ऐसा लगता है कि टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। विदेशी धरती पर एक के बाद एक टेस्ट मैचों में मिली हार के बाद आलोचक उन्हें उनके पद से तत्काल हटाने की मांग कर रहे हैं।
दूसरी ओर, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने अब तक अपने चहेते कप्तान धोनी पर कोई कार्रवाई नहीं की है। बोर्ड हर बार कुछ न कुछ का बहाना देकर धोनी को बचाता रहा है।
लेकिन बीसीसीआई अब धोनी के एक बयान से बेहद नाराज हो गया है। बोर्ड का कहना है कि उन्होंने अपनी मर्यादा तोड़ी है। ऐसे में देखना होगा कि किस्मत के धनी कहे जाने वाले धोनी इस नई मुसीबत से किस तरह छुटकारा पाते हैं?
बीसीसीआई हुआ धोनी से नाराज
टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के मुख्य कोच डंकन फ्लेचर को बॉस कहने पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अधिकारी बेहद नाराज हो गए हैं।
धोनी ने वनडे सीरीज की पूर्वसंध्या पर रविवार को कहा था कि डंकन फ्लेचर ही टीम इंडिया के बॉस हैं और वह 2015 वर्ल्ड कप तक टीम के कोच बने रहेंगे।
बीसीसीआई ने धोनी के इस बयान को काफी गंभीरता से लिया है और वह कप्तान के इस बयान पर आगामी वर्किंग कमेटी (डब्ल्यूसी) की बैठक में चर्चा करेगा। इंग्लैंड के खिलाफ 5 वनडे मैचों की सीरीज से पहले ब्रिस्टल में दिए गए धोनी के इस बयान से बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारी बेहद नाराज हैं।
'भारतीय कप्तान ने लांघी अपनी सीमा'
बीसीसीआई का कहना है कि कप्तान धोनी ने अपनी सीमा लांघी है और उन्हें कोच का कार्यकाल तय करने का कोई हक नहीं है। धोनी के इस बयान से यह अटकलें भी तेज हो गई हैं कि क्या बोर्ड ने इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में शर्मनाक प्रदर्शन के बाद भारतीय कप्तान से बिना विचार-विमर्श किए रवि शास्त्री को टीम के डायरेक्टर के तौर पर नियुक्त किया है।
बोर्ड के एक बेहद सीनियर अधिकारी जो कई दौरों पर भारतीय टीम के मैनेजर भी रह चुके हैं, उन्होंने साफ कहा कि इस मामले को बोर्ड की अगली वर्किंग कमेटी की बैठक में उठाया जाएगा।
इस अधिकारी के मुताबिक, "जो हुआ वह काफी निराशाजनक और भारतीय कप्तान के लिए अशोभनीय है। इस मामले पर बोर्ड की आगामी वर्किंग कमेटी की बैठक में चर्चा की जाएगी। धोनी यह टिप्पणी नहीं करनी चाहिए कि टीम का बॉस कौन है। यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। स्पष्ट रूप से धोनी ने भारतीय कप्तान के तौर पर अपनी सीमा लांघी है।"
उन्होंने आगे कहा, "मीडिया उनसे कोई भी सवाल पूछ सकता है लेकिन एक परिपक्व क्रिकेटर के तौर पर उन्हें यह जानना चाहिए कि उनकी सीमा कहा है। जिस तरह से बीसीसीआई अधिकारी यह फैसला नहीं करते कि अंतिम एकादश में कौन खेल रहा है, उसी तरह से धोनी यह फैसला नहीं करते कि कौन कितने समय तक रहने जा रहा है। धोनी को सहयोगी स्टाफ की भर्ती या उनके कार्यकाल पर टिप्पणी की ड्यूटी का काम नहीं सौंपा गया है।"