फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पढ़ाई-लिखाई जरूरी है-चोरी में भी

Thu, 26 Jun 2014 07:29 PM IST
प्रकाश पुरोहित
विज्ञापन
विज्ञापन
लगता है, चोरों को चोरी करने के अलावा कुछ नहीं आता, वरना क्या वजह है कि मेरी पट्टी में दस मकान हैं और सभी के यहां चोरी कर गए, पर मेरा घर छोड़ गए। मुझे तो डर है कि शायद झांका भी नहीं होगा, वरना कुछ न कुछ तो चोरी लायक मिल ही जाता। चोरों से भी बुरी हालत मेरी हो गई है कि नजरें नीची किए हर एक घर से गए सामान की गिनती सुन रहा हूं। अगर वह चोर कहीं मिल जाए, तो मैं रिश्वत देकर अपने घर में चोरी करवा लूं। लोगों में चोरी गए सामान का बखान करने की होड़ लगी है और मैं चुप यों सुन रहा हूं, जैसे इन सबका जिम्मेदार मैं ही हूं।
विज्ञापन


मेरा तो मानना है कि चोरों को दस तक गिनती नहीं आती होगी। नौ मकानों में चोरी करके ही उन्होंने दस काउंट कर लिए होंगे, फिर सरकारी कॉलोनी में मकान भी तो सभी एक जैसे होते हैं। कई बार तो मैं ही दूसरे के घर में पहुंच कर चौंक जाया करता हूं कि यह गुप्ता जी मेरे घर में क्या कर रहे हैं। वह तो जब मेरी पत्नी के बजाय गुप्ता जी की पत्नी नजर आती है, तब मुझे गलती का एहसास होता है। ऐसे में बेचारे चोर भी गच्चा खा गए हों, तो क्या आश्चर्य।

पर उनके पढ़े-लिखे न होने की वजह से मेरा तो सिर नीचा हो गया न! बाकी नौ के नौ यों मुझे घेरे खड़े हैं, जैसे उनके घर में अब कुछ नहीं बचा है और मेरे सामान से ही उनका काम चलने वाला है, जबकि  सच तो चोर और हम ही जानते हैं कि घर में सामान के नाम पर कितना कबाड़ जमा है। कबाड़ी वाले भी मेरे घर के सामने आवाज लगाने से डरते हैं। चौर्य कर्म से पीड़ितों के चेहरे में यह भाव भी नजर आता है कि कहीं यह इनका तो कमाल नहीं है! चोरों ने मेरे घर में चोरी न कर मुझे कहीं का नहीं रखा।
विज्ञापन


इसीलिए बड़े लोग कह गए हैं कि पढ़ाई-लिखाई जरूरी है। भले आप फिर चोर ही क्यों न हों। नौ लोग इसलिए दुखी हैं कि उनके यहां चोरी हो गई और दसवां बेचारा फोकट में परेशान है कि हाय, चोर ने यहां एहसान क्यों नहीं किया। कम से कम मैं समाज में मुंह दिखाने लायक तो हो जाता।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें