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वर्ल्ड कप में बाहर होने के साथ इस 'गम' का भी रहेगा दर्द

Fri, 27 Mar 2015 11:31 AM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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गुरुवार को 7 लगातार जीत से हौसले से लबरेज टीम इंडिया ऑस्ट्रेलियाई टीम के खिलाफ उसी की धरती में उसे हराने में नाकाम रही। महेंद्र सिंह धोनी की इस यंग ब्रिगेड को वर्ल्ड कप की इस इकलौती हार का खामियाजा यह भुगतना पड़ा कि वह आज टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी है।
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सिडनी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मिली 95 रनों की करारी हार से ज्यादा टीम इंडिया को एक और बात का गम सबसे जयादा रहेगा। धोनी ब्रिगेड वर्ल्ड कप से पहले ऑस्ट्रेलियाई धरती में मेजबान टीम के खिलाफ एक जीत हासिल नहीं कर पाई थी। इस वक्त जीत से उत्साही टीम इंडिया के पास सेमीफाइनल में दो सीरीज की पुरानी हार का बदला लेने का सुनहरा मौका था, जिसे भारत ने ओवरकांफिडेंस के चलते गंवा दिया।

अन्य बाकी टीमों के अलावा टीम इंडिया ही वर्ल्ड कप से करीब तीन माह पहले ही ऑस्ट्रेलिया पहुंच चुकी थी। टीम के पास ऑस्ट्रेलिया की पिच को समझने का सुनहरा मौका था। वर्ल्ड कप से पहले दो सीरीज में टीम को विदेशी पिच में अपने आंकलन का मौका मिला। दिसम्बर 2014 में बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी सीरीज में यही मेजबान ऑस्ट्रेलिया भारत के खिलाफ थी। यहां भारत एक भी जीत हासिल करने में नाकाम रहा।
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दूसरी बार त्रिकोणीय सीरीज में भारत के पास वनडे मैचों में एक बार फिर मौका आया लेकिन यहां भी भारतीय टीम नौसिखए की तरह खेली और ट्राई सीरीज के फाइनल में भी प्रवेश नहीं कर पाई। यहां भी टीम इंडिया को एक जीत भी नसीब नहीं हुई।

लेकिन यकायक वर्ल्ड कप में टीम इंडिया की बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों बदल गई और बैकफुट में चल रही टीम इंडिया फ्रंट में आ गई। इस बार फिर सेमीफाइनल में मेजबान को धूल चटाने का मौका था। मौका था दिसंबर से कई मैचों की हार के दंश को सिर्फ एक जीत के साथ मिटाने का। लेकिन ऑस्ट्रेलिया के तिलिस्म के आगे भारतीय शेर ढेर हो गए।

वर्ल्ड कप से बाहर होने के बाद भले ही टीम इंडिया के कैप्टन ने पत्रकारवार्ता में 'कूल' बनने की लाख कोशिश की हो लेकिन इस इकलौती हार का गम टीम इंडिया को अगले पांच साल तक रहेगा।
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