गौतम गंभीर और जय शाह
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बीसीसीआई ने आईपीएल के बीच 27 मई तक मुख्य कोच के आवेदन की आखिरी तारीख रखी थी। किसी को पता नहीं था कि गंभीर आवेदन करेंगे या नहीं। हालांकि, जून में यह खबर आई कि गंभीर ने मुख्य कोच के लिए इंटरव्यू दिया है। उनके साथ डब्ल्यू वी रमन ने भी आवेदन भरा था। ऐसे में गंभीर का चुना जाना तय माना गया। बस औपचारिक एलान होना था। अब जय शाह ने वह भी कर दिया है।
कोच नियुक्त किए जाने के बाद गंभीर ने ट्विटर पर लिखा- भारत मेरी पहचान है और अपने देश की सेवा करना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य रहा है। हालांकि, इस बार कैप अलग तरह की होगी, लेकिन इसके बावजूद वापस आकर मैं सम्मानित महसूस कर रहा हूं। मेरा लक्ष्य वही है जो हमेशा से रहा है, हर भारतीय को गौरवान्वित करना। नीली जर्सी में मौजूद खिलाड़ियों के कंधों पर 1.4 अरब भारतीयों के सपने हैं और मैं इन सपनों को साकार करने के लिए अपना पूरा दम लगा दूंगा।
गौतम गंभीर
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गंभीर एक चैंपियन खिलाड़ी रहे हैं और अपने सख्य रवैये और शानदार गेम प्लानिंग के लिए जाने जाते हैं। वह भारत को दो आईसीसी ट्रॉफी जिता चुके हैं। इसके अलावा आईपीएल में महेंद्र सिंह धोनी और रोहित शर्मा के बाद वह भारत के तीसरे सबसे सफल कप्तान हैं। उन्होंने कुछ मैचों में टीम इंडिया की कप्तानी भी की है और उनकी कप्तानी में भारत ने 100 प्रतिशत मैच जीते हैं। आइए उनके सफर के बारे में जानते हैं...
गंभीर ने 2003 में किया था अंतरराष्ट्रीय डेब्यू
गौतम गंभीर
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गंभीर ने 2003 में बांग्लादेश के खिलाफ वनडे मैच से अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया था। टेस्ट में उन्होंने पहला मैच 2004 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वानखेड़े में खेला था। वहीं, टी20 में गंभीर ने अपना पहला मैच 2007 में स्कॉटलैंड के खिलाफ खेला था। उनके सामने सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीरेंद्र सहवाग जैसे दिग्गजों के रहते खुद को टीम इंडिया में स्थापित करने की चुनौती थी। 2003 में उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की तो शुरुआत हुई, लेकिन टीम में नियमित तौर पर उन्होंने खुद को 2007 में टी20 विश्व कप के बाद स्थापित किया। 2007 में भारत के लिए ओपनिंग करते हुए गंभीर ने कई अहम पारियां खेलीं। इनमें पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल में मैच विनिंग 54 गेंद में 75 रन की पारी शामिल है। इसकी बदौलत ही भारत ने 157 रन बनाए थे। जवाब में पाकिस्तान की टीम 152 रन पर सिमट गई थी और टीम इंडिया पहले टी20 विश्व कप में चैंपियन बन गई थी।
2011 में भारत को वनडे चैंपियन बनने में मदद की
गौतम गंभीर
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इसके बाद गंभीर तीनों प्रारूप में भारत के नियमित खिलाड़ी बन गए। उनकी और सहवाग की ओपनिंग जोड़ी सुपरहिट रही। हालांकि, भारतीय टीम और बैटिंग पोजिशन में बदलाव होते रहे। कभी गंभीर के साथ सहवाग तो कभी गंभीर के साथ सचिन या गांगुली ओपनिंग करने उतरे। सचिन-सहवाग या फिर सचिन-गांगुली के ओपनिंग करने पर गंभीर तीसरे नंबर पर भी बैटिंग के लिए उतरे। ऐसे में उनकी बैटिंग पोजिशन के साथ जरूर छेड़छाड़ हुई, लेकिन इससे गंभीर के फॉर्म पर कोई असर नहीं पड़ा। 2011 वनडे विश्व कप में टीम इंडिया सचिन-सहवाग के ओपनिंग जोड़ी के साथ मैदान पर उतरी। ऐसे में गंभीर को तीसरे नंबर पर खिलाया गया।
फाइनल तक सबकुछ सही रहा, लेकिन श्रीलंका के खिलाफ फाइनल में 275 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत ने एक वक्त 31 रन पर सचिन-सहवाग दोनों के विकेट गंवा दिए थे। ऐसे में गंभीर संकटमोचक बनकर उभरे। उन्होंने पहले विराट कोहली के साथ तीसरे विकेट के लिए 83 रन की साझेदारी निभाई। फिर धोनी के साथ चौथे विकेट के लिए मैच जिताऊ 109 रन की साझेदारी की। गंभीर उस फाइनल में शतक से चूक गए थे। हालांकि, असल मायनों में टीम इंडिया की जीत की स्क्रिप्ट उन्होंने ही लिखी थी। गंभीर ने 122 गेंद में नौ चौके की मदद से 97 रन बनाए थे। भारत दूसरी बार विश्व चैंपियन बना।
2012 और 2014 में केकेआर को चैंपियन बनाया
गौतम गंभीर
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शाहरुख खान के मालिकाना हक वाली कोलकाता टूर्नामेंट के शुरुआत से ही लीग का हिस्सा है, लेकिन उसे अपनी पहली खिताबी जीत के लिए चार साल का इंतजार करना पड़ा था। 2011 सीजन के लिए हुई खिलाड़ियों की नीलामी में कोलकाता ने गंभीर पर दांव लगाया और कप्तान भी नियुक्त किया। उस सीजन केकेआर के अधिकतर खिलाड़ी बदल चुके थे। गंभीर ने अपनी टीम खड़ी की और टीम पहली बार प्लेऑफ में पहुंचने में सफल रही। उस सीजन कोलकाता चौथे स्थान पर रही थी। 2012 सीजन में टीम एक बार फिर गंभीर के नेतृत्व में उतरी। उस सीजन गंभीर का बल्ला भी जमकर बोला और टीम ने पहली बार फाइनल में प्रवेश किया। खिताबी मुकाबले में कोलकाता का सामना लगातार दो सीजन की चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) से था।
कोलकाता के सामने धोनी की कप्तानी वाली सीएसके की कठिन चुनौती थी। यह मुकाबला चेन्नई के होम ग्राउंड चेपॉक स्टेडियम पर हुआ था और चेन्नई ने केकेआर के सामने जीत के लिए 191 रनों का लक्ष्य रखा जिसे कोलकाता ने दो गेंद शेष रहते पांच विकेट खोकर हासिल किया। इस तरह केकेआर ने गंभीर की कप्तानी में पहली बार खिताब जीता। इसके बाद टीम ने 2014 सीजन में पंजाब किंग्स को हराकर दूसरी बार ट्रॉफी अपने नाम की। केकेआर और गंभीर का साथ 2017 सीजन के बाद टूट गया क्योंकि गंभीर ने क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला किया।
सात सीजन में चार कप्तानों के नेतृत्व में खेली टीम
शाहरुख खान, पूजा ददलानी, गौतम गंभीर
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गंभीर का टीम का साथ छोड़ने के बाद 2018 से 2020 तक दिनेश कार्तिक ने केकेआर की कमान संभाली। हालांकि कार्तिक के नेतृत्व में टीम का प्रदर्शन काफी खराब और केकेआर तीन में से सिर्फ एक बार ही प्लेऑफ में जगह बना सकी थी। कोलकाता 2018 में तीसरे, 2019 और 2020 में पांचवें स्थान पर रही। 2021 सीजन में इयोन मोर्गन को कप्तान बनाया गया और इस सीजन का पहला चरण टीम के लिए काफी निराशाजनक रहा। उस सीजन कोविड-19 के कारण टूर्नामेंट निलंबित हो गया और इसका दूसरा चरण सितंबर-अक्टूबर में हुआ। दूसरे चरण में कोलकाता ने शानदार वापसी की और टीम फाइनल में जगह बनाने में सफल रही। हालांकि केकेआर ट्रॉफी नहीं जीत सकी। अगले सीजन श्रेयस अय्यर दिल्ली कैपिटल्स की जगह केकेआर से जुड़े और टीम ने उन्हें कप्तान नियुक्त किया। 2022 में कोलकाता का प्रदर्शन निराशाजनक रहा और टीम सातवें स्थान पर रही। 2023 सीजन में श्रेयस चोट के कारण टूर्नामेंट से बाहर रहे और उनकी जगह नीतीश राणा ने केकेआर की कमान संभाली, लेकिन नीतीश भी खिताबी सूखे को समाप्त नहीं करा सके।
गंभीर ने मेंटर के तौर पर की सफल वापसी
गौतम गंभीर
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गंभीर के संन्यास लेने के बाद केकेआर लंबे समय तक खिताबी जीत का इंतजार करती रही, लेकिन उनके मेंटर बनते ही कोलकाता चैंपियन बनकर उभरी। केकेआर को आईपीएल का खिताब जीते लंबा समय बीत चुका था और टीम प्रबंधन का कोई भी प्रयोग ट्रॉफी का सूखा समाप्त नहीं करा पा रहा था। ऐसे में कोलकाता ने एक बार फिर अपने पूर्व कप्तान की ओर देखा। गंभीर 2022 सीजन से आईपीएल में शामिल हुई लखनऊ सुपरजाएंट्स के मेंटर के तौर पर जुड़े और उन्होंने दो बार टीम को प्लेऑफ तक पहुंचाया। 2023 सीजन के बाद यह खबरें आने लगी कि शाहरुख खान गंभीर को दोबारा टीम में शामिल करने में रुचि जता रहे हैं और आखिरकार गंभीर की मेंटर के तौर पर कोलकाता में वापसी हुई। गंभीर के साथ-साथ कोलकाता के लिए यह सुखद संकेत रहा क्योंकि टीम लंबे इंतजार के बाद आखिरकार 10 साल का खिताबी सूखा समाप्त करने में कामयाब रही।
अब फिर से भारतीय टीम में वापसी, लेकिन बतौर कोच
गौतम गंभीर
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गंभीर की आईपीएल में सफल वापसी के बाद अब वह टीम इंडिया में वापसी कर चुके हैं। ऐसे में जिस तरह से उन्होंने केकेआर को चैंपियन बनने में मदद की, फैंस को उम्मीद होगी कि टीम इंडिया भी उनकी देखरेख में वनडे और फिर टी20 चैंपियन बने। भारत को 2026 में अपने घर में टी20 खिताब का बचाव करना है। साथ ही 2027 में दक्षिण अफ्रीका में वनडे विश्व कप खेलना है। इसके अलावा गंभीर की नजर 2025 में भारत को चैंपियंस ट्रॉफी जिताने और विश्व टेस्ट चैंपियनशिप जिताने पर होगी।
गौतम गंभीर और युवराज सिंह
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गंभीर ने भारत के लिए 58 टेस्ट, 147 वनडे और 37 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं। टेस्ट में उनके नाम 41.96 की औसत से 4154 रन, वनडे में 39.68 की औसत से 5238 रन और टी20 में 119.03 के स्ट्राइक रेट से 932 रन बनाए। टेस्ट में गंभीर के नाम नौ शतक और 22 अर्धशतक, वनडे में 11 शतक और 34 अर्धशतक, टी20 में सात अर्धशतक हैं। टेस्ट में गंभीर की सर्वश्रेष्ठ पारी 206 रन की, वनडे में 150 रन की और टी20 में 75 रन की है। आईपीएल में गंभीर ने 154 मैच खेले और 123.91 के स्ट्राइक रेट से 4218 रन बनाए। उनकी कप्तानी में भारत ने छह मैच खेले हैं और छह में जीत हासिल की है। गंभीर ने आईपीएल में 129 मैचों में कप्तानी की है और 71 मैच जीते हैं। उनकी कप्तानी में टीम 57 मैच हारी है। आईपीएल में गंभीर ने केकेआर के अलावा दिल्ली कैपिटल्स की कप्तानी की है।