जिम्बाब्वे के खिलाफ वनडे सीरीज में अजेय बढ़त लेने के बाद इस बात की पूरी संभावना थी कि परवेज रसूल को पांचवें और अंतिम मैच में मौका मिलेगा लेकिन उनका ख्वाब आज भी पूरा नहीं हो सका।
रसूल चौथे वनडे मैच में टीम इंडिया की नीली जर्सी पहनने से चूक गए थे। टीम इंडिया की अंतिम एकादश में जगह पाने की अंतिम आस पांचवें मैच में थी लेकिन उनका इंतजार और बढ़ गया है। विराट कोहली की कप्तानी भारत पहले ही सीरीज पर कब्जा जमा चुका है।
अगर इस फिरकी गेंदबाज को अंतिम एकादश में मौका मिलता तो वह राष्ट्रीय टीम में जगह पाने वाले जम्मू-कश्मीर के पहले क्रिकेटर हो जाते। साथ ही उनके नाम एक ऐसा रिकॉर्ड जुड़ जाता जो अब तक किसी भी भारतीय क्रिकेटर के नाम नहीं था।
रसूल शनिवार को जिम्बाब्वे के खिलाफ वनडे क्रिकेट में पदार्पण करते तो वह भारत की ओर से 200वें क्रिकेटर हो जाते जिन्हें 50-50 ओवर के फॉर्मेट में खेलने का मौका मिला।
इस दौरे में अब तक चार युवा भारतीयों को वनडे कॅरियर शुरू करने का मौका मिल चुका है। रसूल से पहले अंबाती रायडू, जयदेव उनादकट, मोहित शर्मा और चेतेश्वर पुजारा जिम्बाब्वे में अपने वनडे कॅरियर की शुरुआत कर चुके हैं।
सीरीज से पहले बंगाल के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी देश के 195वें क्रिकेटर थे जिन्होंने जनवरी में पाकिस्तान के खिलाफ वनडे कॅरियर का आगाज किया था। उसके बाद इस सीरीज में चार क्रिकेटरों ने वनडे कॅरियर शुरू किया।
रसूल से पहले जम्मू-कश्मीर के आबिद नबी, सुरेन्द्र सिंह और अब्दुल कयूम राष्ट्रीय टीम के लिए चुने गए थे लेकिन वह कभी भारत के लिए अंतिम एकादश में जगह नहीं बना पाए थे।
जम्मू-कश्मीर के बिजबेहरा में जन्मे 24 वर्षीय रसूल भारत 'ए' के अलावा आईपीएल में पुणे वॉरियर्स के लिए खेल चुके हैं। रसूल ने 17 प्रथम श्रेणी मैचों में 1003 रन बनाने के अलावा 46 विकेट भी हासिल किए हैं।