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Friendship Day 2021: उतार-चढ़ाव के बावजूद जगजाहिर है सचिन-कांबली की दोस्ती, जानें कुछ दिलचप्स किस्से

Sun, 01 Aug 2021 10:46 AM IST
ओम. प्रकाश स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आज अंतराष्ट्रीय फ्रेंडशिप डेे है। खेलों की दुनिया में कई खिलाड़ियों ने एक दूसरे के प्रतिद्वंदी रहने के बावजूद दोस्ती की मिसाल कायम की है। क्रिकेट में अगर देखा जाए तो सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली की दोस्ती जगजाहिर रही है। 
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सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली - फोटो : सोशल मीडिया
आज अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस है। यह दिन सभी दोस्तों और दोस्ती के लिए खास होता है। जिन दोस्तों के बीच दूरिया हो जाती हैं वे भी आज के दिन अपने गिले-शिकवे दूर कर नई शुरुआत करते हैं। दुनिया में ऐसा कोई क्षेत्र बाकी नहीं है जहां पर दोस्तों ने दोस्ती की मिशाल कायम न की हो। खेलों में अगर देखा जाए तो लियोनल मेसी और कोबे ब्रायंट की दोस्ती जगजाहिर रही। जबकि दोनों का ताल्लुक अलग-अलग खेल से रहा। रोजर फेडरर और राफेल नडाल टेनिस कोर्ट पर धुर विरोधी हैं लेकिन मैदान के बाहर दोनों एक दूसरे पर जान छिड़कते हैं। इसी तरह क्रिकेट की दुनिया में देखा जाए तो सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली ने दोस्ती की एक नई मिसाल पेश की। इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे पर आज बात सचिन और कांबली की दोस्ती पर करते हैं। 
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सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली - फोटो : ट्विटर @BCCI
एक ही स्कूल में पढ़े

इस में कोई दो राय नहीं है कि सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली ने शुरुआती पढ़ाई एक ही स्कूल में की। इन दोनों की दोस्ती की शुरुआत उस समय हुई जब वे 10 साल के थे और मुंबई के शारदाश्रम विद्यामंदिर में कक्षा 7 में पढ़ते थे। इसके बाद इन दोनों की दोस्ती आगे बढ़ती रही। 
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रमाकांत आचरेकर - फोटो : सोशल मीडिया
एक ही गुरु के पास सीखी क्रिकेट

जिन दिनों सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली शारदाश्रम विद्यामंदिर स्कूल में पढ़ते थे उस समय दोनों की मुलाकात रमाकांत आचरेकर की क्रिकेट कोचिंग में हुई। यहां कोच रमाकांत ने सचिन-कांबली को क्रिकेट की बारीकियां सिखाईं। इन दोनों ने बड़ी ही संजीदगी से अपने कोच से क्रिकेट के अलावा अनुशासन का पाठ  पढ़ा। 

 

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सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली - फोटो : सोशल मीडिया
664 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी
 
शारदाश्रम विद्यामंदिर स्कूल के लिए हैरिश शील्ड टूर्नामेंट के दौरान सचिन और कांबली ने बल्लेबाजी में इतिहास रच दिया। इन दोनों इस प्रतियोगिता में जेवियर स्कूल के विरुद्ध खेलते हुए 664 रनों की साझेदारी कर वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया। इसी प्रदर्शन के चलते दोनों क्रिकेटरों को भारत की राष्ट्रीय टीम में बहुत कम उम्र में जगह मिल गई थी। 
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सचिन तेंदुलकर - फोटो : ट्विटर
पहले शुरू हुआ सचिन का क्रिकेट करियर 

इस प्रदर्शन के बाद सचिन तेंदुलकर को साल 1989 में भारतीय टीम में जगह मिल गई। साल 1992 आते-आते तेंदुलकर टेस्ट क्रिकेट में एक हजार रन बनाकर सुर्खियां बटोर चुके थे वहीं 1993 में टेस्ट डेब्यू करने वाले कांबली ने 14 टेस्ट मैचों में एक हजार रन बनाकर नया कीर्तिमान रच दिया था। 
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विनोद काम्बली - फोटो : सोशल मीडिया
वड़ा पाव खाने में होती थी होड़

विनोद कांबली के अनुसार, कैंटीन में दोनों खिलाड़ियों का पसंदीदा डिश वड़ा पाव था। इस दोनों खिलाड़ियों में अक्सर इस बात को लेकर शर्त लगाई जाती थी कि कौन कितने खाएगा। कहा जाता है कि सचिन के 100 रन पूरे होने पर विनोद उन्हें 10 बड़ा पाव खिलाते थे। ठीक यही सचिन भी कांबली के लिए करते थे। 
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विनोद कांबली
सचिन को हराने में आता था मजा

विनोद कांबली ने एक बार इंटरव्यू में कहा था कि मुझे सचिन को हराने में काफी मजा आता था। चाहे वह क्रिकेट का मैदान हो या स्कूल। कांबली के मुताबिक सचिन को हमेशा पंजा लड़ाकर ताकत दिखाने का बहुत शौक रहा है। 

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sachin tendulkar - फोटो : instagram/sachin tendulkar
जुदा हुईं सचिन-कांबली की राहें

सचिन तेंदुलकर लगातार क्रिकेट की बुलंदियां छू रहे थे। वहीं विनोद कांबली को टीम इंडिया में जगह बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था। कुल मिलाकर साल 2000 तक कांबली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट भारत के लिए खेले। इस दौरान उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान कांबली ने कहा कि करियर के दौरान सचिन ने उनकी ज्यादा मदद नहीं की। इस बात से मास्टर ब्लास्टर तेंदुलकर काफी खफा हुए और बाद में दोनों की दोस्ती में दरार आ गई। 
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विनोद कांबली

8 साल बाद फिर एक हुए सचिन-कांबली

एक किताब के विमोचन के दौरान सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली इकट्ठा हुए थे। उसके बाद बाद दोंनों के रिश्तों पर जमी बर्फ पिघल गई। इस दौरान कांबली ने कहा था कि उनके बीच दूरियां मिट गई हैं और कोई मतभेद नहीं है, मुझे खुशी है कि हम दोनों फिर करीब आ गए हैं, हमने एक दूसरे को गले लगाया है, हम वापस दोस्ती के ट्रैक पर हैं। 
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