इंटरनेशनल जर्नल ऑफ जेरिएट्रिक साइकियाट्री में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, मध्यम आयु वर्ग और वृद्ध लोगों में जो संगीत से जुड़े होते हैं, उनकी याददाश्त, कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने, योजना बनाने और आत्म-नियंत्रण रखने की क्षमता उन लोगों की तुलना में बेहतर पाई गई, जिनके पास संगीत का ज्ञान कम या बिल्कुल नहीं था। लेकिन यह जरूरी नहीं है कि संगीत शिक्षा के अंतर्गत केवल वाद्ययंत्र बजाकर ही व्यक्ति का मानसिक विकास हो सकता है। अगर आप गाते हैं, तो उसके भी अपने फायदे हैं। फिर गायन में आपको वाद्ययंत्र सीखने की भी जरूरत नहीं होती।
हालांकि, अगर दोनों में तुलना की जाए, तो अध्ययन के निष्कर्ष के मुताबिक, गायन की तुलना में वाद्ययंत्र बजाने से दिमागी स्वास्थ्य बेहतर होता है। 1993 में नेचर में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया गया कि छात्रों ने मोजार्ट नामक वाद्ययंत्र बजाने के बाद बुद्धि परीक्षणों में उच्च अंक प्राप्त किए, जिससे यह प्रमाणित होता है कि खुद को और अपने बच्चों को संगीत का ज्ञान देना आवश्यक है, क्योंकि संगीत बजाने या सुनने से कई लाभ होते हैं।
अध्ययन के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ-साथ वाद्ययंत्र बजाने या गायन से हमारी मानसिक सेहत को लाभ मिलता है। आपने देखा होगा कि कई खिलाड़ी खाली वक्त में संगीत सुनना पसंद करते हैं। उससे उन्हें शांति मिलती है। लेकिन वाद्ययंत्र बजाना सीखने से शरीर और दिमाग में संतुलन तो बना ही रहता है, संगीत की समझ भी विकसित होती है। यही नहीं, यह आपकी पूरी शख्सियत पर असर डालता है। हालांकि, अभी यह प्रमाणित होना बाकी है कि क्या संगीत से पार्किंसंस जैसी बीमारियों में स्पष्ट फायदां होता है या नहीं। पर, यह तय है कि वाद्ययंत्र बजाना सीखने से आपकी जिंदगी की लय-ताल में भी संतुलन आता है।