स्पॉट फिक्सिंग के झटके से थर्राई बीसीसीआई ने सट्टेबाजी पर लगाम कसने में भले लाचारी जता दी हो। लेकिन उसने अपने क्रिकेटरों को कानूनी शिकंजे के दायरे में लेने की तैयारी जरूर कर ली है।
बीसीसीआई ने फैसला लिया है कि अब क्रिकेटरों के साथ नए सिरे से करार किया जाएगा। जिसमें साफतौर पर लिखा होगा अगर क्रिकेटर फिक्सिंग में या अन्य किसी आपराधिक गतिविधि में संलिप्त पाया जाता है तो बोर्ड उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा।
आईपीएल कमिश्नर राजीव शुक्ला ने अमर उजाला से खुलासा किया है कि यह करार होने पर अब बोर्ड दागी क्रिकेटरों पर आपराधिक कार्रवाई कर सकेगी।
यह करार सिर्फ टेस्ट या वनडे क्रिकेटरों के साथ ही नहीं बल्कि रणजी ट्राफी या अन्य घरेलू टूर्नामेंट खेलने वाले सीनियर व जूनियर खिलाड़ियों के साथ भी किया जाएगा।
हालांकि वर्ष 2000 में मैच फिक्सिंग स्कैंडल उजागर होने के बाद बोर्ड ने खिलाड़ियों के साथ करार करना शुरू कर दिया था। लेकिन इसमें उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की बात कहीं नहीं थी। जिसके चलते बोर्ड खिलाड़ियों पर पुलिस केस दर्ज नहीं करा सकती थी। सिर्फ पकड़े गए खिलाड़ियों के खिलाफ पुलिस खुद से केस जरूर दर्ज कर सकती थी।
शुक्ला का कहना है कि इस तरह का करार बेहद जरूरी हो गया है। चाहें सीनियर हो या जूनियर क्रिकेटर किसी को इस करार से छूट नहीं दी जा सकती है। यही नहीं क्रिकेटरों पर नजर रखने के लिए बोर्ड की एंटी करप्शन व सिक्योरिटी यूनिट (एसीएसयू) के सदस्यों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
कोशिश रहेगी कि क्रिकेटर टूर्नामेंट के दौरान जहां भी जा रहे हैं एसीएसयू के सदस्य उन पर पूरी तरह नजर रखें। हालांकि लेट नाइट पार्टीज को प्रतिबंधित कर दिया गया है। बावजूद इसके टीम मालिकों की ओर से इस तरह की पार्टियां कराई जा रही हैं। अब एसीएसयू के सदस्य इस बारे में बोर्ड को रिपोर्ट करेंगे।