जिस दिन हमारे देश में बना उपग्रह चंद्रयान चांद पर उतरेगा, उस दिन पता नहीं, कितने पटाखे फूटेंगे, आतिशबाजी होगी और हम सब फूले नहीं समाएंगे। टीवी चैनलों के लोग घूम-घूमकर पूछेंगे ‘बताइए, इस चमत्कार का श्रेय किसे दिया जाए? एकाध ही यह कहने वाला होगा कि इस बड़ी उपलब्धि के पीछे देश के वैज्ञानिकों की मेहनत और वैज्ञानिक सोच का प्रसार करने वाले आला दर्जे के वैज्ञानिक शैक्षणिक और शोध संस्थानों का योगदान है। ऐसा कहने वाले कम लोग इसलिए होंगे, क्योंकि वैज्ञानिक सोच वाले लोग अब कम हो गए हैं।
साक्षी मिश्रा और अजितेश की संकटग्रस्त प्रेम कहानी इसका ताजा उदाहरण है। साक्षी कुछ करना चाहती थी, पर उसे घर में घुटन महसूस होती थी। भाजपा विधायक उसके पिता ने उसकी पढ़ाई अपनी सोच के हिसाब से कराई। उसका विषय भी खुद चुना और उसे ऐसे कॉलेज मे भर्ती किया, जहां छात्राओं को बहुत नियंत्रण में रखा जाता है। अजितेश से साक्षी को काफी सहारा मिलने लगा और दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई। उन्होंने शादी करने का फैसला कर लिया।