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G20: इतनी सुंदर कभी नहीं दिखी दिल्ली, दुनिया देख रही है भारत की विरासत और सांस्कृतिक छटा

सुरेंद्र कुमार
Updated Sat, 09 Sep 2023 07:02 AM IST

सार

दिल्ली इतनी हसीं पहले कभी नहीं दिखी। वित्त व व्यापार से लेकर स्वास्थ्य, कृषि और संस्कृति तक विभिन्न क्षेत्रों को संभालने वाले विभिन्न देशों के 35 से ज्यादा कार्यसमूह और महत्वपूर्ण कैबिनेट मंत्रियों का पिछले दस महीनों से दिल्ली आना-जाना, और इस दौरान उनकी 29 राज्यों में हुई 200 से ज्यादा बैठकों में सभी जरूरी पहलुओं पर चर्चा हुई।
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जी20 सम्मेलन के लिए नई दिल्ली तैयार - फोटो : सोशल मीडिया


दिल्ली इतनी हसीं पहले कभी नहीं दिखी। वित्त व व्यापार से लेकर स्वास्थ्य, कृषि और संस्कृति तक विभिन्न क्षेत्रों को संभालने वाले विभिन्न देशों के 35 से ज्यादा कार्यसमूह और महत्वपूर्ण कैबिनेट मंत्रियों का पिछले दस महीनों से दिल्ली आना-जाना, और इस दौरान उनकी 29 राज्यों में हुई 200 से ज्यादा बैठकों में सभी जरूरी पहलुओं पर चर्चा हुई। पुतिन और शी जिनपिंग की गैर-मौजूदगी और यूक्रेन के मुद्दे पर मतैक्य की शून्य संभावनाओं के बावजूद, इस बैठक में हरित ऊर्जा, हरित विकास, जलवायु परियोजनाओं के लिए वित्त उपलब्ध कराने का मुद्दा, सहस्राब्दी विकास लक्ष्य (एसडीजी), संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षीय बैंकों में सुधार, बढ़ती ऋणग्रस्तता, महिलाओं के नेतृत्व को बढ़ावा देने वाला विकास, क्रिप्टोकरेंसी, साइबर अपराध, फेक न्यूज, आतंकवाद इत्यादि मुद्दों को समाहित करती एक भारी-भरकम रिपोर्ट जारी करने की तैयारियां पूरी हैं। अमेरिका के ऑबजर्वर रिसर्च फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक ध्रुव जयशंकर ने इसे स्वतंत्र भारत का सबसे परिणामोन्मुखी सम्मेलन कहा है। हालांकि, कुछ लोग मार्च, 1983 में हुए गुटनिरपेक्ष देशों के शिखर सम्मेलन को इसी श्रेणी में रखेंगे, लेकिन वह समय और मुद्दे बिल्कुल अलग थे।


दिल्ली में हो रही इस जी-20 बैठक में कई चीजें पहली बार हो रही हैं। किसी भी अन्य शिखर सम्मेलन के विपरीत भारत ने विभिन्न राज्यों की राजधानियों में कई मंत्रिस्तरीय बैठकें आयोजित कराईं। भारत ने सदस्य देशों के भाग लेने वाले प्रतिनिधियों को भारत की आश्चर्यजनक विविधता और मंत्रमुग्ध करने वाली सांस्कृतिक विरासत से परिचय तो खैर कराया ही, साथ ही, स्वतंत्रता के बाद हुई भारत की प्रगति से भी रू-ब-रू कराया। किसी शिखर सम्मेलन में राज्य सरकारों की सहभागिता के दर्शन भी पहली बार ही हुए हैं, खासकर, उन राज्यों की, जहां भाजपा की सरकार नहीं है। जी-20 की भारत की अध्यक्षता के दौरान विभिन्न देशों के तकरीबन एक लाख प्रतिनिधियों ने भारत की आधिकारिक और औपचारिक यात्रा की, जिससे देश के पर्यटन को भी भारी बढ़ावा मिला।


अगर पुतिन और जिनपिंग सम्मेलन में शिरकत कर रहे होते, तो भी अमेरिकी राष्ट्रपति की मौजूदगी में यूक्रेन मुद्दे पर सर्वसम्मति बनने की संभावना नहीं थी। अमेरिका वैसे भी प्रतिबंधों में ढील देने के संकेत देता नहीं दिख रहा है। इसके बावजूद अगर, व्यापार, बहुपक्षीय बैंकों में सुधार, 60 से ज्यादा देशों की ऋणग्रस्तता, हरित ऊर्जा (भारत तय समय सीमा से नौ साल पहले ही अपने ऊर्जा उत्पादन का 40 फीसदी हिस्सा नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त कर रहा है), डिजिटल बुनियादी संरचना (भारत भुगतान के लिए डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल करने वाला सबसे बड़ा देश बनकर उभरा है और कई विकसित देशों ने भी भारतीय यूपीआई में रुचि दिखाई है), खासकर कोविड काल में स्वास्थ्य क्षेत्र में जिस तरह का सहयोग दिखा (भारत ने 60 से ज्यादा देशों को कोविड वैक्सीन और उपचार उपलब्ध कराए), जलवायु परियोजनाओं को वित्त मुहैया कराना, साइबर सुरक्षा और सबसे महत्वपूर्ण, सभी के लिए समावेशी और नवाचारी आर्थिक प्रगति को बढ़ावा देने जैसे विभिन्न क्षेत्रों में तेज सुधार दिख रहे हैं, तो इसका श्रेय भारत की संवाद आधारित कूटनीति और कड़ी मेहनत को मिलना चाहिए। कई विश्लेषकों का मानना है कि कमजोर व विकासशील देशों (ग्लोबल साउथ) के मुद्दों पर अविलंब एवं प्रमुखता से विचार करने पर पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित करना ही जी-20 के अध्यक्ष के तौर पर भारत का स्थायी योगदान है।


भारत ही पहला देश है, जो अफ्रीकी संघ को जी-20 का नया सदस्य बनाने के लिए समर्थन जुटाने के हर मुमकिन प्रयास कर रहा है। विदेश मंत्री जयशंकर ने उचित ही कहा है कि भारत ग्लोबल साउथ को ग्लोबल नॉर्थ की चेतना में प्रविष्ट कराने में सफल रहा है।


उल्लेखनीय है कि भारत ने न केवल बांग्लादेश और मॉरिशस को, बल्कि, मिस्र, नाइजीरिया, ओमान, नीदरलैंड, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात को भी आमंत्रित किया है, जो उसकी रणनीतिक सोच को दर्शाता है। यही नहीं, जितने अंतरराष्ट्रीय संगठनों को बुलावा भेजा गया है, वह तो अभूतपूर्व है। प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, जीडीपी केंद्रित व्यवस्था, अब जन केंद्रित व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जो लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए समय की मांग भी है। उनके अनुसार, हर आवाज महत्वपूर्ण है, बेशक उसकी जीडीपी का आकार कुछ भी हो। प्रधानमंत्री मोदी महसूस करते हैं कि जी-20 की भारत की अध्यक्षता ने कथित तीसरी दुनिया के देशों में आत्मविश्वास की भावना जगाई है।


शी जिनपिंग और पुतिन को छोड़ जी-20 के सभी बड़े नेता शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। इनमें से कई नेताओं से प्रधानमंत्री मोदी की अनेक मुलाकातें हो चुकी हैं और उनके बीच एक ‘अच्छी केमिस्ट्री’ भी दिखती है। उल्लेखनीय है कि दक्षिण अफ्रीका की मेजबानी में हुए ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान जब चंद्रयान-3 के चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने की खबर आई, तब दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति रामफोसा ने इसे पूरे ब्रिक्स की सफलता बताया। इससे पूरी दुनिया में भारत के कद का पता चलता है। इसे समझने के लिए रॉकेट वैज्ञानिक होना जरूरी नहीं कि चीन, भारत को मिल रही इस तवज्जो से खुश नहीं होगा।
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चीन के राष्ट्रपति के सम्मेलन में शामिल न होने के पीछे तमाम अटकलें लगाई जा रही हैं। मुमकिन है कि अमेरिका और भारत के साथ उसके संबंधों को देखते हुए चीन सम्मेलन में शामिल होने का अनिच्छुक हो, हालांकि जेएनयू के प्रोफेसर श्रीकांत कोंडापाली उनके खराब स्वास्थ्य को इसकी वजह होने की संभावना से इन्कार नहीं कर रहे। चीन के प्रधानमंत्री से सम्मेलन में व्यवधान डालने से ज्यादा उम्मीद नहीं की जा सकती। लेकिन मुझे लगता है कि हम चीन के रवैये से पहले से ही वाकिफ हैं, इसलिए परेशान होने की जरूरत नहीं है। यह भारत की उपलब्धियों, क्षमताओं, वैश्विक नेतृत्व की क्षमता और भविष्य में पूरी दुनिया को राह दिखाने की काबिलियत को पहचानने का समय है और सभी भारतीयों को इसका आनंद लेना चाहिए।

 
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