धोनी के पूरे करियर की कहानी तो अनहोनी को होनी करने वाली ही रही है। विकेटकीपर के तौर पर जब पार्थिव पटेल और दिनेश कार्तिक के बीच लगातार टक्कर चल रही थी तो न जाने धोनी कैसे तूफान की तरह आए और दोनों को पीछे छोड़ते हुए भारतीय टीम के दस्तानों को ऐसे अपने हाथों से चिपकाया कि अगले एक दशक से ज्यादा समय तक उनके प्रतिद्वंद्वियों ने भी मान लिया कि वाकई में माही जैसा कोई नहीं। देखते ही देखते न जाने कैसे वो 16 साल बीत गए। निश्चित तौर पर धोनी अपने करियर के आखिरी पड़ाव में चूकें हों, लेकिन डेढ़ दशक से भी ज्यादा समय तक उनकी शख्सियत अद्भुत ही रहीं।
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धोनी ने भारतीय क्रिकेट में ड्रेसिंग रूम की खबरों का बाहर निकलना बंद कर दिया। वो आकर पत्रकारों को छेड़ते हुए ये अक्सर कह जाते थे कि आप लोग ज्यादा मसालेदार न्यूज मत ढूंढों वरना मैं श्रीसंत को प्रेस कांफ्रेस में भेज दूंगा! मौजूदा भारतीय टीम को देखें तो लगभग हर खिलाड़ी धोनी का कर्जदार है। एक कप्तान के तौर पर धोनी ने कैसे हर किसी का हौसला बढ़ाया और उन्हें वो मौके दिए जो शायद कोई भी चयनकर्ता नहीं देता। रोहित शर्मा बतौर ओपनर 2019 में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बने, लेकिन उन्हें ओपनर बनाया किसने? धोनी ने। और वो भी तब जब श्रीलंका के खिलाफ वन-डे सीरीज में मिडिल ऑर्डर में बुरी तरह से फ्लॉप होने के बाद उनका टीम से बाहर होना तय था। धोनी ने ही भारतीय क्रिकेट में सबसे युवा खिलाड़ी को ट्रॉफी थमाने की शुरुआत की। मौजूदा टीम उसी परंपरा को बरकरार रख रही है।
एमएस धोनी और मोहिंदर अमरनाथ
- फोटो : ट्विटर
आज भी मोहिंदर अमरनाथ अक्सर इस बात को लेकर धोनी की खिंचाई करते हैं कि उनका चयनकर्ता का पद इसलिए छिन गया क्योंकि वो 2011 में धोनी को कप्तानी से हटाना चाहते थे। अमरनाथ कभी किसी को ये नहीं बतातें हैं कि उसी दौर पर वो विराट कोहली को शुरुआती टेस्ट मैचों में नाकाम होने के बाद प्लेइंग इलेवन से बाहर करना चाहते थे। धोनी अड़ गए और वो इसलिए कि उनकी दलील थी कि अगले दौरे पर यही कोहली आएगा ना कि तेंदुलकर-द्रविड़-लक्ष्मण। अगर बाहर करना है तो इन तीनों में से किसी एक को करें। जाहिर सी बात है कि अमरनाथ ये कभी नहीं कर सकते थे। तेंदुलकर से ज्यादा सम्मान धोनी ने शायद किसी भी क्रिकेटर का नहीं किया। 2013 में साउथ अफ्रीका दौरे के लिए धोनी की रणनीति साफ थी। वो जानते थे कि उम्रदराज तेंदुलकर उस योजना में अब टेस्ट क्रिकेट में फिट नहीं बैठतें हैं। तेंदुलकर को इशारों ही इशारों में ये बात पहुंचाई गई।