भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने मंगलवार को खिलाड़ियों के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट की घोषणा कर दी। इसमें ईशान किशन और श्रेयस अय्यर को शामिल नहीं किया गया। उन्हें वार्षिक अनुबंध से बाहर रखा गया जिसके बाद क्रिकेट जगत के तमाम दिग्गजों की प्रतिक्रिया देखने को मिली। साहा और इरफान पठान जैसे क्रिकेटर्स ने इसे गलत बताया जबकि पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव ने बोर्ड के निर्णय की सराहना की।
'रेड बॉल क्रिकेट को बचाने के लिए बीसीसीआई ने सही निर्णय लिया'
भारत को 1983 में वनडे विश्व कप का खिताब जिताने वाले कपिल देव ने बीसीसीआई के कदम की सराहना करते हुए इसे जरुरी बताया। उन्होंने बताया कि प्रथम श्रेणी टूर्नामेंट जैसे रणजी ट्राफी को बचाए रखने के लिए यह जरूरी कदम है। उन्होंने कहा, "इस फैसले से कुछ खिलाड़ियों और लोगों को परेशानी जरूर होगी लेकिन घरेलू क्रिकेट को जीवित रखने के लिए बोर्ड की तरफ से उठाया गया ये कदम काफी सराहनीय है। मैं बीसीसीआई को इस फैसले के लिए बधाई देना चाहता हूं। आज के दौर के खिलाड़ी इंटरनेशनल क्रिकेट में एक बार खुद को स्थापित करने के बाद घरेलू क्रिकेट में काफी कम ही खेलते हुए दिखाई देते हैं। बोर्ड को ये संदेश सभी खिलाड़ियों को काफी पहले ही दे देना चाहिए था।"
बोर्ड की चेतावनी को ईशान-अय्यर ने किया नजरअंदाज
पिछले सप्ताह बीसीसीआई सचिव जय शाह ने सभी केंद्रीय अनुबंधित खिलाड़ियों को रेड बॉल क्रिकेट - रणजी और टेस्ट दोनों पर आईपीएल को प्राथमिकता नहीं देने के लिए एक पत्र लिखा था। यह माना गया था कि इस कदम से किशन और अय्यर जैसे खिलाड़ियों में कुछ सकारात्मकता आएगी। बोर्ड ने इन खिलाड़ियों को अपनी कार्यप्रणाली को पूरी तरह से बदलने की चेतावनी दी थी, लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ, तो बोर्ड के पास सख्त कार्रवाई करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचा।
कपिल देव ने आगे कहा, "मैं हमेशा से इस बात को मानने वाला रहा हूं कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने खेल से सभी को प्रभावित करने वाले खिलाड़ियों को घरेलू क्रिकेट में अपने राज्य की तरफ से समय मिलने पर खेलना चाहिए क्योंकि इससे घरेलू प्लेयर्स को भी काफी समर्थन मिलता है।"