स्वीडन को दुनिया में पर्यावरण मामलों की अगुवाई करने वाला देश का गौरव हासिल है।
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दूसरा, पर्यावरण के नुकसान विषय पर अध्ययन के लिए कार्य योजना का गठन और तमाम देशों के आपसी सहयोग के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय निकाय ‘संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी)’ का गठन किया जाए।
पर्यावरण से जुड़ी नीति
इस पर भी सहमति जताई गई कि किसी भी देश की पर्यावरण से जुड़ी नीति, विकासशील देशों के वर्तमान या भविष्य की क्षमता को बढ़ावा देने वाला होगा। यह किसी भी तरह उन पर प्रतिकूल प्रभाव देने वाला नहीं होना चाहिए। हालांकि इस मामले में विकसित देशों का रवैया आज कैसा है, यह किसी से छुपी हुई नहीं रह गई है।
स्वीडन को दुनिया में पर्यावरण मामलों की अगुवाई करने वाला देश का गौरव हासिल है। लेकिन सबसे पहले नॉर्वे ने अपने यहाँ 1972 में पर्यावरण मंत्रालय के तैयार किया और उसके कुछ ही हफ्तों बाद स्वीडन में पर्यावरण मंत्रालय का निर्माण हुआ।
वहीं भारत में इसके तेरह साल बाद 1985 में पर्यावरण मंत्रालय का निर्माण हुआ।यह जानना दिलचस्प है कि स्टॉकहोम घोषणा पत्र को तैयार करने में क़रीब चार साल लगे। इसे दुनिया भर से सैकड़ों वैज्ञानिक और विशेषज्ञों से सलाह मशविरा कर तैयार किया गया था। जिसे क़रीब आठ सौ पन्नों में संकलित किया गया। इसे संयुक्त राष्ट्र के सबसे महंगे डॉक्युमेंटेशन में से एक माना जाता है।
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