विश्व कप के लिए भारतीय टीम लगभग तय है। कुछ क्रम को छोड़ दिया जाए तो सारे खिलाड़ी चुने जा चुके हैं। 30 मई से शुरू होने वाले क्रिकेट के 'महाकुंभ' से ठीक पहले भारतीय टीम को तगड़ा झटका लगा है। हार्दिक पांड्या पीठ में मांसपेशियों के खिंचाव के चलते ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पूरी सीरीज से बाहर हो गए। अब उनकी जगह रवींद्र जडेजा को टीम में शामिल किया गया है।
कुछ साल पहले तक रवींद्र जडेजा की गिनती सामान्य ऑलराउंडर्स में होती थी। मगर पिछले कुछ समय में जड्डू बेहतर खिलाड़ी बनकर उभरे। सीमित ओवर्स में उनकी प्रतिभा पर किसी को शक नहीं, वे आईपीएल में जमकर धमाल मचाते हैं। घरेलू हालातों में उनसे खतरनाक स्पिनर कोई नहीं, लेकिन विदेशी धरती पर न सिर्फ उनकी गेंदबाजी संदेह के दायरे में होती है बल्कि बल्लेबाजी रिकॉर्ड भी खराब हो जाता हैै।
लेकिन अब जडेजा बदल चुके हैं। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पिछली दो सीरीज में उन्हें जब-जब मौका मिला तब-तब उन्होंने गेंद और बल्ले दोनों से प्रभावित किया। दोनों ही जगह उन्होंने तगड़ा खेल दिखाया। इस प्रदर्शन के दमपर उनकी जगह विश्व कप 2019 टीम में तो बनती थी, लेकिन घरेलू सीरीज में टीम प्रबंधन ने उन्हें दरकिनार कर दिया। जिस वक्त उनकी टीम में जगह पक्की होनी चाहिए थी, तब उन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू एकदिवसीय और टी-20 सीरीज में शामिल नहीं किया गया था।
क्रिकेट पंडित इस दौरे को विश्व कप 2019 का फुल ड्रेस रिहर्सल मान रहे थे। यानी वही टीम चुनी गई थी, जो इंग्लैंड जाती, लेकिन अब हार्दिक पांड्या के चोटिल होने के बाद एक बार फिर जडेजा की सोई किस्मत जाग चुकी है। पांड्या गेंद और बल्ले दोनों से टीम के लिए अहम थे। अब अगर 2 टी-20 और पांच वन-डे की सीरीज में जड्डू को प्लेइंग इलेवन में मौका मिलता है तो उन्हें अपनी उपयोगिता साबित करनी ही होगी।
इंग्लैंड की पिच भारतीय उपमहाद्वीप से एकदम उलट होगी। बल्लेबाजों को सीम-स्विंग-पेस तीनों से जूझना होगा। साथ ही गेंदबाजी में भी उन फैक्टर्स पर काम करना होगा, जहां मदद मिल सके। विजय शंकर के रूप में टीम के पास एक ऐसा ऑलराउंडर मौजूद है, जो इंग्लैंड में तेज गेंदबाजी के साथ-साथ आक्रामक बल्लेबाजी भी कर सकता हो। स्पिन डिपार्टमेंट कुलदीप यादव और यजुवेंद्र चहल के युवा कंधों पर होगा। दोनों बेहतरीन फिरकी गेंदबाज हैं और इनके रहते आने वाले विश्वकप की योजना में भी जडेजा तीसरे नंबर के स्पिनर रहेंगे जो शायद किसी संकट की घड़ी में ही याद किए जाएं।
तेज गेंदबाजी करने के लिए जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी, इशांत शर्मा, भुवनेश्वर कुमार, उमेश यादव जैसे गेंदबाज हैं। दूसरी पंक्ति में खलील अहमद, मोहम्मद सिराज, सिद्धार्थ कौल जैसे नाम हैं। भारतीय टीम के लिए 147 मैच की 98 पारियों में 30.61 की औसत से 1990 (0 शतक और 10 अर्धशतक) रन बना चुके और गेंदबाजी में इतने ही मुकाबलों में 171 विकेट चटका चुके रवींद्र जडेजा को अगर विश्व कप 2019 में अपनी जगह पक्की करनी है तो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना सबकुछ झोंक देना होगा। क्योंकि ऐसे मौके रोज-रोज नहीं मिलते।