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जानिए कैसे दिखता है एक चांद लेकिन असल में है तीन चांद

Wed, 24 Jun 2015 04:50 PM IST
स्वामी तुलसीदास
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अनिरुद्ध नाम का एक व्यक्ति स्वामी श्यामसुंदर के पास गया। स्वामी जी से अनिरुद्ध ने गुरुदीक्षा ली हुई थी और वह उन्हें गुरुदेव कहकर ही संबोधित करता था। वह बोला, गुरुदेव, मुझे जीवन के सत्य का पूर्ण ज्ञान है। मैंने शास्त्रों का काफी ध्यान से अध्ययन किया है। फिर भी मेरा मन किसी काम में नहीं लगता। जब भी कोई काम करने के लिए बैठता हूं, और मन भटकने लगता है, तो मै उस काम को छोड़ देता हूं। इस अस्थिरता का क्या कारण है?
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स्वामी जी ने उसे रात तक इंतजार करने के लिए कहा। रात होने पर गुरु अनिरुद्ध को एक झील के पास ले गए और झील के अंदर चांद का प्रतिबिंब दिखाकर बोले, कुछ देख रहे हो? अनिरुद्ध ने कहा, हां, मैं चांद देख रहा हूं। गुरु ने कहा, और कुछ दिखाई देता है? शिष्य ने कहा, नहीं। फिर स्वामी श्यामसुंदर बोले, एक चांद आकाश में दिखाई दे रहा है और एक झील में दिख रहा है। ठीक ऐसा ही तीसरा चांद तुम्हारे मन के भीतर भी रोशनी दे रहा है।

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गुरु ने कई तरह से उसे समझाया और कहा, तुम्हार मन इस झील की तरह है। तुम्हारे पास ज्ञान तो है, लेकिन तुम उसका इस्तेमाल करने के बजाय सिर्फ उसे अपने मन में लाकर बैठे हो, ठीक उसी तरह, जैसे झील असली चांद का प्रतिबिंब लेकर बैठी है। तुम्हारे मन की झील में जो ज्ञान है, वह अभी छाया की तरह ही है।
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वह तभी सार्थक हो सकता है, जब तुम अपने व्यवहार में एकाग्रता और संयम लाने की कोशिश करो। झील का चांद तो मात्र एक भ्रम है। तुम्हें आकाश के चंद्रमा की तरह बनाना है। झील का चांद पानी में पत्थर गिराने पर हिलने लगता है, उसी तरह तुम्हारा मन भी जरा-जरा सी बात पर डोलने लगता है। मन को संयमित करो।
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