वैसे तो जी, चुनाव लड़ने, नतीजे आने और मुख्यमंत्री बनने-बनाने में सभी राज्यों में एक जैसे दृश्य दिखते हैं। चुनाव अभियानों में वही विरोधी पार्टियों पर आक्षेप, अपने जीतने का सौ फीसदी दावा और जीत जाने पर मुख्यमंत्री पद के लिए जोड़-तोड़ और रूठने-मनाने का सिलसिला। पर हरियाणा के विधानसभा चुनाव की कई बड़ी खासियतें रही हैं जी।
इनमें सबसे बड़ी खासियत यह है कि बहुत-सी बातें पहली बार सामने आई हैं। अब फिल्मों में तो पहली-पहली बार होनेवाले प्यार के किस्से और गीत बहुत सुनने को मिल जाएंगे, पर राजनीति में ऐसे किस्से कम ही सुनने को मिलते हैं। जैसे, हरियाणा में पहली बार भाजपा ने सरकार बनाई है और कई छोटे दलों का दिल तोड़ दिया है, जो सत्ता साझा करने और मंत्री पद पाने की उम्मीद पाले हुए थे।
पहली ही बार हरियाणा में गैरजाट मुख्यमंत्री बना है। नए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर साहब ने पहली बार चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर ली। यह भी पहली बार होगा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री का कोई परिवार नहीं होगा।
अपने खट्टर साहब बेटों-पोतों और भाई-भतीजों से मुक्त हैं। यह भी शायद पहली बार ही हो रहा होगा कि सत्ता पुराने रोहतक और पुराने हिसार जिलों से निकलकर जीटी रोड की तरफ आई है। हालांकि बताते हैं कि रहनेवाले तो खट्टर साहब भी रोहतक के ही हैं। पर चुनाव उन्होंने करनाल से जीता है।
लेकिन बताते हैं कि जब पंडित भगवतदयाल शर्मा राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने थे, तब चुने तो वह भी यमुनानगर से ही गए थे। जबकि थे वह भी पुराने रोहतक जिले के ही।
खैर, सत्ता के जीटी रोड की तरफ आने से क्या सचमुच सरकार की गति बढ़ जाएगी? पता नहीं। यह सत्ता एक बार इसी तरह अहीरवाल की तरफ भी आई थी, जब राव वीरेंद्र सिंह राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। तो जी, हरियाणा में बहुत सी बातें पहली-पहली बार ही हुई हैं। अब देखना यह है कि सरकार भी क्या पहली बार अलग किस्म की होगी या फिर वैसी ही होगी, जैसी अब तक होती आई है।