जेम्स एंडरसन 38 साल की उम्र में खेल रहे हैं, क्या वह भी ऐसा कर सकते हैं, इस सवाल के जवाब में इशांत ने कहा, 'मैं एक समय में एक मैच के बारे में ही सोचता हूं। आपको पता नहीं होता कि आगे क्या हो। अब मैं रिकवरी को लेकर अधिक पेशेवर हूं। पहले बहुत अभ्यास करता था लेकिन रिकवरी पर ध्यान नहीं देता था । उम्र के साथ शरीर का ध्यान रखना जरूरी है।'
ऐसा नहीं है कि मैं सीमित ओवरों का क्रिकेट खेलना नहीं चाहता
इशांत सीमित ओवरों की टीम की हिस्सा नहीं है और आईपीएल में भी कुछ सत्र बाहर रहे। क्या इससे भी टेस्ट क्रिकेट में करियर लंबा करने में मदद मिली, यह पूछने पर उन्होंने कहा, 'मैं इसे अभिशाप में वरदान की तरह लेता हूं। ऐसा नहीं है कि मैं सीमित ओवरों का क्रिकेट खेलना नहीं चाहता लेकिन जब खेलने का मौका नहीं हो तो सबसे अच्छा है कि अभ्यास जारी रखे।'
अगर तीनों प्रारूप खेलता तो मैं सौ टेस्ट नहीं खेल पाता
उन्होंने कहा, 'मैं नहीं चाहता कि वनडे में चयन नहीं होने से टेस्ट क्रिकेट में प्रदर्शन पर असर पड़े। कम से कम मुझे शुक्रगुजार होना चाहिए कि मैं एक प्रारूप तो खेल रहा हूं। इस तेज गेंदबाज ने आगे कहा कि इसके यह मायने नहीं है कि अगर तीनों प्रारूप खेलता तो मैं सौ टेस्ट नहीं खेल पाता। शायद थोड़ा समय ज्यादा लगता। मैं 32 साल का हूं, 42 का नहीं।'
बांग्लादेश के खिलाफ 18 साल की उम्र में किया था टेस्ट डेब्यू
बता दें कि इशांत ने बांग्लादेश के खिलाफ 18 साल की उम्र में राहुल द्रविड़ की कप्तानी में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था। इसके बाद वह अनिल कुंबले, महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली और अजिंक्य रहाणे की कप्तानी में खेले।