जब मैं सिडनी में होने वाले दूसरे सेमीफाइनल के बारे में सोचता हूं, तो बस एक ही ख्याल दिमाग में आता है कि विश्व कप फाइनल एक मैच पहले ही हो रहा है। मेरी नजर में ऑस्ट्रेलिया और भारत टूर्नामेंट की सर्वश्रेष्ठ टीमें हैं। हालांकि मैं मैककुलम की टीम को भी नहीं भूल रहा हूं, जिन्होंने घरेलू मैदान में शानदार प्रदर्शन से सभी का ध्यान खींचा है।
लेकिन अगर अनुभव और मैच विनर खिलाड़ियों के आधार पर आकलन करें, तो मुझे भारत और ऑस्ट्रेलिया से ज्यादा बेहतर टीम नहीं दिखाई देती। इसी वजह से मैं इस गेम को फाइनल की तरह देख रहा हूं।
चार साल पहले मोहाली में भी ऐसा ही माहौल था। जब हमने यह मैच जीता तो लगा कि सिर पर से बड़ा बोझ उतर गया और फाइनल से पहले हमारा आत्मविश्वास काफी बढ़ गया था। इसी वजह से विश्व कप फाइनल के लिए हम टीम मीटिंग को लेकर भी थोड़े लापरवाह दिखे और मीटिंग 10 मिनट से भी कम समय में खत्म हो गई। जबकि सेमीफाइनल से पहले तीन लंबी बैठक हुई थीं!
इसलिए गुरुवार के मैच में जो टीम दबाव को बेहतर ढंग से झेलेगी, जीत हासिल करेगी। हमारी टीम जिस क्वालिटी का क्रिकेट खेल रही है, उसे देखकर मेरी उम्मीदें काफी बढ़ी हैं। अगर वे अपनी मौजूदा फॉर्म को जारी रखते हैं, तो वह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना वर्चस्व बना सकते हैं।
ऑस्ट्रेलियाई कैंप से जो बयानबाजी हो रही है, उससे लगता है कि उन्हें लगने लगा है कि त्रिकोणीय सीरीज में भारत के खिलाफ उनकी सफलता को देखते हुए उनका पलड़ा भारी है। मैक्सवेल ने काफी बयानबाजी की है। लेकिन यह याद रखना चाहिए कि त्रिकोणीय सीरीज और विश्व कप सेमीफाइनल दो अलग-अलग चीजें हैं।