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नजरिया: स्वच्छ उत्तराखंड का रोड मैप, कचरा प्रबंधन के लिए बदलनी होगी सोच

अनूप नौटियाल
Updated Wed, 26 Apr 2023 07:36 AM IST

सार

कचरा प्रबंधन को सिर्फ नगर निकायों व ग्राम पंचायतों की समस्या मान लिया गया है। इस सोच को बदले बिना लोगों को जागरूक नहीं किया जा सकता।
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कचरा प्रबंधन - फोटो : सोशल मीडिया


यह बात बार-बार सामने आती है कि उत्तराखंड में कई नगरों और कस्बों का कचरा सीधे नदियों के हवाले किया जा रहा है। लेकिन हालात कितने चिंताजनक हो चले हैं, इसका एक बड़ा उदाहरण उत्तराखंड के चमोली के जिलाधिकारी का एक ट्वीट है। पिछले साल कचरे को लेकर किए गए एक ट्वीट ने सनसनी फैला दी थी। अपने ट्वीट में जिलाधिकारी ने स्वीकारा कि गौचर नगर पालिका के वाहन द्वारा गंगा नदी में कूड़ा गिराया जा रहा था। इसके बाद दोषियों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।


चारधाम यात्रा उत्तराखंड की प्रमुख गतिविधियों में से एक है। हर वर्ष लाखों की संख्या में तीर्थयात्री आने के कारण चारधाम और चारधाम यात्रा मार्ग पर भी कचरा प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन गया है। वहां कचरा प्रबंधन की क्या स्थिति है, इसका अंदाजा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा इसी वर्ष आठ फरवरी को दिए गए एक आदेश से लगाया जा सकता है। इस आदेश के आधार पर एनजीटी ने यात्रा मार्ग पर, खासकर केदारनाथ, हेमकुंड साहिब और गंगोत्री व यमुनोत्री पैदल मार्ग पर कचरा प्रबंधन की स्थिति पर बेहद असंतोष जताया है और मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर उसमें तत्काल सुधार करने के लिए कहा है।


इसी के साथ राज्य में कचरा प्रबंधन की स्थिति को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका पर सुनवाई हो रही है। प्रश्न यह है कि कचरे से कैसे निपटा जाए? कचरा प्रबंधन को लेकर केंद्र सरकार के स्तर से छह अलग-अलग कानून हैं। इनमें ठोस कचरा प्रबंधन नियम-2016, प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम-2016, बायोमेडिकल कचरा प्रबंधन नियम-2016, ई-कचरा प्रबंधन नियम-2016, कंस्ट्रक्शन ऐंड डेमोलिशन वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2016 और खतरनाक एवं अन्य अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 शामिल हैं। पर सवाल इन्हें सही तरीके से लागू करने का है।


उत्तराखंड में कचरा प्रबंधन आयोग की स्थापना इस दिशा में लीक से हटकर एक नवाचारी कदम हो सकता है। राज्य में एक ऐसी स्वतंत्र संस्था की आवश्यकता है, जो पूरी तरह से कचरा प्रबंधन के सभी छह कानूनों के जमीनी अनुपालन के लिए जिम्मेदार हो। केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय की ओर से हर वर्ष करवाए जाने वाले स्वच्छ सर्वेक्षण के परिणामों को टूल बॉक्स के रूप में इस्तेमाल कर हम कचरा प्रबंधन की दिशा में कारगर कदम उठा सकते हैं। कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में जिन अन्य बातों पर ध्यान दिया जाना चाहिए, उनमें कचरे का सेग्रीगेशन यानी पृथकीकरण प्रमुख है।


शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो सड़कों पर कूड़ा बीनते हैं। इन लोगों के पास न तो सामाजिक सुरक्षा है, न बीमारियों से बचने के उपाय और न ही किसी तरह का कोई सम्मान। इन लोगों को एकीकृत करके उन्हें आर्थिक सहायता देने, उनके स्वास्थ्य के लिए कदम उठाने की आवश्यकता है। बड़े नगर निकायों को सकुर्लर इकोनॉमी और वेस्ट टू वेल्थ की अवधारणा को समझने की जरूरत है। इसी के साथ हमें छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर जैसे जीरो लैंडफिल सिटी मॉडल की ओर बढ़ने के प्रयास करने होंगे।


कचरा प्रबंधन को सिर्फ नगर निकायों और ग्राम पंचायतों की समस्या मान लिया गया है। ऐसे में जरूरी है कि सबसे पहले विधायकों के साथ ही सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को जागरूक किया जाए, इसके बिना आम लोगों को जागरूक करना संभव नहीं है।
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