लंबे समय से भारत के अपने छोटे पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते का वर्णन करते हुए उसके साथ बिग ब्रदर शब्द जोड़ा जाता रहा है, मानो वह हमेशा से उन्हें धमकाने की कोशिश करता है। भारत ने जो कुछ किया है, उसके मद्देनजर इसे फिर से परिभाषित करने का समय आ गया है। यह तत्काल जरूरी है, क्योंकि भारत अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में तेजी से चीन से पिछड़ता जा रहा है।
भारत पिछले कई महीनों से राष्ट्रीय चुनाव में फंसा हुआ था और अब यह अपने पड़ोसी देशों पर ध्यान देने के लिए तैयार है। मोदी अपनी सरकार की 'पड़ोसी पहले' की नीति पर कायम रहते हुए अपने दूसरे कार्यकाल में सबसे पहले मालदीव और फिर श्रीलंका की यात्रा पर गए। इसी तरह वह अन्य पड़ोसी देशों की भी यात्रा करेंगे, क्योंकि उनकी सरकार कूटनीतिक आधार पर चल रही है। पूर्व विदेश सचिव और अब नए विदेश मंत्री एस जयशंकर के आने से इसमें तेजी आई है। वास्तव में यह समय गंवाने का अवसर नहीं है।