पाकिस्तान छद्म युद्ध के जरिये घाटी में निर्दोष लोगों को निशाना बनाकर भारत को लगातार चोट पहुंचा रहा है। इतिहास गवाह है कि दशकों से आईएसआई द्वारा समर्थित आतंकवादियों की घुसपैठ की अमेरिकियों ने अनदेखी की। लेकिन अमेरिका को आतंकी घटनाओं से नुकसान हुआ, तो रातोंरात सब कुछ बदल गया। 9/11 हमले के सरगना ओसामा बिन लादेन को एबटाबाद में मिली पनाह और पाक प्रायोजित आतंकवादियों द्वारा अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या के बाद अमेरिका का रुख पाकिस्तान के प्रति मुखर और कटु हो गया।
वर्तमान में पाकिस्तान दुनिया में आतंकवाद के सबसे बड़े प्रायोजक और उसकी फंडिंग करने वाले देशों में से है, इसलिए फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने इसे 'ग्रे लिस्ट' में बरकरार रखा है। जबकि भारत इसे काली सूची में डालने करने के लिए सबूत दे रहा है। एफएटीएफ ने पाकिस्तान को 'ग्रे लिस्ट' से हटाने से इसलिए इन्कार कर दिया, क्योंकि वह फरवरी में आयोजित समीक्षा बैठक के बाद दी गई शर्तों का पालन करने में विफल रहा। जाहिर है, पाकिस्तान के लिए यह एक बड़ी शर्मिंदगी है और प्रधानमंत्री इमरान खान के लिए एक बड़ा झटका।
एफएटीएफ ने अपनी ताजा समीक्षा बैठक के बाद तीन आपत्तियां दर्ज कराई हैं, जिन्हें ऐक्शन प्लान में पाकिस्तान के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। ये हैं- (अ) यह प्रदर्शित करना कि आतंकवादियों के वित्तपोषण से संबंधित जांच और अभियोजन लक्षित व्यक्तियों और संस्थाओं की ओर से या नामित व्यक्तियों या संस्थाओं के निर्देश पर हो रहे हैं। (ब) सभी नामित आतंकवादियों के खिलाफ लक्षित वित्तीय प्रतिबंधों के व्यावहारिक और प्रभावी कार्यान्वयन को एफएटीएफ को दिखाना और (स) इस बात का सबूत देना कि आतंकवादियों के खिलाफ उठाए गए कदमों का उन पर प्रभावी असर पड़ा है।
एफएटीएफ की आभासी बैठक 25 जून को डॉ मार्कस प्लेयर की अध्यक्षता में हुई। पाकिस्तान की उम्मीदों के विपरीत एफएटीएफ के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान अब भी उसकी बढ़ी हुई निगरानी में है, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस्लामाबाद ने 'महत्वपूर्ण प्रगति' की है, मगर आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने के तंत्र में कुछ 'गंभीर कमियां' बनी हुई हैं। 27 में से तीन शर्तों का पूरी तरह से पालन करना होगा। एफएटीएफ ने साफ कहा है कि पाकिस्तान आतंकवादियों और उनके सहयोगियों को वित्तपोषण करने वाले सभी समूहों और संस्थाओं के खिलाफ अपनी जांच और अभियोजन में सुधार करे और यह दिखाए कि अदालतों द्वारा जो दंड दिए जाते हैं, वे वास्तविक तौर पर प्रभावी हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे ही पाकिस्तान बताएगा कि उसने इन शर्तों का पूरी तरह पालन किया है, एफएटीएफ उसे सत्यापित करेगा और उसके सदस्य मतदान करेंगे। एफएटीएफ एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग और फ्रेमवर्क की पूरी प्रणाली का आकलन करता है। याद रहे कि इस महीने की शुरुआत में, एफएटीएफ के एक क्षेत्रीय सहयोगी ने पाकिस्तान को 'इनहैंस्ड फॉलो-अप' यानी निगरानी सूची में बनाए रखा था और देश से मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण के उपायों का मुकाबला करने के क्रियान्वयन को मजबूत करने के लिए कहा था।
अमेरिका की पाकिस्तान कंट्री रिपोर्ट ऑन टेररिज्म (2019) के अनुसार, पाकिस्तान को अपनी धरती से काम करने वाले आतंकी समूहों को खत्म करने के लिए बहुत कुछ करना होगा। रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान लगातार क्षेत्रीय रूप से केंद्रित कुछ आतंकवादी समूहों को सुरक्षित पनाह दे रहा है। इसने अफगानिस्तान और भारत को निशाना बनाने वाले आतंकी समूहों (अफगान तालिबान, हक्कानी समूह, लश्कर-ए-तैयबा और उससे जुड़े संगठन) को अपनी धरती से आतंकी कार्रवाइयों को अंजाम देने की अनुमति दी।
एफएटीएफ की फरवरी, 2021 की बैठक से पहले पाकिस्तान ने जैश ए-मोहम्मद के शीर्ष नेतृत्व के सदस्य अजहर, मीर और रउफ असगर के खिलाफ मामले दर्ज किए और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी शुरू की, लेकिन मात्र अजहर की पत्नी और उसके कुछ सहयोगी ही उसके निवास स्थान पर मिले। उस समय भारत ने कहा था कि महत्वपूर्ण बैठकों से पहले पाकिस्तान द्वारा ऐसी हास्यास्पद कार्रवाइयां करना अब आम हो गया है।
एफएटीएफ के अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि जैसे ही (मूल) कार्य योजना के इस अंतिम बकाए बिंदुओं का व्यापक रूप से अनुपालन किया जाता है, सदस्य तय करेंगे कि वे इस कार्य योजना का ऑनसाइट मूल्यांकन करेंगे या नहीं। आम तौर पर एक बार जब ऑनसाइट मूल्यांकन पूरा हो जाता है, तो सदस्य देश किसी देश को असूचीबद्ध करने का निर्णय ले सकते हैं। लेकिन पाकिस्तान के मामले में एफएटीएफ को दूसरी कार्य योजना में सभी कार्य मदों के साथ समानांतर कार्य योजना मिली है। इसलिए पाकिस्तान को इस कार्य योजना के सभी बिंदुओं को पूरा करना होगा और फिर इस कार्य योजना पर निर्णय लेने के लिए एक अलग ऑनसाइट मूल्यांकन होगा। ऐसे में, दोनों कार्य योजनाओं के पूरा होने से पहले पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से नहीं निकाला जाएगा। पाकिस्तान के मीडिया का कहना था कि इमरान सरकार पाकिस्तान के 'ग्रे लिस्ट' से हट जाने के बारे में पूरी तरह आश्वस्त है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि जमीनी स्तर पर आतंकवाद के वित्तपोषण और उसकी धरती से आतंकी समूहों को प्रायोजित करने के जमीनी हकीकत में काफी अंतर था।
पाकिस्तान को आतंकवाद को बढ़ावा देने और प्रायोजित करने के दाग को धोने की जरूरत है। ग्रे लिस्ट में होने के कारण उसकी आर्थिक स्थिति और बदतर होने वाली है, क्योंकि ऐसे में, आईएमएफ और एशियाई विकास बैंक आदि से वित्तीय सहायता प्राप्त करना मुश्किल होगा। मौजूदा स्थिति पाकिस्तान को विदेशी बाजारों से धन या ऋण जुटाने में भी उसे रोक देगी, जबकि इन देशों से उसका विदेशी निवेश भी बुरी तरह प्रभावित होगा। सबसे बड़ी बात यह कि पाकिस्तान की धरती से आतंकी समूहों के फलने-फूलने की सच्चाई से वैश्विक समुदाय में उसके प्रति घृणा की भावना पैदा होती है।