पाकिस्तान के महान क्रिकेटर वसीम अकरम ने अहमदाबाद में पिछले रविवार को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विश्वकप फाइनल में भारत को मिली हार के लिए उसके मध्यक्रम के जज्बे की कमी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि केएल राहुल इसलिए खुलकर नहीं खेल सके क्योंकि उन्हें पता था कि जडेजा के बाद कोई और विशुद्ध बल्लेबाज नहीं है और उन्हें जोखिम लिए बिना टिककर खेलना था।
पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 50 ओवर में 240 रन बनाए जिसमें कप्तान और सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा (47) और विराट कोहली (54) ने शीर्ष क्रम में अच्छा प्रदर्शन किया जबकि मध्यक्रम में केएल राहुल ही सफल रहे जिन्होंने 107 गेंद में 66 रन बनाए। इस परिस्थिति का आकलन करते हुए अकरम का मानना है कि भारत के निचले क्रम के खिलाड़ियों की लंबी सूची होने से केएल राहुल बेखौफ बल्लेबाजी नहीं कर सका। लेकिन मध्यक्रम को ‘करो या मरो’ की सोच से खेलना चाहिए था।
फाइनल में भारत को ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या की कमी खली जो मध्यक्रम को संतुलन देते हैं। अकरम ने कहा,‘हार्दिक टीम में होते तो राहुल जोखिम ले सकते थे। अगर उन्होंने जोखिम लिया होता और आउट हो जाता तो भी लोग उसकी आलोचना करते। भारत ने बीच के ओवरों में तेजी से रन बनाए होते तो मैच की तस्वीर कुछ और होती।’
रोहित ने पूरे विश्वकप में आक्रामक शुरुआत दी
उन्होंने तेज शुरुआत देने वाले भारतीय कप्तान रोहित की तारीफ करते हुए कहा, ‘ वह पूरे विश्वकप में ऐसे ही खेले। पूरे टूर्नामेंट में किसी ने इसकी शिकायत नहीं की। वह 50 रन के भीतर आउट होता रहे लेकिन उन्होंने टीम को तेज शुरुआत दी। फाइनल में भी उन्होंने ऐसा किया तो लोग शिकायत करने लगे।’ अकरम ने कहा, ‘वह स्पिन को बखूबी खेलने वाले दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में से हैं। वह फाइनल में मैक्सवेल का शिकार हो गए लेकिन मुझे लगता है कि रोहित अच्छा खेले और उन्हें इसमें बदलाव की जरूरत नहीं है।’