अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट का संचालन करने वाली संस्था (आईसीसी) ने महिला क्रिकेट के लिए बड़ा फैसला किया है। आईसीसी ने बताया है कि जिन खिलाड़ियों के शरीर में किशोरावस्था के दौरान पुरुषों के समान बदलाव हुए हैं। वह लिंग परिवर्तन कराने के बावजूद महिला क्रिकेट में भाग नहीं ले सकेंगे। आईसीसी ने यह भी साफ किया कि लिंग परिवर्तन इसमें मायने नहीं रखता है। अगर किसी खिलाड़ी ने किशोरावस्था में पुरुषों के समान शारीरिक बदलाव महसूस किए हैं तो वह महिला क्रिकेट में भाग लेने के योग्य नहीं है।
आईसीसी ने एक बयान में कहा, "आईसीसी बोर्ड ने खेल के हितधारकों के साथ नौ महीने के परामर्श के बाद अंतरराष्ट्रीय खेल के लिए नए लिंग पात्रता नियमों को मंजूरी दी है। नई नीति महिलाओं के खेल की अखंडता, सुरक्षा, निष्पक्षता और समावेशन पर आधारित है। इसका मतलब है कि कोई भी पुरुष से महिला बनने वाले प्रतिभागी जो किसी भी प्रकार के पुरुष यौवन से गुजर चुके हैं। वे किसी भी सर्जरी या लिंग परिवर्तन उपचार के बावजूद अंतरराष्ट्रीय महिला खेल में भाग लेने के पात्र नहीं होंगे।"
लिंग पुनर्निर्धारण पिछले कुछ वर्षों में विश्व एथलेटिक्स में बहस का विषय रहा है।आईसीसी ने अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट के लिए लिंग पात्रता के नियमों को मजबूत करते हुए घरेलू स्तर पर इस मुद्दे को सदस्य बोर्डों के हाथों में छोड़ दिया।
आईसीसी ने कहा "डॉ. पीटर हरकोर्ट की अध्यक्षता वाली आईसीसी चिकित्सा सलाहकार समिति के नेतृत्व में की गई समीक्षा पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट के लिए लैंगिक पात्रता से संबंधित है, जबकि घरेलू स्तर पर लैंगिक पात्रता प्रत्येक सदस्य बोर्ड का मामला है, जो स्थानीय स्तर पर प्रभावित हो सकता है। नियमों की दो साल के भीतर समीक्षा की जाएगी।''
आईसीसी के मुख्य कार्यकारी ज्योफ एलार्डिस ने कहा कि विश्व संचालन संस्था "व्यापक विचार-विमर्श" के बाद इस निर्णय पर पहुंची है। लिंग पात्रता नियमों में बदलाव एक व्यापक परामर्श प्रक्रिया के परिणामस्वरूप हुआ और यह विज्ञान पर आधारित है और समीक्षा के दौरान विकसित किए गए मूल सिद्धांतों के अनुरूप है।
एलार्डिस ने कहा, "एक खेल के रूप में समावेशिता हमारे लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन हमारी प्राथमिकता अंतरराष्ट्रीय महिला खेल की अखंडता और खिलाड़ियों की सुरक्षा की रक्षा करना है।"
इस बीच, मुख्य कार्यकारी समिति (सीईसी) ने महिला मैच अधिकारियों के विकास में तेजी लाने के लिए एक योजना का समर्थन किया, जिसमें पुरुष और महिला क्रिकेट में आईसीसी अंपायरों के लिए समान वेतन शामिल है, और यह सुनिश्चित करना कि प्रत्येक आईसीसी महिला चैम्पियनशिप में अगले सालजनवरी से एक तटस्थ अंपायर हो।