पार्थिव पटेल के शतक और उसके बाद आरपी सिंह और जसप्रीत बुमराह की घातक गेंदबाजी की बदौलत गुजरात ने फाइनल में दिल्ली को 139 रनों से हराकर विजय हजारे ट्रॉफी जीत ली। कप्तान पार्थिव पटेल के शानदार 105 रन की बदौलत गुजरात ने 50 ओवर में 273 रन बनाए।
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जवाब में आरपी सिंह और जसप्रीत बुमराह के कहर के आगे दिल्ली की पूरी टीम 32.3 ओवर में 134 रन बनाकर ढेर हो गई। आरपी ने 42 रन देकर चार विकेट झटके जबकि बुमराह ने 28 गेंदों में पांच बल्लेबाजों को पेवेलियन भेजा। आरपी सिंह ने शिखर धवन और गौतम गंभीर को 5 और 9 रन पर आउट किया।
लक्ष्य का पीछा करते हुए दिल्ली के स्टार बल्लेबाजों की बल्लेबाजी दोयम दर्जे की रही। पहली ही गेंद पर उन्होंने ऋषभ पंत का विकेट गंवा दिया। उसके बाद शिखर धवन (05) और कप्तान गौतम गंभीर (09) सस्ते में पेवेलियन लौट गए।
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धवन और गंभीर के आउट होने के बाद थोड़ी उम्मीद उन्मुक्त चंद से थी लेकिन 17वें ओवर में बुमराह ने उन्हें बोल्ड आउट कर दिल्ली को बैकफुट पर धकेल दिया।
उन्मुक्त 33 रन बनाकर आउट हुए लेकिन उनकी इस पारी के दौरान उन्हें जीवनदान भी मिला। इसके बाद दिल्ली की पूरी बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। दिल्ली अपने पांच बल्लेबाज महज 59 रन पर गंवा दिए।
आखिरी में ऑफ स्पिनर पवन नेगी ही गुजरात के गेंदबाजों के आगे जूझते नजर आए। उन्होंने 47 गेंदों में शानदार 57 रन बनाए। लेकिन बुमराह ने उन्हें मेराई के हाथों लपकवा दिल्ली का काम तमाम कर दिया।
इससे पहले टॉस जीतकर दिल्ली ने गुजरात को पहले बल्लेबाजी का न्यौता दिया। पार्थिव पटेल ने 119 गेंदों में 10 चौकों और एक छक्का की मदद से 105 रन की शानदार पारी खेली।
रुजुल भट ने 60 रन और चिरान गांधी ने नाबाद 44 रन का योगदान दिया। पार्थिव को उस समय जीवनदान मिला जब 67 के उनके व्यक्तिगत स्कोर पर मनन शर्मा ने उनका कैच छोड़ दिया। दिल्ली के लिए नवदीप सैनी, सुबोध भाटी और पवन नेगी ने दो-दो विकेट झटके।