बल्लेबाजी के बाद अपनी कप्तानी से भी प्रशंसकों का दिल जीतने वाले बल्लेबाज विराट कोहली को अर्जुन पुरस्कार के लिए चुना गया है। कोहली विदेशी धरती पर 5-0 से सीरीज जीतने वाले एकमात्र भारतीय कप्तान हैं।
कोहली को जिंबाब्वे दौरे के लिए पहली बार किसी सीरीज में टीम इंडिया की कमान सौंपी गई थी और उन्होंने अपनी कप्तानी में ऐसा कारनामा कर दिखाया जो महेंद्र सिंह धोनी और सौरव गांगुली भी नहीं कर सके थे।
आइए, नजर डालते हैं अर्जुन पुरस्कार के लिए चयनित होने वाले कोहली की पांच बेहतरीन वनडे पारियों पर
28 फरवरी 2012, श्रीलंका के खिलाफ, होबार्ट
कोहली ने अपने 15 वनडे शतकों में सबसे ज्यादा शतक श्रीलंका के ही खिलाफ लगाए हैं। उनकी बेहतरीन पारियों में होबार्ट (ऑस्ट्रेलिया) में श्रीलंका के खिलाफ खेली गई शतकीय पारी भी शुमार होती है। इस मैच में उन्होंने श्रीलंकाई गेंदबाजों की धुनाई करते हुए महज 86 गेंदों में 133 रनों की अविजित पारी खेली थी। इस पारी में उन्होंने 16 चौके के अलावा दो छक्के भी लगाए।
18 मार्च 2012, पाकिस्तान के खिलाफ, ढाका
क्रिकेट के मैदान पर टीम इंडिया और पाकिस्तान की चिर-प्रतिद्वंद्विता जगजाहिर है। दोनों टीमों के खिलाड़ी अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ बेहतर करने की कोशिश करते हैं। कोहली ने भी अपने वनडे कॅरियर की सर्वश्रेष्ठ पारी पाकिस्तान के ही खिलाफ खेली है। बांग्लादेश में एशिया कप के दौरान कोहली ने पाक गेंदबाजों की जमकर क्लास लेते हुए 183 रनों की बेजोड़ पारी खेली। इस पारी में उन्होंने 22 चौके व एक छक्का भी लगाया।
24 दिसंबर, श्रीलंका के खिलाफ, कोलकाता
कोहली की यादगार पारियों में यह पारी भी बेहतरीन मानी जाती है। पांच मैचों की सीरीज के चौथे वनडे मैच में श्रीलंका ने भारत के सामने जीत के लिए 316 रनों का विशाल लक्ष्य रखा। जवाब में भारत की शुरुआत बेहद खराब रही। उसके दो दिग्गज बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग सस्ते में पवेलियन लौट चुके थे।
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ऐसे में कोहली और गौतम गंभीर पर टीम का दारोमदार था और उन्होंने लसिथ मलिंगा समेत श्रीलंकाई गेंदबाजों की बखिया उखाड़ते हुए जोरदार शतक लगाया। गंभीर ने 150 रन बनाए जबकि कोहली ने 107 रनों की पारी खेली। कोहली के वनडे कॅरियर का यह पहला शतक भी था। दो शतकों के दम पर भारत ने यह मैच आसानी से जीत लिया।
20 अक्टूबर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ, विशाखापत्तनम
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी कोहली का बल्ला जमकर बोलता रहा है। अक्टूबर, 2010 में घरेलू धरती पर खेली जा रही वनडे सीरीज के दौरान उन्होंने विशाखापत्तनम में दूसरे वनडे में टीम इंडिया की बेहद खराब शुरुआत के बाद शतकीय पारी खेलते हुए टीम के लिए जीत की राह तैयार की। उन्होंने इस मैच 121 गेंदों में 118 रन बनाए।
05 जुलाई 2013, वेस्ट इंडीज के खिलाफ, पोर्ट ऑफ स्पेन
कैरेबियाई धरती पर भी कोहली ने जोरदार बल्लेबाजी कर अपनी क्षमता साबित की। जुलाई में खेली गई त्रिकोणीय वनडे सीरीज में मेजबान वेस्ट इंडीज के खिलाफ 102 रनों की पारी खेलकर टीम इंडिया के लिए विशाल स्कोर खड़ा किया। हालांकि मैच बारिश के कारण प्रभावित रहा और डकवर्थ-लुइस नियम के आधार पर भारत ने मुकाबला 102 रनों से जीत लिया।