सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर का माफीनामा नामंजूर कर दिया है। उच्चतम न्यायालय उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना और परजरी के मामले को बंद करने को तैयार है, लेकिन कोर्ट ने उन्हें बिना शर्त माफीनामा दाखिल करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 14 जुलाई को पेश होने के आदेश दिया है।
कोर्ट ने अपने आदेश में सख्द हिदायत देते हुए कहा कि माफीनामें की भाषा साफ और स्पष्ट हो, जिसमें कोई भी पेच न हो। अदालत की अवमानना और परजरी के मामले में ठाकुर के माफीनामे पर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश सुनाया है। अनुराग ठाकुर ने इस मामले में अदालत से माफी मांगी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर उनके खिलाफयह साबित हो जाता है कि उन्होंने बीसीसीआई में सुधार पर अड़ंगा नहीं लगाने की झूठी शपथ ली है तो उन्हें जेल भेजा जा सकता है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में अनुराग ठाकुर ने कहा था, "उनका कतई भी ऐसा इरादा नहीं था. अगर इस तरह का नजरिया बन रहा है तो वह इसके लिए बिना शर्त माफी मांगते हैं।"
परजरी (अदालत के समक्ष गलतबयानी करना) मामले में नोटिस जारी करने के बाद अनुराग द्वारा दाखिल इस हलफनामे में कहा गया था कि वह तीन बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं और बहुत कम उम्र से सार्वजनिक जीवन जी रहे हैं। वह अदालत का बहुत सम्मान करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अब तक ऐसा कोई काम नहीं किया जिसमें अदालत की अनदेखी की गई हो।