क्या थे हर्षा के ट्वीट ?
हर्षा भोगले ने अपने ट्वीट में लिखा था "मुझे ये बात बहुत ही परेशान कर रही है कि इंग्लैंड की मीडिया का एक बहुत बड़ा हिस्सा एक ऐसी लड़की पर सवाल उठा रहा है जिसने खेल को नियमों के दायरे में रहकर खेला और कोई भी उस खिलाड़ी पर सवाल नहीं उठा रहा है जो गैर-कानूनी तरीके से फायदा उठाने की कोशिश कर रही थी और ऐसा वो कई बार कर चुकी थी। इसमें बेहद दिग्गज लोग भी शामिल हैं और मुझे लगता है कि इसके पीछे संस्कृति का हाथ है। अंग्रेज ये सोच रहे हैं कि जो हुआ वो गलत था, क्योंकि उन्होंने क्रिकेट जगत के बड़े हिस्से पर राज किया है, इसलिए उन्होंने सभी को ये बताया कि वह गलत था।"
उन्होंने आगे लिखा था "इंग्लैंड का प्रभुत्व इतना ताकतवर था कि उसपर बहुत कम उंगलियां उठीं। नतीजा यह रहा कि आज भी यही समझा जाता है कि इंग्लैंड जिसे गलत समझे, बाकी क्रिकेट जगत को भी उसे गलत ही समझना चाहिये। ठीक वैसे ही, जैसे ऑस्ट्रेलियाई स्लेजिंग को दैरान हद ना पार करने का उपदेश देते हैं। वो हद, जो उन्होंने अपनी संस्कृति के अनुसार खुद ही खींची है और जो दूसरों के अनुसार ठीक नहीं हो सकती है। बाकी दुनिया इंग्लैंड की सोच के अनुसार चलने के लिये बाध्य नहीं है और इसीलिए जो गलत है वो हमें साफ नजर आ रहा है। ये भी सोचना गलत है कि स्पिन गेंदबाजों की मददगार पिचें खराब हैं और तेज गेंदबाजों को मदद करने वाली पिचें एकदम सही हैं।"
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हर्षा ने लिखा था "यह संस्कृति का मुद्दा है, ऐसा मैं इसलिये कह रहा हूं क्योंकि ये ऐसी ही सोच के साथ बड़े होते हैं। इन्हें नहीं समझ में आता कि ये गलत हैं। ऐसे में समस्या खड़ी होती है और इसमें हम भी दोषी हैं। लोग एक-दूसरे के नजरिये को जज करते हैं। इंग्लैंड चाहता है कि बाकी के देश भी मांकडिंग के खिलाफ रहें और वह दीप्ति और ऐसा करने वाले बाकी खिलाड़ियों के प्रति बेहद आलोचनात्मक रहे हैं। ऐसे में हम भी ये पुरजोर कोशिश कर रहे हैं कि बाकी लोग भी सदियों पुरानी इस गहरी नींद से जागें।"
हर्षा ने अंत में लिखा "नियम ये कहता है कि जब तक गेंदबाज के हाथ से गेंद न छूटे तह तक नॉन स्ट्राइक पर खड़े बल्लेबाज को क्रीज के अंदर रहना चाहिए। यदि आप इसका पालन करेंगे तो खेल आराम से चलता रहेगा। यदि आप दूसरों पर उंगलियां ही उठाते रहेंगे, जैसा कि इंग्लैंड में कई लोगों ने दीप्ति पर उठाई है, आप अपने लिये सवालों को आमंत्रण देते रहेंगे। ये जरूरी है कि ताकतवर लोग, या वो जो कभी ताकतवर थे, ऐसा सोचना छोड़ दें कि दुनिया उनके ही हिसाब से चलेगी। जैसा कि समाज में होता है, एक न्यायाधीश ये सुनिश्चित करता है कि विधि का पालन हो, ऐसा ही क्रिकेट में भी होता है। लेकिन जिस तरह से दीप्ति के प्रति कटुतापूर्ण बातें कही गई, मुझे इससे बेहद परेशानी हुई। वह नियमों में रहकर खेल रही थीं और उनके किये की आलोचना पर तुरंत पूर्ण विराम लगना चाहिए।
हर्षा भोगले ने इंग्लैंड के खिलाफ भारत की जीत के बाद यह ट्वीट किए थे। इस मैच में दिप्ति शर्मा ने इंग्लैंड की चारलोट डीन को मांकडिंग के जरिए रन आउट कर भारत को 16 रन से जीत दिलाई थी। इस जीत के साथ ही टीम इंडिया ने तीन मैचों की वनडे सीरीज में इंग्लैंड का सूपड़ा साफ कर दिया था। अगर चारलोट मांकडिंग के जरिए आउट नहीं होतीं तो इंग्लैंड मैच जीत सकता था और सीरीज का नतीजा 2-1 हो सकता था। डीन ने इस मैच में 47 रन की शानदार पारी खेली थी और अपनी टीम को जीत के बेहद करीब ले गई थीं।