यमुना की दिन ब दिन बिगड़ती हालत पर पिछले 30 वर्षों से लगभग हर सरकार अपनी-अपनी राजनीति कर रही है।
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सरकारें आती-जातीं हीं लेकिन युमना वैसी ही रहीं
यमुना की दिन ब दिन बिगड़ती हालत पर पिछले 30 वर्षों से लगभग हर सरकार अपनी-अपनी राजनीति कर रही है। यमुना की साफ-सफाई के नाम पर कई हजार करोड़ रुपए बहा दिए गए हैं। इसके बावजूद इस नदी में पानी की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है बल्कि साल दर साल पानी और गंदा व यमुना की स्थिति खराब ही हुई है।
यमुना की बेहतरी तो दूर की बात है इसके हालात में जरा भी अच्छाई की ओर परिवर्तन होता नहीं दीख रहा है। यमुना के उद्धार के लिए दिल्ली सरकार ने यमुना एक्शन प्लान वन, टू और थ्री जैसी कई योजनाएं लागू की हैं, लेकिन इसके पानी के किस्म में कोई सुधार नहीं हुआ। हालत जस की तस बनी होती तो कोई बात होती यहां हालत बद से बदतर ही होती जा रही है। ऐसा तब हो रहा है जब यह मामला दिल्ली देश की राजधानी का है और यहां केंद्र और राज्य सरकार तथा संसद हैं और देश के सभी पैरोकार यहां बैठकर बड़ी-बड़ी योजनाएं बनाते हैं। यमुना का मामला आम जनता की अदालत से देश की सर्वोच्च अदालत में वर्षों से विचाराधीन ही बना हुआ है।
1400 किलोमीटर में यमुना जितनी गंदी दिल्ली में होती है उतनी कहीं नहीं
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1400 किलोमीटर में दिल्ली में सबसे बदहाल
यमुना गंदे होने के सफर में सात राज्यों से होकर गुजरती है। यमुना अपना सबसे लंबा सफर मध्य प्रदेश में 40.6 फीसदी तय करती है, फिर राजस्थान में 29.8 फीसदी, उत्तरांचल और उत्तर प्रदेश में अपने सफर का 21 फीसदी सफर पूरा करते हुए हरियाणा में 6.1 और हिमाचल प्रदेश में 1.6 और सबसे कम सफर 0.4 फीसदी सफर दिल्ली में तय करती है। यमुना की ऊंचाई समुद्रतल से ग्लेशियर से 3320 मीटर है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल कोर्ट ने यमुना में गंदगी फेंकने वालों पर पांच हजार तक जुर्माने का एलान तक कर दिया, लेकिन क्या सचमुच जुर्माना लगाया जा रहा है? या फिर एनजीटी का यह फैसला भी अन्य फैसलों की तरह बस अखबारों और खबरिया चैनलों की सुर्खियां बटोर कर रह गया। हमने कई-कई बार यमुना किनारे की यात्रा भी की। हमने जो देखा वो रुला देने वाला था। कोई यमुना में फूल डाल रहा था तो कोई मीठा चढ़ा रहा था और कोई आरती कर रहा था। कुछ लोग तो अपने घर की पूजन सामग्री लाकर यमुना में विसर्जित कर रहे थे। जबकि यमुना के किनारे जगह-जगह मां दुर्गा, गणेश, लक्ष्मी सहित कई देवी देवताओं की मूर्तियां बिखरी पड़ी मिलीं। जगह-जगह पूजन सामग्री, घड़े, कपड़े तक दिखे।
इधर वजीराबाद बैराज से महज 100 मीटर की दूरी पर यमुना नजफगढ़ नाला यमुना में गिर रहा है। लगभग आधी दिल्ली की गंदगी लिए ये नाला साफ-सुथरी यमुना के पानी को विषैला और खुद की तरह बदबूदार बना रहा है। एनजीटी के आदेश का पालन होता कहीं नहीं दिखाई देता है। यमुना की सफाई की जिम्मेदारी केंद्र से लेकर राज्य सरकार पर तो है ही देश के नागरिक भी उतने ही जिम्मेदार हैं।
पूजा मेहरोत्रा पिछले 14 वर्षों से हिंदी पत्रकारिता से जुड़ी हैं। पर्यावरण, जल, नदी विशेषकर यमुना गंगा के प्रदूषण पर काम करती रही हैं। उनकी पुस्तक ''मैं यमुना हूं और जीना चाहती हूं'' के लिए उन्हें 'हिंदुस्तान की बेटियां 'सम्मान और स्वास्थ्य, पर्यावरण, जल संरक्षण और प्रदूषण जैसे गंभीर विषयों पर रिपोर्टिंग के लिए से सम्मानित किया गया है। वे हिंदी साहित्य अकादमी द्वारा साहित्य श्री सम्मान से भी सम्मानित हैं।
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