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पानी में घुलता आर्सेनिक

ज्ञानेन्द्र रावत Updated Wed, 23 May 2018 06:22 PM IST
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ज्ञानेन्द्र रावत
गर्मी ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। इसी के साथ देश में जल संकट गहराने लगा है। देश के अधिकांश हिस्सों में पीने का साफ पानी मिलना सपना हो गया है। लोग प्रदूषित पानी पीने को मजबूर हैं। जो पानी पीने को मिल भी रहा है, उसमें आर्सेनिक की मात्रा निर्धारित मानकों से कहीं ज्यादा है। इससे गंभीर जानलेवा बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। 


देश की अधिकांश आबादी स्थानीय निकायों द्वारा पीने के साफ पानी की समुचित मात्रा में आपूर्ति नहीं किए जाने के कारण भूजल पर ही आश्रित है। वह जैसे-तैसे हैंडपंप, सबमर्सिबिल पंप और कुओं के पानी से अपनी जरूरतें पूरी कर रही है। लेकिन पानी में आर्सेनिक घुला होने के कारण त्वचा, फेफड़े और मूत्राशय व अन्य अंगों के कैंसर, केरोटोइस और नाड़ी तथा संतानोत्पत्ति से संबंधित गंभीर और जानलेवा बीमारियों की चपेट में आकर लोग अनचाही मौत के मुंह में जा रहे हैं। 


केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, देश के 23.9 करोड़ लोग आर्सेनिक युक्त पानी पीने को मजबूर हैं। देश की आबादी का 19 फीसदी हिस्सा खतरनाक स्तर तक आर्सेनिक की मौजूदगी वाला पानी पी रहा है। असलियत यह है कि देश के 153 जिलों के लोग आर्सेनिक युक्त पानी पीने की समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। घटते भूगर्भीय जल के चलते, खेती में उपयोग में आ रहे रसायन और कारखानों से निकला रसायनयुक्त अपशेष आर्सेनिक की प्रमुख वजह है।  


अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के ऑन्क्रोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ एम. डी. रे इस बारे में कहते हैं कि शरीर में आर्सेनिक की मामूली मात्रा भी यदि लंबे समय तक रहती है, तो कैंसर होने की आशंका कई गुणा तक बढ़ जाती है। देश में पानी में आर्सेनिक की मात्रा की खतरनाक स्तर तक मौजूदगी का दावा करने वाले वैज्ञानिक डॉ आर. पी. सिंह का कहना है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के मुताबिक पानी में आर्सेनिक की मात्रा 10 से 50 माइक्रोग्राम प्रति लीटर तक सुरक्षित होती है।


हमारे देश में 50 माइक्रोग्राम प्रति लीटर को सुरक्षित माना गया है। उनके अनुसार, जब मानकों की जांच के लिए 10 माइक्रोग्राम प्रति लीटर आर्सेनिक वाले पानी को एक महीने तक स्वस्थ कोशिकाओं के संपर्क में रखा गया, तो उसमें से कुछ रोगग्रस्त हो गईं। असलियत में हमारे देश में उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, असम, नगालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा, अरुणाचल और पश्चिम बंगाल में इससे पांच गुणा तक अधिक मात्रा में लोग आर्सेनिक मिला पानी पी रहे हैं। 


बीते दिनों ग्लोबल जर्नल साइंस में प्रकाशित एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है कि पाकिस्तानी पंजाब और उसके आस-पास के 60 लाख लोगों पर आर्सेनिक युक्त पानी पीने से कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इस बारे में शोध करने वाली संस्था ‘स्विस फेडरल इंस्टीट्यूट ऑफ इक्वॉटिक साइंस ऐंड टेक्नालॉजी’ ने चेताया है कि इससे भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी खतरा बढ़ गया है। इसके चलते पंजाब के अमृतसर, तरनतारण, कपूरथला, रोपड़, मनसा, फरीदकोट और मोगा जिले में कैंसर के प्रभावित लोगों की तादाद बहुत ज्यादा पाई गई है। इन इलाकों के सैकड़ों लोग हर वर्ष असमय काल के गाल में समा रहे हैं। यह चिंता की बात है।
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