एक तर्क यह भी था कि अंबानी परिवार ने हजारों भारतीयों को रोजगार दिया और दूसरा तर्क यह कि ऐसा इसलिए किया गया, ताकि आने वाले विशिष्ट अतिथियों को उचित सम्मान और सुरक्षा दी जा सके। दूसरी ओर, सोशल मीडिया के एक उपयोगकर्ता ने टिप्पणी की : ‘अडानी और अंबानी के लिए भारत में जीवन स्वर्ग जैसा है और हममें से बाकी लोगों के लिए यह नरक है।’
एक अन्य ने टिप्पणी की : ‘वसुधैव कुटुंबकम’, जिसका अर्थ है ‘दुनिया एक परिवार है’, जैसी महान कहावत को ‘मैं, मेरे अमीर दोस्त और उनके मित्र एक परिवार हैं’ के रूप में फिर से लिखा गया है। एक दूसरी टिप्पणी की गई कि जामनगर हवाई अड्डे का नया स्वरूप इसलिए प्रभावित हुआ, क्योंकि ‘एक युवा अमीर बच्चा दुनिया भर से कुछ प्रसिद्ध लोगों को आमंत्रित करके अपने निजी चिड़ियाघर का प्रदर्शन करना चाहता है।’ जिस निजी चिड़ियाघर का उल्लेख किया गया है, वह ‘राधा कृष्ण मंदिर हाथी कल्याण ट्रस्ट’ नामक संगठन द्वारा चलाया जाता है। इस ट्रस्ट और इसकी गतिविधियों को 2021 में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम में संशोधन करके सक्षम बनाया गया था, जिससे निजी चिड़ियाघरों के निर्माण और हाथी जैसी लुप्तप्राय जंगली प्रजातियों को पकड़ने, कहीं लाने-ले जाने और बिक्री को प्रोत्साहित करने की अनुमति मिली।
लेखिका और वन्यजीव संरक्षणवादी प्रेरणा सिंह बिंद्रा के अनुसार, पहले के कानून ने स्पष्ट रूप से संरक्षित प्रजातियों के व्यावसायिक लेन-देन को नकार दिया था, लेकिन अब संशोधन के बाद जीवित बंदी हाथियों को इस सामान्य निषेध से बाहर रखा गया है, जिससे उनकी व्यावसायिक खरीद-बिक्री जैसी एक बड़ी खामी रह गई है। यह एक संरक्षित जंगली जानवर हाथी को व्यापार योग्य वस्तु के रूप में पेश करता है और इसलिए वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के उद्देश्य और भावना के विपरीत है।
यह कानून में गंभीर विसंगति है, जिसे ठीक किया जाना चाहिए। जून 2022 में न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में एक ही महीने में आठ मामलों का जिक्र किया गया था, जहां कथित तौर पर तस्कर गिरोहों द्वारा असम से जंगली हाथियों की तस्करी के लिए जाली हस्ताक्षरों का उपयोग करके नकली अनापत्ति प्रमाण पत्र बनाने का प्रयास किया गया था। इनमें से सात मामलों में जामनगर में अंबानी द्वारा संचालित ट्रस्ट के लिए हाथियों के परिवहन के प्रयास किए गए थे। फरवरी, 2024 के अंतिम सप्ताह में अनंत अंबानी ने दावा किया कि राधा कृष्ण मंदिर हाथी कल्याण ट्रस्ट में अब दो सौ से अधिक ‘बचाए गए’ हाथी हैं।
हालांकि, ऐसी अटकले हैं कि इनमें से अधिकतर हाथियों को कथित तौर पर अवैध रूप से जंगल में पकड़ लिया गया था और बाद में बिचौलियों की मदद से ‘खरीदा’ गया था। एक पशु अधिकार कार्यकर्ता ने मुझसे कहा कि जंगली प्रजातियों को घर देने, पुनर्वास करने और देखभाल करने के उनके प्रयासों का स्वागत होना चाहिए, लेकिन इसने पूर्वोत्तर से सैकड़ों हाथियों को अंबानियों तक ले जाने के लिए पुरानी पशु तस्करी नेटवर्क योजना को फिर से सक्रिय किया है। सम्मानित पारिस्थितिकी विज्ञानी रवि चेल्लम ने अंबानी चिड़ियाघर की तुलना एक व्यक्तिगत ‘स्टांप संग्रह’ से की है, जो वन्यजीव संरक्षण के वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त उद्देश्यों में कोई भी महत्वपूर्ण योगदान नहीं देता है।
वन्यजीव वैज्ञानिकों ने तीन सवाल उठाए हैं। सबसे पहले, इतने सारे जंगली हाथियों को जामनगर में क्यों ले जाया गया, जो एक शुष्क औद्योगिक क्षेत्र है और इस वन-प्रेमी जानवर की भलाई के लिए बिल्कुल अनुपयुक्त है? दूसरा, इसे सुविधाजनक बनाने के लिए एक समानांतर नियामक प्रणाली क्यों बनाई गई? तीसरा, हाथियों को सुरक्षित रखने के लिए प्राकृतिक आवासों में ऐसी सुविधाएं बनाने के लिए राज्य के वन विभागों के साथ काम क्यों नहीं किया गया? जब मैं छोटा था, तो तब के कांग्रेस शासन का वामपंथी आलोचकों द्वारा ‘टाटा/बिड़ला सरकार’ कहकर उपहास किया जाता था।
फिर भी निश्चित रूप से 1950 और 1960 के दशक में अपने प्रभाव और शक्ति के चरम पर जे.आर.डी. टाटा या घनश्याम दास बिड़ला ने भी कभी नहीं सोचा होगा कि वे जवाहरलाल नेहरू या इंदिरा गांधी से अपने कारखानों के निकटतम हवाई अड्डे को पारिवारिक विवाह के लिए ‘अंतरराष्ट्रीय दर्जा’ दिलवा सकते हैं, न ही वे उन्हें एकल परिवार चिड़ियाघर के पक्ष में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम को मौलिक रूप से बदलने के लिए राजी कर सकते थे। लेकिन अब चीजें अब बिल्कुल अलग हो गई हैं। जैसा कि अर्थशास्त्री अरविंद सुब्रमण्यम ने तर्क दिया है, एक समान खेल का मैदान बनाने, जिसमें सभी उद्यमियों को सफल होने का समान मौका मिले, सरकार ने हाल के वर्षों में एक नए तरह के पूंजीवाद को बढ़ावा दिया है।
दो औद्योगिक घरानों, अदानियों और अंबानियों की किस्मत में शानदार वृद्धि देखी गई है, जिसका मुख्य कारण सरकारी नीतियां हैं, जिन्होंने उन्हें बंदरगाहों, हवाई अड्डों, स्वच्छ और गंदी ऊर्जा, पेट्रोकेमिकल्स और दूरसंचार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एक प्रमुख स्थान बनाने की अनुमति दी है। भारत में विपक्षी राजनेताओं ने उनमें से एक ‘ए’ यानी अदानी की मोदी शासन से निकटता पर अपनी निगाहें जमा ली हैं। फिर भी, जैसा कि जामनगर हवाई अड्डे के मामलों और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम में संशोधन से पता चलता है, अंबानी के पास भी सरकार को इच्छानुसार झुकाने की तुलनीय क्षमता है। निस्संदेह व्यावसायिक मामलों के साथ-साथ पारिवारिक मामलों में भी अडानी और अंबानी, दोनों ही मोदी सरकार की गारंटी का आनंद लेते हैं।