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प्री-मैच्योर बेबी से लेकर एशियन गेम्स चैंपियन बनने तक, अमित पंघाल की ऐसी है पर्सनल लाइफ

Sun, 02 Sep 2018 05:22 PM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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अमित पंघाल
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जब अमित पंघाल का जन्म हुआ तब उनका वजन सिर्फ 1.5 किग्रा था, जो नवजात शिशु का कम वजन माना जाता है। अमित की मां उषा रानी ने कई रात बिना नींद लिए अपने नवजात बेटे को तंदुरुस्त बनाने में गुजारी। वह प्री-मैच्योर बेबी रहे और उनकी मां कॉटन की रजाई में उन्हें समेटे रहती थीं। पंघाल की मां ने कहा, 'जब वह युवा था तो हमे लगता था कि कमजोर है, लेकिन उसका आकार छोटा था जबकि दिल एकदम शेर जैसा था। वह कड़ा लकड़ा था, जिसमें काफी इच्छाशक्ति थी।'

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अमित ने लाइट फ्लाइवेट वर्ग (49) में ओलंपिक चैंपियन हसनबॉय दुस्मतोव को हराकर 18वें एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीता था। यह एशियाड में 49 किग्रा वर्ग में देश का पहला गोल्ड मेडल भी रहा। रानी ने आगे कहा, 'अमित ने ओलंपिक चैंपियन को एशियाई खेल में मात देकर गोल्ड मेडल जीता। हमारे लिए यह ओलंपिक मेडल जैसा ही है।'

अमित ने अपने बड़े भाई अजय को अनिल धनकर द्वारा संचालित एकेडमी में अभ्यास करते देखा और यही से उन्होंने बॉक्सर बनने का फैसला किया। एक दशक पहले जब 12 साल की उम्र में अमित ने मुक्केबाजी शुरू की तब उनका वजन 24 किग्रा था। परिवार उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित था।

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अमित फांगल
अमित के पिता विजेंदर ने कहा, 'जब उसने शुरुआत में बॉक्सिंग में रूचि दिखाई तब हम चिंतित थे। वह किसी खेल के हिसाब से काफी कमजोर नजर आता था। हालांकि, कोच धनकर ने उसकी दृढ़ता और इच्छाशक्ति की जमकर तारीफ की। हमें समझ आया और उन्हें रिंग में जाने की इजाजत दी। जब रिंग से जुड़ने के दो साल के भीतर अमित ने महाराष्ट्र में सब-जूनियर नेशनल्स में गोल्ड मेडल जीता तो हम सबको काफी गर्व महसूस हुआ। अमित भी जीत से काफी उत्सुक था और वह मेडल लेकर पूरे गांव में घूमा था।'

अमित को ट्रेनिंग कराने के लिए परिवार ने दोस्तों और रिश्तेदारों से उधार भी लिया था। कोच धनकर गुड़गांव के कॉम्बेट बॉक्सिंग क्लब में गए तो उन्होंने अमित को वहां ट्रेनिंग कराने के लिए उनके परिवार को राजी कर लिया। विजेंदर ने याद किया, 'हमारे परिवार की इतनी आय नहीं थी कि खर्चे उठा सकें। अमित के नेशनल जूनियर में गोल्ड मेडल जीतने के बाद मुझे अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से कर्जा लेना पड़ा ताकि उसकी ट्रेनिंग पूरी हो सके। कभी अमित घर आता था तो वह सिर्फ केला और दूध लेता था। वह कहता था कि उसे अपना वजन संभालना है। अमित की मां उसकी डाइट को लेकर चिंतित रहती थी।'

अमित के घर आने का परिवार बेसब्री से इंतजार कर रहा है। मां ने अमित का पसंदीदा चूरमा और खीर बनाने की योजना बनाई है।
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