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33 साल से टीम इंडिया को मिली यहां हार, कैसे होगी वापसी?

Thu, 25 Dec 2014 04:30 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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एडिलेड और फिर बिसबेन दोनों टेस्ट मैचों में शुरुआत में शानदार प्रदर्शन के बाद टीम इंडिया मैच जीतने में नाकाम रही। भारत का लक्ष्य ड्रेसिंग रूम में तनाव को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने पर होगा तो मेजबान ऑस्ट्रेलिया एक के बाद एक चोटिल हो रहे खिलाड़ियों से निजात पाना चाहेगी।
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ऑस्ट्रेलिया बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में शुरुआती 2 मैच जीतकर 4 मैचों की सीरीज में 2-0 से आगे है, भारत के पास सीरीज बचाने का यह अंतिम मौका है, वहीं मेजबान के पास मैच को सिर्फ ड्रॉ कराकर सीरीज अपने नाम करने का शानदार मौका है। एडिलेड में 48 रन से और ब्रिसबेन में 4 विकेट से मिली हार के बाद टीम इंडिया इस धरती पर लगातार हार के सिलसिले को मेलबर्न में खत्म करना चाहेगी।

2011-12 में इंग्लैंड के हाथों हार के बाद टीम इंडिया ने विदेशी सरजमीं पर लगातार 5 टेस्ट सीरीज गंवा दिया है। इससे पहले भारत की ऐसी दुर्दशा तब हुई थी जब उसने टेस्ट क्रिकेट में कदम रखा था। भारत ने 1932 में इंग्लैंड के हाथों अपनी पहली टेस्ट सीरीज गंवाने के बाद लगातार 6 विदेशी टेस्ट सीरीज गंवाई थी। 1953 में वेस्टइंडीज का दौरा करने के दौरान भारत को 21 में से 12 मैचों में हार मिली थी।
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रैना को मिल सकता है बॉ‌क्सिंग डे टेस्‍ट मैच में मौका

तब से लेकर अब तक टीम इंडिया में काफी बदलाव आ गए हैं लेकिन विदेशी धरती पर भारतीय खिलाड़ियों का लचर प्रदर्शन अभी भी निराशाजनक ही है।

भारत ने पिछले दोनों मैच में अपनी शुरुआत बेहद शानदार कराई लेकिन निर्णायक मौके पर बल्‍लेबाजों की नाकामी ने टीम को हार के लिए मजबूर कर दिया। ओपनर मुरली विजय को छोड़ दिया जाए तो सीरीज में अब तक शिखर धवन, चेतेश्‍वर पुजारा, विराट कोहली और अजिंक्य रहाणे की बल्‍लेबाजी में निरंतरता नहीं दिखी है।

शीर्ष क्रम के अलावा रोहित शर्मा दोनों ही मैचों में फ्लॉप रहे हैं। उनके अगले मैच में बाहर बिठाने की संभावना है और हो सकता है कि उनकी जगह बाएं हाथ के बल्‍लेबाज सुरेश रैना को मौका दिया जाए। रैना के पास भारतीय उपमहाद्वीप के बाहर टेस्ट मैच खेलने का अनुभव भी है। नवोदित क्रिकेटर लोकेश राहुल भी मध्य क्रम के बल्‍लेबाज हैं लेकिन सीरीज के इस मोड़ पर उन्हें खेलाने का कोई तुक नहीं बनता। अगर उन्हें मौका मिलता है तो उन पर उम्मीदों का बड़ा बोझ होगा।

बल्‍लेबाजी के अलावा गेंदबाजों ने टीम को शुरुआत में अच्छी सफलता जरूर दिलवाई लेकिन बाद में वे इसे कायम नहीं रख सके। मेलबर्न की पिच के हिसाब से माना जा रहा है कि भारत इस मैच में 5 गेंदबाजों के साथ उतर सकता है। मेलबर्न की पिच ‌स्पिन और तेज गेंदबाजी दोनों के लिए अनुकूल मानी जा रही है।

तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार फिट हो चुके हैं और उनके इस मैच में खेलने की संभावना है। भुवी के अलावा टीम के पास इशांत शर्मा, उमेश यादव, मोहम्मद शमी और वरुण आरोन तेज गेंदबाज हैं, लेकिन भुवी की वापसी से शमी या वरुण में से किसी को बाहर बैठना पड़ सकता है।

चोटों के इतर बेहतर प्रदर्शन करने में जुटा ऑस्ट्रेलिया

दूसरी ओर, लगातार चोटों से परेशान ऑस्ट्रेलिया भी बॉक्सिंग डे टेस्‍ट मैच के लिए अपनी टीम संयोजन को बनाने में जुटा हुआ है। माइकल क्लार्क के चोटिल होने के कारण टीम की अगुवाई कर रहे नए कप्तान स्टीवन स्मि‌थ को अपने बल्‍लेबाजों से पिछले प्रदर्शन की आस होगी।

शेन वॉटसन को छोड़ दिया जाए तो विस्फोटक ओपनर डेविड वॉर्नर, क्रिस रोजर्स और कप्तान स्मिथ ने जब भी मौका मिला रन बनाए हैं। हालांकि टीम चोटों से भी परेशान है। मिचेल मार्श के चोटिल होने के बाद टीम से बाहर होने पर नवोदित क्रिकेटर जोई बर्न्स को पहली बार टेस्ट मैच खेलने का मौका मिल रहा है। जबकि तेज गेंदबाज मिचेल स्टॉर्क के चोटिल होने के कारण रेयान हैरिस की वापसी हो रही है। हैरिस दूसरे मैच में अनफिट होने के कारण नहीं खेल सके थे।

टीम आउट ऑफ फॉर्म वॉटसन और विकेटकीपर ब्रैड हैडिन को इस मैच में भी उतार सकती है। वॉटसन के टेस्ट करियर का यह 10वां साल है।

यहां 33 साल से एक भी टेस्‍ट नहीं जीत सका भारत

मेलबर्न में खेले जाने वाले बॉंक्सिंग डे टेस्‍ट मैच में दोनों टीमों के लिए चुनौतियां होंगी। भारत जहां सीरीज में वापसी के लिए जोर लगाएगा, वहीं मेजबान टीम सीरीज को अपने नाम करने की जुगत में मैदान पर उतरेगी।

बल्‍लेबाज जोई बर्न्स मेलबर्न टेस्ट से अपने टेस्‍ट करियर का आगाज कर रहे हैं। वह 2014 में टेस्ट करियर शुरू करने वाले पांचवें ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर बनेंगे। उनसे पहले एलेक्स डूलन, मिचेल मार्श, स्टीव ओ कैफे और जोश हैजलवुड अपने-अपने टेस्ट करियर की शुरुआत इस साल करने में सफल रहे हैं।

भारत ने इस मैदान पर आखिरी बार 1981  में टेस्ट मैच जीत हासिल की थी। महज 143 रनों का लक्ष्य देने के बाद भारतीय टीम ने मेजबान को महज 83 रनों पर आउट कर रोमांचक जीत हासिल की थी। साथ ही टीम इंडिया ने इस मैदान पर अपने पिछले सभी पांचों मैचों में हार का सामना किया है। जबकि ऑस्ट्रेलिया ने पिछले 5 मैचों में 3 में जीत और 2 में हार का सामना किया है।
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ऑस्ट्रेलिया को मनोवैज्ञानिक फायदा : हेजलवुड

तीसरे मैच से पहले ऑस्ट्रेलियाई पेसर जोश हेजलवुड ने कहा कि दूसरे टेस्ट में भारतीयों की छींटाकशी से ऑस्ट्रेलिया को बॉक्सिंग डे टेस्ट में मनोवैज्ञानिक फायदा मिलने जा रहा है। भारतीय गेंदबाजों ने मिचेल जॉनसन को शॉट गेंद की और छींटाकशी भी की।

जॉनसन ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी में 247 रन पर छह विकेट गिरने के बार क्रीज पर आए थे लेकिन इस बाएं हाथ के पेसर ने 93 गेंदों में 88 रन ठोक भारतीयों को मुंहतोड़ जवाब दिया। उनकी इस पारी की बदौलत ऑस्ट्रेलिया भारत के 408 रन के जवाब में 505 रन बनाने में कामयाब रहा।

नतीजन 4 मैचों की टेस्ट सीरीज में ऑस्ट्रेलिया 2-0 से आगे है। हेजलवुड ने कहा, "निश्चित रूप से हम 2-0 से आगे हैं। मेरा मानना है कि उन्होंने गाबा में हमें उकसाने की कोशिश की और मिच ने इसका जवाब दिया। दूसरी पारी में उन्हें विकेट लेते देखना अच्छा लगा और वह जवाब हमले कर दे रहे थे और गेंद तेज डाल रहे थे। उम्मीद है कि इस हफ्ते भी वह ऐसा ही करेंगे। ऑस्ट्रेलिया को इसका मनोवैज्ञानिक फायदा मिलेगा।"
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