शीतोष्णसुखदुःखेषु समः सङ्गविवर्जितः।।
अर्थात् जो शत्रु-मित्र में और मान-अपमान में सम है तथा सर्दी, गर्मी और सुख-दुःखादि द्वंद्वों में सम है और आसक्ति से रहित है...
तुल्यनिन्दास्तुतिर्मौनी सन्तुष्टो येन केनचित्।
अनिकेतः स्थिरमतिर्भक्तिमान्मे प्रियो नरः।।
अर्थात् जो निंदा-स्तुति को समान समझने वाला,
मनन शील और जिस किसी प्रकार से भी शरीर का निर्वाह होने में सदा ही संतुष्ट है और रहने के स्थान में ममता और आसक्ति से रहित है, वह स्थिरबुद्धि भक्तिमान पुरुष मुझको प्रिय है।
भीष्म पर्व, गीता 12/18-19
(अर्जुन के प्रति साक्षात् भगवान श्रीकृष्ण का गीतोपदेश)
आदतें ही हमारी जिंदगी को निर्धारित करती हैं। हम तय समय पर सुबह उठते हैं, ब्रश करते हैं, चाय पीते हैं और फिर काम पर निकलते हैं। ये सब आदतें ही तो हैं। फिर एक नई स्वस्थ आदत डालने में परेशानी कहां आती है? व्यवहार वैज्ञानिकों के अनुसार हम गलत तरह से स्वस्थ आदत बनाने की कोशिश करते हैं। वजन कम करने के लिए हम कसरत करने का संकल्प गलत तरह से लेते हैं। बड़े संकल्पों को लेने से पहले सफलता के लिए खुद को तैयार करने की भी जरूरत होती है। लेकिन हम इस पर ध्यान नहीं देते। एक्सपर्ट बताते हैं कि नई आदतों की शुरुआत का सबसे बेहतर तरीका है कि उन्हें मौजूदा आदतों में जोड़ दिया जाए। आपको अपनी जिंदगी के पैटर्न में झांक कर देखना होगा कि सकारात्मक आदतें विकसित करने के लिए आप किन मौजूदा आदतों का उपयोग कर सकते हैं।
ज्यादातर लोगों के लिए सुबह की दिनचर्या सबसे प्रभावी होती है, इसलिए यह नई आदत शुरू करने का एक बेहतरीन अवसर पैदा कर सकती है। मसलन, सुबह की एक कप चाय, पांच मिनट के ध्यान के अभ्यास की शुरुआत कर सकती है। ब्रश करते वक्त आप संतुलन का अभ्यास करने के लिए एक पैर पर खड़ा होना चुन सकते हैं। कई लोग दिन के अंत में सोफे पर लेटकर टीवी देखना पसंद करते हैं। ये रोज योग करने का अच्छा समय हो सकता है।
स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता और टाइनी हैबिट्स पुस्तक के लेखक बीजे फॉग कहते हैं कि व्यवहार में बड़े परिवर्तन लाने के लिए उच्च स्तर की प्रेरणा की जरूरत होती है, जिसे अक्सर कायम नहीं रखा जा पाता है। इसलिए वह नई आदत को यथासंभव आसान बनाने के लिए छोटी-छोटी आदतों से शुरुआत करने का सुझाव देते हैं। जैसे, रोजाना थोड़ी देर टहलना व्यायाम की आदत की शुरुआत हो सकता है या हर दिन अपने बैग में एक सेब रखने से खाने की आदतें बेहतर हो सकती हैं।
डॉ. फॉग रोज पुश-अप करने की आदत शुरू करना चाहते थे। उन्होंने दिन में केवल दो पुश-अप से शुरुआत की और इसके लिए वह बाथरूम जाने के समय का उपयोग करने लगे। आज उन्हें 40 से 80 पुश-अप लगाने की आदत है। यूरोपियन जर्नल ऑफ सोशल साइकोलॉजी के मुताबिक किसी भी कार्य को आदत बनने में औसतन 66 दिन का समय लगता है। लेकिन जब हम किसी कार्य को ज्यादा बार करते हैं, तो उसकी आदत जल्दी भी बनने लगती है। इसलिए शुरुआत उन कार्यों से करें, जो आसान हों।