अस्सी और नब्बे के दशक के क्रिकेटर कभी आईपीएल जैसे ग्लैमर और चकाचौंध वाले टूर्नामेंट का हिस्सा नहीं बन पाए। कल्पना कीजिए यदि आज के दौर में वे खेल रहे होते तो फ्रेंचाइजी टीमें उन पर अच्छी खासी रकम खर्च करने को तैयार रहती। उदाहरण के लिए कृष श्रीकांत को ही देखिए, क्या वह बिना हेलमेट के पैट कमिंस के बाउंसर पर करारा शॉट लगा सकते थे? बेन स्टोक्स के बारे में क्या सोचेंगे? वह मनोज प्रभाकर की धीमी गति की गेंद को कैसे खेलते? अगर कपिल देव को 19वें ओवर में जसप्रीत बुमराह का सामना करना पड़ा, तो मुंबई इंडियंस का यह गेंदबाज पूर्व भारतीय दिग्गज का कैसी गेंद डालता।