राहुल ने भारत के लिए पिछला मैच इस साल मार्च में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला था। यह भी एक वनडे मैच था। अब उन्होंने भारतीय टीम धमाकेदार वापसी की है। साथ ही आलोचकों को भी करारा जवाब दिया है। केएल राहुल के एशिया कप और वर्ल्ड कप की टीम में सिलेक्शन पर काफी सवाल उठ रहे थे।
फैंस कह रहे थे कि जब वह चोटिल हैं तो टीम में क्यों शामिल किया गया। इस पारी से उन्होंने सभी को बता दिया है कि वह विश्व कप और एशिया कप के बाकी बचे मैचों के लिए तैयार हैं। राहुल ने बता दिया है कि वह बड़े मैच के प्लयेर हैं।
राहुल के शतक लगाते ही ड्रेसिंग रूम में मौजूद खिलाड़ी और स्टाफ ने उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन दिया। राहुल ने इस शतक के साथ चीफ सिलेक्टर अजीत अगरकर और कप्तान रोहित शर्मा के भरोसे को कायम रखा। उन्होंने 106 गेंदों में 12 चौके और दो छक्के की मदद से नाबाद 111 रन की पारी खेली। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 104.72 का रहा।
राहुल ने विराट कोहली के साथ मिलकर 194 गेंदों में 233 रन की साझेदारी निभाई। यह एशिया कप में किसी भी विकेट के लिए भारत की और ओवरऑल सबसे बड़ी साझेदारी है। वनडे एशिया कप में यह किसी भी विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी है। इससे पहले मोहम्मद हफीज और नासिर जमशेद ने 2012 में 224 रन की साझेदारी निभाई थी। वहीं, शोएब मलिक और यूनिस खान ने 2004 एशिया कप में हॉन्गकॉन्ग के खिलाफ 223 रन की साझेदारी की थी।
विराट 94 गेंदों में नौ चौके और तीन छक्के की मदद से 122 रन बनाकर नाबाद रहे। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 129.79 का रहा। एक वक्त भारतीय पारी के 28वें ओवर में राहुल ने 41 गेंदों में 22 रन बनाए थे। तब उनका स्ट्राइक रेट 53.66 का रहा था। इसके बाद पूरी पारी खत्म होने पर राहुल ने 65 गेंदों में 89 रन बनाए। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 136.92 का रहा।
यह वनडे में तीसरी बार है जब भारत के नंबर तीन और नंबर चार ने एक साथ शतक लगाया है। इससे पहले राहुल द्रविड़ और सचिन तेंदुलकर ने 1999 में केन्या के खिलाफ ब्रिस्टल में, गौतम गंभीर और विराट कोहली ने श्रीलंका के खिलाफ 2009 में कोलकाता में ऐसा किया था।