अश्विन ने गुरुवार को इस पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा और आलोचकों के खिलाफ पलटवार किया। उन्होंने एक के बाद एक कई सिलसिलेवार ट्वीट करके साफ तौर पर कहा कि अगर दोबारा गेंद बल्लेबाज से टकराकर जाएगी तो वह फिर रन लेंगे।
उन्होंने कहा, ‘मैने फील्डर का थ्रो देखा और रन भागना चाहा। उस समय मैने नहीं देखा था कि गेंद ऋषभ को लगी है। यदि देखा होता तो भी भागता क्योंकि नियमों में यह मान्य है। मोर्गन के अनुसार मैने नियमों का पालन नहीं किया लेकिन यह गलत है।’
उन्होंने कहा, ‘मैने लड़ाई नहीं की बल्कि अपना बचाव किया। मेरे शिक्षकों और माता-पिता ने मुझे यही सिखाया है और अपने बच्चों को भी आप खुद के लिए खड़े होना सिखाइए।’
अश्विन ने आगे कहा, ‘मोर्गन और साउदी अपने अनुसार नियम बनाते हैं कि क्या सही है और क्या गलत। उन्हें दूसरों को नैतिकता का पाठ पढाने और अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल का हक नहीं है।’
दिल्ली कैपिटल्स के सीनियर खिलाड़ी ने कहा, ‘मैं इससे ज्यादा हैरान इस बात से हूं कि लोग इस पर बहस कर रहे हैं और यह जताने की कोशिश कर रहे हैं कि कौन अच्छा है और कौन बुरा। मैं सिर्फ इतना समझता हूं कि मैदान पर अपना सब कुछ दे दो और नियमों के भीतर खेलो। इसके बाद खेल खत्म होने पर हाथ मिला लो और यही खेलभावना मेरी समझ में आती है।’
गौरतलब है कि मोर्गन ने अश्विन पर खेल भावना का पालन नहीं करने का आरोप लगाया जबकि एमसीसी के नियमों के तहत बल्लेबाज के शरीर से लगकर गेंद जाने के बाद रन लेना गलत नहीं है। विश्व कप 2019 के फाइनल में भी बेन स्टोक्स के रन लेने के दौरान गुप्टिल का थ्रो उनके बल्ले से टकराकर गई थी और तब इंग्लैंड को चार रन मिले थे जिसे अंपायरों ने ओवरथ्रो करार दिया और इंग्लैंड ने मैच जीता था।