथ काफी लोग होते हैं। तो यह कौन लोग हैं जो ऐसी बातें सोचता है कि मदद पहुंचाई जा रही होगी। डिवाइस से कोई गेंद कैसे स्विंग हो सकती है।
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शोएब और मिस्बाह ने भी की आलोचना

वसीम ने कहा- तीन चार दिनों से हमारे यहां यह बातें चल रहीं हैं कि भारत को छोड़कर दुनिया के किसी भी गेंदबाज को मदद नहीं मिल रही है। लेकिन उन्हें यह भी सोचना चाहिए कि भारतीय गेंदबाजों ने स्विंग का कोई अलग तरीका निकाला हो। भारतीय गेंदबाज इस वक्त अलग फॉर्म में हैं। इस पर मिस्बाह कहते हैं कि भारतीय गेंदबाजों ने सीम पर बहुत काम किया है और यह रिप्ले में साफ दिखता है। वहीं, शोएब मलिक कहते हैं कि जब किसी इंसान को कामयाबी मिलती है तो हम (पाकिस्तानी) उसकी तारीफ नहीं करते। हम उससे सीखने की कोशिश नहीं करते। हमारी पहली सोच ही नकारात्मक होती है। हम निगेटिव चीज लेकर आते हैं। हमें इससे सीखना चाहिए। वहीं वसीम अकरम आखिर में कहते हैं- खाली दिमाग शैतान का घर होता है।
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