वर्ष 2019 में हिंसक विरोध के बाद, मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय का एक वांछित युद्ध अपराधी उमर अल-बशीर की 30 साल पुरानी तानाशाही को एक सैन्य तख्तापलट में उखाड़ फेंका गया था। बशीर अभी खार्तूम जेल में बंद है। उसके कुछ ही दिनों के भीतर तख्तापलट करने वाले नेता ने इस्तीफा दे दिया और अब्देल फत्ताह अल-बुरहान ने 'हेमेदती' के साथ सत्ता साझा की।
दोनों के बीच मतभेद सूडान को एक गृहयुद्ध की ओर ले गया, जिसमें 400 से अधिक लोग मारे गए, हजारों घायल हुए, अस्पताल नष्ट हो गए और पड़ोस युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया। एक करोड़ की आबादी वाले खार्तूम में पलायन देखा जा रहा है। वहां भोजन और पानी की कमी के कारण मानवीय संकट पैदा हो गया है।
मौजूदा गृहयुद्ध का कारण सेना की अधिक निगरानी और नियमित सशस्त्र बलों में आरएसएफ के एकीकरण की मांग है। सेना से यह भी मांग की जा रही है कि वह कृषि और अन्य विभिन्न उद्योगों की अपनी जमीन सौंप दे, जिस पर काम करने के प्रति वह अनिच्छुक है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और मिस्र का सूडान में खासा प्रभाव है और वे दोनों गुटों के बीच संघर्ष विराम वार्ता कराने का प्रयास कर रहे हैं।
पड़ोसी मुल्क चाड, दक्षिण सूडान के साथ मिस्र में भी बड़े पैमाने पर प्रवासन से इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ना तय है। युद्धविराम के आह्वान का सीमित प्रभाव पड़ा है। इसने वैश्विक शक्तियों को सूडान से अपने दूतावास कर्मचारियों को वापस बुलाने के लिए प्रेरित किया। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और स्पेन ने अपने कर्मचारियों को वापस बुलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सूडान में अहम भूमिका निभाने वाले तुर्किये ने सड़क मार्ग से अपने कर्मचारियों को बाहर निकाला। संयुक्त राष्ट्र के वाहनों और बसों ने विदेशियों को खार्तूम से लाल सागर पर सूडान बंदरगाह की ओर पहुंचाया।
कुछ देशों ने सूडान में फंसे अपने नागरिकों की उपेक्षा करते हुए अपने दूतावास के कर्मियों को बाहर निकाला। फंसे हुए ब्रिटिश और अमेरिकी नागरिकों ने अपनी सरकारों पर उन्हें छोड़ने का आरोप लगाया है। पश्चिमी देश सिर्फ अपने दूतावास कर्मचारियों को वापस बुला रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि उस देश में अपने हिसाब से काम करने वाले अन्य लोग अपने लिए काम करते हैं। कुछ देशों ने अपने नागरिकों को भी वहां से बाहर निकाला है। भारत के लोगों को फ्रांस और सऊदी अरब के रास्ते निकाला गया है, हालांकि उनकी संख्या कम है।
प्रत्येक संघर्ष क्षेत्र में भारतीय धारणा पश्चिम के विपरीत रही है। भारतीय दूतावास के कर्मचारी सबसे अंत में बाहर निकलते हैं, और नागरिकों को प्राथमिकता दी जाती है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है, 'हम सूडान में उभरती जटिल सुरक्षा स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं। हम सूडान में फंसे हुए भारतीयों की सुरक्षित निकासी के लिए विभिन्न साझेदारों से भी घनिष्ठ समन्वय कर रहे हैं।' खार्तूम स्थित भारतीय दूतावास अपने नागरिकों को निकालने के लिए संयुक्त राष्ट्र, सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य देशों के साथ तालमेल कर रहा है। सूडानी हवाई क्षेत्र बंद होने के चलते तेजी से निकासी के लिए विमानों की आवाजाही संभव नहीं है।
दूतावास ने भारतीय निवासियों से घर के अंदर रहने का अनुरोध किया है और कहा है कि जमीनी स्थिति के आधार पर उनकी निकासी का प्रबंध करेगा, जो अप्रत्याशित बनी हुई है। भारत उन कुछ देशों में से है, जिनका दूतावास सूडान में अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है। 24 अप्रैल को भारत सरकार ने सूडान से अपने नागरिकों को निकालने के लिए 'ऑपरेशन कावेरी' शुरू किया।
सूडान में लगभग 3,000 भारतीय नागरिक हैं, जिनमें से एक की गोली लगने से मौत हो गई। पहले कदम के रूप में भारत ने जेद्दाह में भारतीय वायुसेना के दो सी-130 विमान तैनात किए और निकासी में मदद के लिए एक नौसैनिक जहाज सूडान बंदरगाह पहुंचा। खार्तूम से सूडान बंदरगाह की दूरी 850 किलोमीटर है, जहां पहुंचने में 35 घंटे लगते हैं, लेकिन पूरे सूडान में जारी संघर्ष के कारण आवाजाही कठिन है। ऐसा लगता है कि भारत की योजना अपने नागरिकों को पहले सूडान बंदरगाह ले जाने, फिर वहां से उन्हें जहाज द्वारा सऊदी अरब ले जाने और फिर वहां से हवाई मार्ग से भारत लाने की है। जहाज फिर अगले समूह को स्थानांतरित करने के लिए बढ़ेगा।
ताजा जानकारी के अनुसार, 500 भारतीय नागरिक आगे की निकासी के लिए सूडान बंदरगाह पहुंचे हैं। अभी संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रेरित 72 घंटे का युद्धविराम प्रभावी हो गया है। सभी देश अपने कर्मियों की सुरक्षित निकासी के लिए इसका फायदा उठाएंगे, जिनमें भारत भी एक है। संकट क्षेत्रों में फंसे अन्य देशों के नागरिकों की सहायता करने में भारत ने कभी संकोच नहीं किया। इसने हमेशा बांग्लादेश, नेपाल और अन्य मित्र राष्ट्रों के नागरिकों की मदद की है और आगे भी ऐसा करेगा।
यदि हवाई अड्डा खुल जाता है, तो भारत तेजी से नागरिकों की निकासी कर सकता है, अन्यथा इसे सड़क मार्ग से करना होगा, जो धीमा होगा। युद्ध क्षेत्र से नागरिक आबादी के भागने और युद्धरत बलों द्वारा संभावित हमलों के कारण सड़क जाम होगा। हर संघर्ष विराम का फायदा उठाकर भारतीयों को बाहर निकाला जाएगा। याद रखना चाहिए कि गृहयुद्ध के माहौल में अराजतकता के कारण काम करना मुश्किल, जोखिम भरा और समय लेने वाला होता है। हमेशा जनहानि की आशंका बनी रहती है। निकासी की सफलता के लिए समन्वय और सहयोग महत्वपूर्ण होगा।