अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में फ्री हिट का इतिहास बहुत पुराना नहीं है लेकिन जब 2007 में पहली बार इस खेल में लाया गया था तो इसे बल्लेबाजों के लिए मैच के दौरान एक वरदान जैसा माना गया। क्योंकि फ्री हिट एक ऐसा ऑप्शन था बल्लेबाजों के लिए, जिसमें वह बोल्ड, कैच या स्टंप आउट होने की चिंता किए बगैर बड़ा शॉट खेल सकता था।
आईपीएल जिसमें बल्लेबाज धूम-धड़ाके के अंदाज में बल्लेबाजी करता है और उसे अचानक एक फ्री हिट मिल जाए तो यह क्रीज पर खड़े किसी बल्लेबाज की बड़ी मुराद पूरी होने जैसा है। लेकिन इंडियन प्रमियर लीग के नौंवें संस्करण में बहुत कुछ उलटा देखने को मिल रहा है। गेंदबाज फ्री हिट पर बल्लेबाजों के बड़े शॉट खेलने से रोक पाने में कामयाब होने लगे हैं और इस समय आईपीएल में जैसा दिख रहा है उससे तो यही लगता है।
आज का क्रिकेट (वनडे और टी-20) एक तरह से बल्लेबाजों को ढेरों सहुलियत देने वाला हो गया है। पहले गेंदबाज के क्रीज से आगे या पीछे जाकर गेंदबाजी करने पर अंपायर नोबॉल दिया करते थे, लेकिन करीब 2 साल पहले बदले नियम के बाद हर तरह से करार दिए गए नोबॉल पर बल्लेबाज को फ्री हिट मिलने लगा है।
फ्री हिट पर बल्लेबाज रन आउट होने के अलावा अन्य किसी भी तरीके से आउट नहीं होगा, ऐसे में इस गेंद को बल्लेबाज मनमर्जी के मुताबिक खेल सकता है। और माना जाता है कि गेंदबाज भी यही सोचता है कि इस गेंद पर चौका या छक्का लगना तय है क्योंकि इस परिस्थिति में क्षेत्ररक्षण में भी कुछ भी बदलाव करने की इजाजत नहीं होती। लेकिन गेंदबाजों ने आईसीसी के अपने खिलाफ बनाए इस नियम पर काफी काम किया और अब फ्री हिट पर बड़ा शॉट खेलने का कोई मौका नहीं देते। फ्री हिट की शुरुआत में बल्लेबाजों का खूब दबदबा दिखा और वो बड़ा शॉट खेलने में सफल भी रहते थे।