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Mohammed Shami: विश्व कप में कमाल करने वाले शमी को मिलेगा अर्जुन अवॉर्ड, जानें कैसे स्टार बना अमरोहा का लड़का

Wed, 20 Dec 2023 06:02 PM IST
शक्तिराज सिंह स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

वनडे विश्व कप 2023 में मोहम्मद शमी ने शानदार गेंदबाजी की थी और टीम इंडिया को फाइनल तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया था। इसी वजह से शमी को इस पुरस्कार के लिए चुना गया है। 
 
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मोहम्मद शमी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारतीय तेजज गेंदबाज मोहम्मद शमी को साल 2023 में शानदार प्रदर्शन के लिए अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। नौ जनवरी के दिन उन्हें यह अवॉर्ड मिलेगा। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें यह पुरस्कार देंगी। मोहम्मद शमी ने इस साल वनडे विश्व कप में शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने सबसे ज्यादा 24 विकेट लिए थे और टीम इंडिया को फाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। उनके इसी प्रदर्शन के चलते उन्हें अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुना गया है। यहां हम बता रहे हैं कि शमी के स्टार क्रिकेटर बनने का सफर कैसा रहा? विश्व कप के बाद शमी ने खुद एक इंटरव्यू में इसका खुलासा किया था।
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शमी ने बताया था कि वह अमरोहा गांव से हैं उनके पिता और बड़े भाई क्रिकेट खेलते थे। दोनों तेज गेंदबाज थे। इसी वजह से शमी ने भी क्रिकेट खेलना शुरू किया और तेज गेंदबाज ही बने। उन्हें पता ही नहीं चला कि कब वह क्रिकेट में पूरी तरह डूब गए। शमी ने ड्यूक स्कूल के लिए लेदर गेंद से बल्लेबाज के रूप में खेलना शुरू किया था। टेनिस गेंद से होने वाले क्रिकेट में वह विकेटकीपिंग भी कर चुके हैं। हालांकि, तेज गेंदबाजी हमेशा से ही उनकी पहली प्राथमिकता रही है। उन्होंने बड़े भाई को देखकर क्रिकेट खेलना शुरू किया था। उनके बड़े भाई अच्छे खिलाड़ी थे, लेकिन पथरी की वजह से उन्हें क्रिकेट छोड़ना पड़ा। ऐसे में उन्होंने शमी को आगे बढ़ाया। स्कूल के लिए एक मैच में उनके भाई ने शमी से पारी की शुरुआत कराई और शमी ने 34-35 गेंद में शतक जड़ दिया, जबकि इससे पहले उन्हें लेदर गेंद से खेलने का अनुभव नहीं था। शमी ने इस मैच में 108 रन बनाए थे।

इसके बाद वह बड़े भाई की मदद से क्रिकेट खेलते रहे और उनके अंदर क्रिकेटर बनने का शौक जग गया। तब उन्होंने देखा कि स्टेडियम घर से 30 किलोमीटर दूर है। उनके पिता ने गाड़ी देने से मना कर दिया। ऐसे में बस से रोज 60 किलोमीटर का सफर करना मुश्किल काम था। स्टेडियम जाकर उन्होंने पहली बार तकनीकि चीजें सीखीं और आर्मी की तैयारी करने वाले लड़कों के साथ ट्रेनिंग करने लगे। इस समय उनके पास जिम जाने के पैसे भी नहीं थे, वह रणजी ट्रॉफी खेलने के दौरान पहली बार जिम गए थे।
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बड़े भाई की बेज्जती के बाद छोड़ा यूपी
शमी ने इस बातचीत में बताया कि जब पहले साल यूपी की रणजी टीम में उनका चयन नहीं हुआ तो वह ज्यादा निराश नहीं थे। दूसरे साल भी उन्होंने कोशिश की। 1600 लड़के ट्रायल के लिए आए थे और तीन दिन में चयन करना था। ऐसे में शमी के बड़े भाई मुख्य चयनकर्ता के पास गए और शमी को मौका देने की बात कही। चयनकर्ता ने कहा कि अगर तुम मेरी कुर्सी हिला सकते हो तो तुम्हारे भाई का चयन हो जाएगा। शमी के बड़े भाई ने कहा कि मैं कुर्सी को उल्टा भी कर सकता हूं, लेकिन मुझे वो नहीं चाहिए, अगर दम है तो लेना। चयनकर्ता ने जवाब दिया कि दम वालों का यहां कोई काम नहीं। शमी के भाई ने फॉर्म फाड़ दिया और कहा कि अब हम यूपी के लिए कोशिश नहीं करेंगे।

यूपी छोड़ने का मन बनाने के बाद शमी ने कोच से बात की और उनके कोच ने त्रिपुरा में उनके खेलने का जुगाड़ बनाया। हालांकि, शमी त्रिपुरा के लिए भी नहीं खेल सके। तीन साल बर्बाद करने के बाद कोलकाता में उनके कोच ने एक क्लब में ट्रायल का जुगाड़ बनाया। जब वह ट्रायल देने के लिए गए तो पिच सीमेंट की थी और शमी का लंबा रन अप पूरा करने के लिए जगह ही नहीं थी। उन्होंने कोच से कहा कि जगह कम है तो कोच ने कहा कि इसी में ट्रायल देना पड़ेगा। उन्होंने 10 गेंद कीं और 3-4 बार बल्लेबाज को आउट कर दिया। इसके बाद खाने के लिए गए तो ब्रेड और चने (घुघनी) मिले। शमी चावल और सब्जी का इंतजार कर रहे थे, लेकिन उन्हें यही खाना पड़ा।

शमी 2500 रुपये और पिता का एटीएम कार्ड लेकर कोलकाता गए थे, लेकिन उन्हें कार्ड का उपयोग करना भी नहीं आता था। साथी खिलाड़ियों से पूछने पर उन्हें 700 रुपये का रूम मिला, लेकिन दो दिन तक कोच ने उनके चयन को लेकर जवाब नहीं दिया। तीसरे दिन शमी ने कोच से कहा कि मेरे पास अब एक हजार रुपये ही बचे हैं। ऐसे में क्लब का कप्तान उनसे मिलने आया और कहा कि 99 फीसदी तुम्हारा चयन तय है, लेकिन क्लब के मालिक देखेंगे। इसके बाद ही तुम चुने जाओगे। 

तीसरे दिन शमी से कहा गया कि तुम हमारे लिए खेल सकते हो, लेकिन तुम्हें पैसे नहीं दिए जाएंगे। शमी इसके लिए तैयार हो गई, क्योंकि क्लब उनके रहने और खाने का इंतजाम कर रहा था। उनके माता-पिता इसके लिए तैयार नहीं थे, लेकिन शमी को खेलना था और मान गए। चार दिन तक उन्हें रहने को घर नहीं मिला और वह पार्टी करने वाली जगह में ही सोए। इसके बाद उन्हें रहने को घर मिल गया। जब खेलने को मिला तो उन्होंने नौ मुकाबलों में 45 विकेट झटके। इसके बाद मैनेजर ने उन्हें 25,000 रुपये दिए और घर जाने के लिए टिकट भी दिया। ये पैसे शमी ने मम्मी को दिए। पापा ने फिर ये पैसे उन्हें लौटा दिए। 16 साल के शमी बैट, गेंद और जूते लेकर आए। इसके बाद उनकी जिंदगी पटरी पर लौट आई। प्रदर्शन बेहतर होता गया और पैसे भी बढ़ते चले गए। 

भारतीय टीम में चयन को लेकर शमी ने बताया कि वह क्लब का मैच खेल रहे थे और तभी मीडिया वाले वहां जुटने लगे। तब शमी ने पूछा कि इतनी भीड़ क्यों है। उनके दोस्त ने बताया कि भारतीय टीम में उनका चयन हो चुका है। अपने पहले वनडे मैच में ही शमी ने चार मेडन ओवर किए। इसके बाद रणजी ट्रॉफी में भी उन्होंने कमाल किया। अपने पहले टेस्ट में नौ विकेट लिए और अब वह दुनिया के सबसे बेहतरीन गेंदबाजों में शुमार हो चुके हैं।
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