जसप्रीत बुमराह ने विश्व कप में भारत के लिए शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने टीम इंडिया को फाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। बुमराह ने 10 मैच में 18 विकेट हासिल किए हैं। इस साल चोट के कारण लंबे समय तक टीम से दूर रहने वाले इस तेज गेंदबाज ने एशिया कप से वापसी की और छा गए। उन्होंने एशिया कप की जीत में भी अहम भूमिका निभाई थी और विश्व कप में भी धारधार गेंदबाजी की। शांत स्वभाव के माने जाने वाले बुमराह का यहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा है।
बुमराह ने 14 साल की उम्र में क्रिकेट को पूरी तरह अपनाया। उन्होंने इस खेल के लिए खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया। बुमराह ने पांच साल की उम्र में ही पिता को खो दिया था। उन्हें मां और बहन ने मिलकर पाला। पिता के निधन का असर घर की आर्थिक स्थिति पर पड़ा। आज भले ही बुमराह को करोड़ों की सैलरी मिलती है, लेकिन एक समय ऐसा था कि उन्हें एक जोड़ी शर्ट और एक जोड़ी जूते में समय गुजारना पड़ रहा था। बड़े-बड़े ब्रांड के जूते पहनने पर बुमराह तब दुकान के पास जाकर सिर्फ जूतों को देखकर चले आते थे।
जब बुमराह की मां रोने लगी थीं
बुमराह ने मुंबई इंडियंस को दिए इंटरव्यू में बताया था, "पिता को खोने के बाद उनका परिवार कुछ भी जुटाने में असमर्थ था। मेरे पास सिर्फ एक जोड़ी जूते थे। यहां तक कि टी-शर्ट भी एक जोड़ी ही थे। मैं हर दिन टी-शर्ट को धोता था और उसका इस्तेमाल बार-बार करता था। हम ऐसी कहानियां सुनते हैं, लेकिन मेरे जीवन में ऐसा हुआ है। जब मैं आईपीएल में पहली खेला तो मेरी मां रोने लगी थी। उन्होंने शारीरिक और आर्थिक रूप से मुझे जूझते हुए देखा था।''
2013 के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा
बुमराह ने 2013 में आईपीएल और प्रथम श्रेणी में डेब्यू किया था। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह मौजूदा टीम में भारत के सबसे अहम गेंदबाज हैं और उन्होंने कई बड़े मैचों में टीम को जीत दिलाई है। बुमराह ने 30 टेस्ट मैचों में 128 और 62 वनडे मैचों में 74 विकेट लिए हैं। विश्व कप का फाइनल उनका 89वां वनडे मुकाबला है। अब तक 88 मैचों में उन्होंने 147 विकेट लिए हैं।