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जायरा वसीम और नुसरत जहांः जिंदगी और मर्जी दोनों ही उनकी है

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जायरा वसीम और नुसरत जहां समाज के विरोध का शिकार हुईं? - फोटो : Social Media
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पिछले दिनों से अब तक लगातार दो युवतियों को लेकर बहुत चर्चा हो रही है। एक हैं जायरा वसीम और दूसरी है नुसरत जहां। दोनों ही अभिनय के क्षेत्र से ताल्लुक रखती हैं इसलिए ही बहुत जानी-पहचानी और चर्चित हैं। इन दोनों ने अपनी अपनी मर्जी जाहिर की तो जैसे एक तूफान आ गया। “ऐसा क्यों हुआ” या सिर्फ इसलिए कि वह युवतियां है और हमारे समाज में लड़कियों को बोलने और अपनी राय बताने का कोई हक नही है।

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पहले यह जानना जरूरी है कि दोनों ने ऐसा क्या कहा कि जिस पर इतना हंगामा बरप गया और लगभग सभी शामिल होकर बताने लगे कि क्या सही है और क्या गलत। दोनों युवतियों की बात पर साफतौर पर दो खेमे बन गए। एक उनके पक्ष में था और दूसरा उनके विरोध में था।

इधर, मीडिया में भी इसी प्रकार दो राय बन गई जैसे कि तसलीमा नसरीन ने तो जायरा की बात का बहुत विरोध किया और नुसरत जहां का समर्थन किया तो दूसरी ओर अंग्रेजी भाषा की जानी मानी लेखिका व स्तम्भकार शोभा डे ने दोनों का ही समर्थन करते हुए कहा कि दोनों को अपनी राय और मर्जी बताने का हक है और किसी को भी उस पर प्रतिक्रिया देने का कोई अधिकार नहीं है।
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जायरा और नुसरत जहां की दुनिया 
दरअसल, मीडिया और विशेष रूप से सोशल मीडिया पर एक को अपने धर्म के प्रति आग्रह दिखाने और दूसरी को अपने धर्म के विरुद्ध जाने पर बहुत कुछ कहा जा रहा है। जायरा वसीम अभी 18 वर्ष की है और वह पंद्रह साल की ही थी जब उसने फिल्मी दुनिया में कदम रखा था।

 

जायरा वसीम ने अपनी मर्जी से फिल्मी दुनिया छोड़ी और इसका स्वागत किया जाना चाहिए। - फोटो : Facebook
दंगल और सीक्रेट सुपर स्टार फिल्मों में जायरा के अभिनय को कौन भुला सकता है। यह क्षमता व गुण उसमें ईश्वर (अल्लाह) प्रदत्त है और वह आज यह कह रहीं हैं कि वह अभिनय के क्षेत्र में आकर स्वयं को अपने ईमान (धर्म तथा अल्लाह) से स्वयं को दूर पा रहीं थीं इसलिए वह अब फिल्मों में काम नहीं करेंगी। जाहिर है यह उनकी निजी मर्जी है और वह अपनी मर्जी सै फिल्मी जगत को छोड़ रही हैं।

जायरा ने कहा- “आय एम डन विद बॉलीवुड” जायरा ने दो पेज में अपनी मर्जी बताई जबकि उसे इतनी लंबी कैफियत देने की जरूरत नहीं थी।“अपनी मर्जी” की बहुत अहमियत होती है। उसके लिए तथा उसे बताने के लिए चार पांच लाइनें ही काफी है। दूसरी बात यह है कि जायरा से पहले भी कई अभिनेत्रियों ने फिल्मी दुनिया छोड़ी है।

यहां तक कि पुरुषों ने भी इसे अलविदा कहा है। लेकिन शायद ही किसी ने इस तरह विस्तार से इसके लिए कोई कैफियत दी है।

बहरहाल, तो क्या यह माना जाए कि यह जायरा की मर्जी नही रहीं बल्कि उसने उनको कन्विंस करने की कोशिश की है जो उसके इस तरह फिल्मी दुनिया में आने से खफा थे। पर चूंकि जायरा ने इसे अपनी मर्जी बताया है तो इसे मान लेते हैं। जबकि जायरा से पहले और जायरा के इस समय भी कई मुस्लिम युवतियां फिल्मों में काम कर रहीं हैं और वह स्वयं को कभी अपने ईमान तथा अल्लाह की राह से दूर नहीं पाती हैं।
 
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समाज को नुसरत जहां की मर्जी का सम्मान करना होगा। - फोटो : instagram
नुसरत की राह और कट्टरपंथी 
इसी तरह नुसरत जहां की मांग में भरे सिंदूर, मंगल सूत्र और हाथों में लाल चूड़ा पहनने पर बहुत हंगामा व शोर हो रहा है। इन्हें कहा जा रहा है कि वह अपने ईमान और अकीदत ले दूर हो गई हैं। जिस धर्म में उन्होंने जन्म लिया और जिस पर उनका विश्वास है उसमें सिंदूर, मंगल सूत्र और लाल चूड़ा पहनने को स्वीकारा नहीं जाता। वह इस तरह धर्म विरुद्ध आचरण कर रहीं हैं।

इस विरोध के बाद तब नुसरत ने कहा कि मेरा विश्वास, मेरा धर्म मेरे भीतर मेरी चेतना में समाया हुआ है। वह जन्म से मुस्लिम है तो वह दृढ़ता से जीवन भर मुस्लिम रहेंगी। यह इन दोनों युवतियों की अपनी मर्जी है। हर लड़की, युवती व महिला को अधिकार है कि वह अपनी मर्जी बता सके। अपनी राय जाहिर कर सके।
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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