एक नितांत अकेला शख्स वक्त को कैसे भांप सकता है, खासकर जिस दुनिया से वह घिरा रहता है, जब उससे कटा हुआ हो? एकबारगी तो यही लगता है कि इसमें दिक्कत नहीं आनी चाहिए, क्योंकि जैविक लय, जिसे कि जीवन का केंद्र भी माना जाता है, शरीर के रोम- रोम को संकेत देती रहती है। यह न केवल हमारे जागने- सोने के चक्र को, बल्कि, शरीर के ताप, हार्मोन, हृदय की धड़कनों इत्यादि सभी पर काबू रखती है। और, यह जो लय होती है, वह कई तरह से असर दिखाती है। मिसाल के लिए, अस्थमा रात में ज्यादा गंभीर होता है, जबकि हृदय से जुड़ी दिक्कतें अल-सुबह ज्यादा सामने आती हैं। शिफ्ट में जो लोग काम करते हैं, वे भी अपने परिवेश से अलग हो जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक उनमें कैंसर का खतरा ज्यादा होता है। यह जैविक लय हमारे संपर्क में आने वाली दूसरी प्रजातियों से भी प्रभावित होती है।
जीन बनाते हैं जैविक घड़ी
पृथ्वी, चंद्रमा व सूर्य के घूमने से एक पर्यावरणीय चक्र पैदा होता है, जो जैविक घड़ियों की चाल को प्रभावित करता है। यह जैविक घड़ी हर मनुष्य समेत सभी प्राणियों के भीतर होती है। और, जब पर्यावरण से कोई संकेत न मिल रहा हो, तब यह जैविक घड़ी अपनी तरह से काम करती है। रात और दिन के बदलावों से शरीर में सर्केडियन रिदम का एक चक्र चलता है, जो हमारे शरीर में होने वाले मानसिक, व्यवहारिक और शारीरिक परिवर्तनों को प्रभावित करता है। प्रकाश और अंधेरे की प्रतिक्रिया के रूप में यह रिदम चौबीस घंटे का चक्र चलाती है।
जैसे सामान्य घड़ियां सेल से चलती हैं, यह सर्केडियन घड़ी शरीर के भीतर जीनों के बीच जो संवाद चलता है, उससे चलती हैं। जीनों के बीच संवाद शरीर की कोशिकाओं में दोलन पैदा करता है, और इस दोलन से सर्केडियन घड़ी को ऊर्जा मिलती है। सर्कैडियन क्लॉक अपने संकेतों को उस अंधेरे और प्रकाश से समझती है, जिसके संपर्क में हम आते हैं। हमारे शरीर की सर्कैडियन घड़ी हार्मोन के स्तर और शरीर के तापमान को नियंत्रित करके हमारे शरीर की अन्य घड़ियों के साथ सहयोग करती है।
ऐसी कोई एकल सर्वव्यापी सर्केडियन घड़ी नहीं है, जो पूरे जीवन का व्यवस्थित करती हो, क्योंकि घड़ी के जीन विभिन्न प्रजातियों में अलग-अलग होते हैं। लेकिन बुनियादी सिद्धांत समान ही रहता है कि जीन दोलन के जरिये खुद को अभिव्यक्त करते हैं। इस संबंध में अब किए गए सभी जैविक अध्ययनों में यह बात सच साबित हुई है। मनुष्य, पशु, पक्षी, पौधे, कवक और यहां तक कि प्रकाश संश्लेषण से ऊर्जा प्राप्त करने वाले सायनो जीवाणु में भी यही चक्र मिलता है। जीवों और उनके पर्यावरण के साथ संबंधों का अध्ययन मुख्यत: प्रकाश, भोजन और तापमान को आधार बनाकर किया जाता है।
सर्केडियन घड़ी को जेट लैग के उदाहरण से समझा जा सकता है। लंबी हवाई यात्रा के बाद हम पर रहने वाले उसके असर को जेट लैग कहते हैं। यह किसी व्यक्ति की आंतरिक लय के उस समय-क्षेत्र से विचलन को दर्शाता है, जिसमें वह इस वक्त है। अमूमन पर्यावरणीय संकेतों को समझने का सबसे कारगर जरिया प्रकाश को माना जाता है। दिन का प्रकाश जैविक घड़ी पर कोई असर नहीं डालता। लेकिन सूर्योदय के ठीक पहले का अंधेरा इसे आगे बढ़ाता है।
होमो सेपियंस की आंतरिक सर्केडियन घड़ी 24.2 घंटों में एक चक्कर पूरा करती है। इसीलिए हमें पूर्व के छोटे दिनों की तुलना में पश्चिम के बड़े दिनों के साथ तालमेल बैठाना आसान लगता है। कई एथलीट और शोधकर्ता खुद को सबसे अलग-थलग करते हुए कुछ दिनों के लिए जमीन के नीचे गहराई में रखते हैं। इससे वह, सतह पर चल रहे समय चक्र से खुद को अलग कर लेते हैं। यही वजह है कि, जमीन के नीचे उन्हें सतह की तुलना में कम दिन अनुभव होते हैं।
दूसरे समय, दूसरी घड़ियां
सर्केडियन घड़ी प्रकृति में मौजूद एकमात्र घड़ी नहीं होती। कई जैविक प्रक्रियाएं मौसमी होती हैं। मिसाल के लिए, कई पक्षियों व कीड़ों का अप्रवासन, कई पशुओं की शीत निद्रा व प्रजनन का तरीका इत्यादि। ये जैविक घड़ियां कई कारकों से निर्धारित होती हैं और चक्रीय क्रम में काम करती हैं। लेकिन, इन घड़ियों की प्रक्रियाएं अभी पूरी तरह समझी नहीं जा सकी हैं। समुद्री प्रजातियों में ये जैविक घड़ियां कैसे काम करती हैं, इस पर भी फिलहाल निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। इसकी वजह यह है कि समुद्र के तापमान का जो पैटर्न होता है, वह काफी जटिल होता है। समुद्री जीव दिन और रात के सौर चक्र के सीधे संपर्क में आते हैं।
ज्वार-भाटे की स्थितियां भी समुद्री पर्यावरण को प्रभावित करती हैं। समुद्री चक्रों से जुड़ी जैविक लय को विभिन्न समुद्री प्रजातियों में देखा जा सकता है। मिसाल के लिए, कई मूंगों में प्रजनन का एक पैटर्न होता है। ये साल में केवल एक बार बहुत कम समय के लिए अंडे देते हैं। कुछ समुद्री जीव रात के सबसे अंधेरे समय में प्रजनन शुरू करने के लिए झुंडों में निकलते हैं। वर्ष 2020 में वैज्ञानिकों ने एक दिलचस्प खुलासा किया कि जैविक लय केवल समुद्र के ऊपरी हिस्सों तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिकों ने समुद्र में 1,700 मीटर की गहराई के चरम वातावरण में पाए जाने वाले जीवों में प्रकृति से तालमेल बैठाने का पैटर्न दिखा है। इन तमाम घड़ियों की खोज अब भी जारी है। जितना हम जानते जाएंगे, शायद यह रहस्य और चुंबकीय होता जाएगा।