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कोई अकेला कहां, साथ है सारा जहां

रोनू मजूमदार(मशहूर बांसुरी वादक) Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 14 Apr 2020 07:08 AM IST
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लॉकडाउन के दौरान सामाजिक सहायता - फोटो : PTI

आज पूरा विश्व बहुत बड़ी महामारी से जूझ रहा है। इस वक्त हमें यह नहीं देखना है कि हम कितनी तकलीफ झेल रहे हैं, बल्कि यह देखना है कि हमारे आसपास अगर कोई मुसीबत में है, तो उसको किस तरह मदद पहुंचाई जाए, किस तरह उसकी राशन या धन से मदद की जाए। चाहे भावनात्मक मदद ही क्यों न हो, आप उसकी सहायता जरूर करें, लेकिन लॉकडाउन का पालन करते हुए। घर पर रहकर ध्यान (मेडिटेशन) करें।



यह आत्मा से जुड़ने का समय है, बाहर जाकर मुसीबत बढ़ाने या कमियां निकालने का समय नहीं है। यह वक्त हाथ से हाथ मिलाकर चलने का है। जो लोग दैनिक मजदूरी करते हैं और सोशल डिस्टेंसिंग के कारण दूसरों से दूर रहने की प्रक्रिया को झेल रहे हैं, उनके लिए यह बहुत मुश्किल समय है। उन सबकी मुसीबतों को समझें। अगर आपके पास धन है, तो उनकी मदद करें। यही सबसे बड़ी पूजा है। भारत संतों की भूमि रही है। यहां संतों का आशीर्वाद पूरे जनमानस पर है। बस, आप दिए गए आदेशों का पालन करें।


हम कलाकारों पर भी बहुत बड़ी मुसीबत आई है, क्योंकि किसी अन्य व्यवसाय में तो घर से ऑनलाइन भी काम कर सकते हैं, मगर हम लोग कार्यक्रम तभी कर सकते हैं या कर पाएंगे, जब सभी लोग एक-साथ मिलकर बैठेंगे। तो आप सोचिए कि जब लोग एक-दूसरे से दूरी बनाकर रखेंगे, तो हम कैसे किसी के लिए बजाएंगे। इस समय हम लोग घर में बैठकर मां सरस्वती की साधना कर रहे हैं। अपने संगीत को बेहतर बना रहे हैं, ताकि सब कुछ ठीक होने के बाद मन को छू जाने वाला और शांति देने वाला संगीत सुनने को मिले।


इस वक्त सरकार पर इतना बड़ा बोझ है कि वह जितना प्रयास कर रही है, वह काफी नहीं है। ऐसे में हमें भी उसका साथ देना है, ताकि वह इतनी बड़ी लड़ाई में अकेली न पड़ जाए। एक अकेला थक जाएगा, मिलकर हाथ बढ़ाना हमें इस बात को समझना है। हम जाति-भेद, ऊंच-नीच, अमीर-गरीब, माध्यम वर्ग, इन सबको छोड़कर उस असली धर्म को समझें, जो दया करने से उत्पन्न होता है।


आप सभी के साथ हम कलाकार भी हैं और आप सब हमारे साथ हैं। कोई अकेला कहां, कोई अकेला कहां...साथ है सारा जहां, तो कोई अकेला कहां... इस वक्त लोग जानना चाह रहे हैं कि हम कलाकार घर पर क्या कर रहे हैं? मैं नए-नए रागों पर शोध और प्रयोग कर रहा हूं। साथ ही योग-साधना में भी अपना समय व्यतीत कर रहा हूं। वहीं जो भी मुझसे मिलने का समय मांग रहा है, उसे मैं मना कर दे रहा हूं, क्योंकि यह समय लोगों से मिलने का नहीं है।


यह समय अपने आप से बात करने का है। व्यस्त दिनचर्या के कारण जो काम आपने जीवन में नहीं किए, उस काम को करने का है। मेरे देश-विदेश के सारे प्रोग्राम कैंसिल हो चुके हैं, लेकिन इसका मुझे कोई दुख नहीं है, क्योंकि मेरी तरह आप सब भी इससे जूझ रहे हैं। मैं जानता हूं कि बहुत जल्द ईश्वर हमें इस मुसीबत से बचाएगा और फिर से हमें मौका देगा कि मैं आप सबके बीच में जाकर बांसुरी वादन कर सकूं।

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