यकीनन इस समय देश में कृषि निर्यात बढ़ने की नई संभावनाएं बन रही हैं। विगत 18 अगस्त को कृषि मंत्रालय से जारी की गई कृषि निर्यात संबंधी रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड-19 की चुनौतियों के बीच मार्च से जून के दौरान कृषि निर्यात बढ़कर 25,552 करोड़ रुपये हो गया।
एक साल पहले इसी अवधि में यह 20,734 करोड़ रुपये था। गेहूं उत्पादन के मामले में दुनिया में भारत दूसरे स्थान पर, जबकि निर्यात में 34वें स्थान पर है। वहीं फल उत्पादन में दूसरा और निर्यात में 23वां स्थान है। वैश्विक कृषि निर्यात में भारत को शीर्ष निर्यातक देश बनाने की संभावनाओं को साकार करने के लिए रणनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं।
कृषि निर्यात बढ़ने के कुछ अन्य कारण भी हैं। सरकार ने कृषि निर्यात नीति के तहत अधिक मूल्य और मूल्यवर्धित कृषि निर्यात को बढ़ावा दिया है। निर्यात किए जाने वाले कृषि जिंसों के उत्पादन व घरेलू दाम में उतार-चढ़ाव पर लगाम लगाने के लिए कम अवधि के लक्ष्यों तथा किसानों को समर्थन मूल्य मुहैया कराने के प्रयास किए गए हैं और घरेलू उद्योग को संरक्षण दिया गया है। साथ ही, राज्यों की कृषि निर्यात में अधिकतम भागीदारी, बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स में सुधार और नए कृषि उत्पादों के शोध एवं विकास को प्रोत्साहन दिया गया है।
देश के कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद विकास प्राधिकरण (एपीडा) के तहत आने वाले बासमती एक्सपोर्ट डेवलपमेंट फाउंडेशन (बीईडीएफ) के निदेशक एके गुप्ता के मुताबिक, पिछले वर्ष देश का कृषि निर्यात 30 अरब डॉलर से अधिक रहा है, लेकिन सरकार ने 2022 तक कृषि उत्पादों का निर्यात 60 अरब डॉलर करने का जो लक्ष्य रखा है, उसे पूरा करने के लिए कृषि मंत्रालय द्वारा व्यापक कार्य योजना तैयार की गई है। एपीडा के तहत अंगूर, आम, केला, प्याज, चावल जैसे पोषक तत्व वाले अनाज और फूलों की खेती के लिए निर्यात संवर्धन मंच (ईपीएफ) का गठन किया गया है।
वित्त मंत्री ने जो आर्थिक पैकेज दिया है और उसमें खेती-किसानी को बेहतर बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भरता की बुनियाद बनाने के जो प्रमुख लक्ष्य बताए गए हैं, उससे कृषि निर्यात बढ़ेगा। विगत 10 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी ने इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के लिए एक लाख करोड़ रुपये की वित्तपोषण सुविधा लांच की। इसके तहत कृषि ऋण समितियों, किसान समूहों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), कृषि-उद्यमियों, स्टार्ट अप्स और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े उद्योग लगाने के लिए दो करोड़ रुपये तक की क्रेडिट गारंटी सरकार लेगी और ब्याज में तीन फीसदी सालाना की रियायत सुनिश्चित की गई है ।
हाल ही में शुरू हुई किसान ट्रेन भी कृषि निर्यात बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है। यह ट्रेन महाराष्ट्र से संतरा और दूसरे फल व सब्जियां लेकर बिना समय गंवाए बिहार पहुंचेगी और वहां से लीची तथा अन्य फल व सब्जियां लेकर महाराष्ट्र लौटेगी। इसका फायदा रास्ते में पड़ने वाले सभी शहरों-गांवों को मिलेगा। इससे जहां किसानों को अच्छी कीमत मिलेगी, वहीं उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर फल तथा सब्जियां मिल सकेंगी।
कृषि निर्यातकों के हितों के अनुरूप मानकों में बदलाव किया जाना चाहिए, ताकि कृषि निर्यातकों को कार्यशील पूंजी आसानी से प्राप्त हो सके। सरकार को अन्य देशों की मुद्रा के उतार-चढ़ाव, सीमा शुल्क में मुश्किलें और सेवा कर जैसे कई मुद्दों पर भी ध्यान देना होगा। साथ ही, चिह्नित फूड पार्कों में विश्वस्तरीय बुनियादी, शोध सुविधाओं और परीक्षण प्रयोगशालाओं को मजबूत बनाना होगा।
15वें वित्त आयोग द्वारा गठित कृषि निर्यात पर उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समूह ने जो सिफारिशें सरकार को सौंपी हैं, उनका क्रियान्वयन भी लाभप्रद होगा। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत घोषित कृषि एवं ग्रामीण विकास कार्यक्रम का कारगर क्रियान्वयन भी देश में कृषि निर्यात बढ़ाएगा।