भारत के खिलाफ चार मैचों की टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले नवबंर के अंतिम हफ्ते में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर फिल ह्यूज को बल्लेबाजी के दौरान सिर पर बाउंसर लगी और वह कोमा में चले गए। इसके 2 दिन बाद उनका निधन हो गया। इस निधन से कई ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी सदमे में चले गए। बाउंसर डालने वाले तेज गेंदबाज सियन एबॉट के अलावा मैदान पर मौजूद 4 अन्य बड़े क्रिकेटरों को मनोवैज्ञानिक काउंसिलिंग कराई गई।
सीरीज के दौरान भी बाउंसर का खौफ दिखा। एडिलेड में पहले टेस्ट के दौरान जब भारतीय कप्तान विराट कोहली को मिचेल जॉनसन का बाउंसर हेलमेट पर लगा तो सभी ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी उनके पास पहुंच गए और उनका कुशलक्षेम पूछा। आगे भी सीरीज में कई ऐसे मौके आए जब दोनों टीमों के खिलाड़ी बाउंसर से डरते दिखे।
हालांकि इसी सीरीज के दूसरे टेस्ट मैच के दौरान एक ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज ऐसा भी है जिसने सिर पर गेंद लगने के बाद ही क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला कर लिया। भारत के खिलाफ खेली गई यह उनकी आखिरी घरेलू सीरीज है। वह इंग्लैंड में होने वाले एशेज सीरीज के बाद क्रिकेट से संन्यास ले लेंगे।
सीरीज के दौरान चोटों से काफी डरी हुई थी ऑस्ट्रेलियाई टीम
बाउंसर से क्रिकेटर फिल ह्यूज की मौत के बाद भारत के खिलाफ दूसरे टेस्ट में बाउंसर से यह ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी इतना डर गया कि उसने संन्यास लेने का फैसला कर लिया।
हम यहां बात कर रहे हैं सीरीज में लगातार 6 अर्धशतक लगाने वाले ऑस्ट्रेलिया के सलामी बल्लेबाज क्रिस रोजर्स की, जिन्होंने दूसरे टेस्ट के दौरान ही संन्यास लेने की बात सोच ली थी। रोजर्स ने कहा कि रोहित शर्मा के स्वीप शॉट पर गेंद उनके हेलमेट पर लगने के बाद उन्होंने अपने संन्यास के बारे में सोच लिया था। उन्हें यह गेंद गाबा में भारत के खिलाफ दूसरे टेस्ट में क्षेत्ररक्षण करने के दौरान लगी थी।
वाकया उस वक्त का है जब ब्रिसबेन टेस्ट के शुरुआती दिन रोजर्स शॉर्ट लेग पर क्षेत्ररक्षण कर रहे थे। 37 वर्षीय इस खिलाड़ी को गेंद हेलमेट के पिछले हिस्से में लगी थी। गेंद ठीक उसी जगह लगी थी जहां दिवंगत फिल ह्यूज को नवंबर में शेफील्ड शील्ड गेम के दौरान लगी थी और इस वजह से उनकी मौत हो गई थी।
रोजर्स इस घटना के बाद काफी अपसेट थे। वह इतना अपसेट थे कि उन्होंने क्रिकेट से संन्यास लेने का सोच लिया था। सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड ने उनके हवाले से लिखा, "फिल को जो हुआ उसके बाद यह अजीब समय था। कई खिलाड़ी ऐसे थे, जिन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।"
सलामी बल्लेबाज रोजर्स ने कहा, "एडीलेड में जब कप्तान माइकल क्लार्क चोटिल हुए तो अंतिम दिन मैं शॉर्ट लेग पर क्षेत्ररक्षण कर रहा था और वहां मेरे कूल्हे पर गेंद लगी। मैंने बल्ले से काफी अच्छा प्रदर्शन नहीं किया था इसलिए अपने फॉर्म को लेकर खुश नहीं था।"
सिर पर गेंद लगने के बाद काफी हताश हो गए थे रोजर्स
चार टेस्ट की सीरीज में 52.12 की औसत से 417 रन बनाने वाले सलामी बल्लेबाज क्रिस रोजर्स ने कहा, "इसके बाद हम ब्रिसबेन गए और पहले दिन मैं फिर वहीं क्षेत्ररक्षण कर रहा था। रोहित शर्मा ने स्वीप शॉट खेला जो मेरे हेलमेट के पीछे लगा और यह उस जगह से कुछ ही इंच दूर था जहां फिल को गेंद लगी थी। ऐसे में आपके दिमाग में अलग-अलग ख्याल आते हैं। उस रात मैं काफी निराश था इतना अधिक कि मुझे सुनिश्चित नहीं था कि मैं क्या कदम उठाऊं। मुझे अपने करीबी कुछ लोगों से बात करनी पड़ी।"
रोजर्स ने अंतत: सीरीज में लगातार 6 अर्द्धशतक जड़े और यह उपलब्धि हासिल करने वाले ऑस्ट्रेलिया के नौवें बल्लेबाज बने। उन्होंने कहा कि ओपनर के रूप में आपको नई गेंद के समाने कड़ी मेहनत करनी होती है और एक बार जमने के बाद आप सोचते हैं कि अब रन बनाना आसान होगा और आप बड़ी पारी खेल सकते हो।
रोजर्स ने कहा, "लेकिन मुझे लगता है कि महत्वपूर्ण चीज योगदान देना है। मैं यूएई में पाकिस्तान के खिलाफ चूक गया। अंत में यह अच्छी सीरीज भारत के खिलाफ रही। निजी तौर पर मैं थोड़ा दबाव में था और फिर एडीलेड में भी चूक गया लेकिन मैंने अच्छी वापसी की।"
रोजर्स का मानना है कि वह इंग्लैंड में एशेज के साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहेंगे। उन्होंने कहा, "आप कभी मना नहीं करते लेकिन यह करियर का अंत करने का सही तरीका हो सकता है। मैं इंग्लैंड में काफी खेला हूं, यह मेरे लिए काफी मायने रखता है।" इससे पहले 27 दिसंबर, 2013 को मेलबर्न में एशेज टेस्ट मैच के दौरान इंग्लैंड के खिलाफ बल्लेबाजी के वक्त बाउंसर से चोटिल हो गए थे और उनके कान से खून बहने लगा था।