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विश्व मधुमेह दिवस 2019ः बदलते हुए युवा भारत को बचना होगा शुगर की बीमारी से

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डायबिटीज की समस्या जीवनशैली में बदलाव के कारण हुई। - फोटो : Pixabay
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आज जहां एक तरह 14 नवंबर को बाल दिवस के रूप में जाना जाता है, वहीं इसके साथ ही आज वर्ल्ड डायबिटीज डे भी है। डायबिटीज यानी की मधुमेह, जो की आज की बदलती जीवन शैली की वजह से आमतौर पर हर दूसरा व्यक्ति परेशान है। आप को जान के अचरज होगा की मधुमेह भारत की सबसे तेजी से बढ़ती बीमारी है। जहां  2017 में 72 मिलियन मामले दर्ज किए गए, यह आंकड़ा 2025 तक लगभग दोगुना होने की उम्मीद है।

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दरअसल, जैसे-जैसे हमारी जीवन शैली में बदलाव आया, जीवन स्तर बढ़ा, साथ ही साथ डायबिटीज की समस्या भी बढ़ती गई। जहां पहले यह बुढ़ापे में होने वाली बीमारी मानी जाती थी आज बदलते दौर में यह युवा अवस्था में भी उतनी ही तेजी से फ़ैल रही है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के अनुसार 25 साल से कम उम्र में हर चार में से एक वयस्क को डायबिटीज की बीमारी या शुगर बढ़ा हुआ होता है जबकि सामान्य तौर पर यह 40-50 साल की उम्र में होती थी।

क्या होती शुगर? कैसे होती है ये बीमारी?  
क्या आप जानते है डायबिटीज यानि की मदुमेह होता क्या है?, तो इसको ऐसे समझिये की यह बीमारी तब होती है जब आपका ब्लड ग्लूकोस जिसे ब्लड शुगर भी कहते हैं, काफी ज्यादा होता है। ब्लड शुगर हमारी ऊर्जा का मुख्य स्रोत होता है और हमारे द्वारा खाए गए भोजन से आता है। इंसुलिन, एक हार्मोन जो अग्न्याशय द्वारा बनाया जाता है, भोजन से ग्लूकोज को आपकी कोशिकाओं में ऊर्जा के लिए उपयोग करने में मदद करता है।
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कभी-कभी आपका शरीर पर्याप्त नहीं बनाता है  या कोई-इंसुलिन या अच्छी तरह से इंसुलिन का उपयोग नहीं करता है, तब ग्लूकोज आपके रक्त में रहता है और आपकी कोशिकाओं तक नहीं पहुंचता है।
 
वैसे डायबिटीज मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है, टाइप-1 डायबिटीज, टाइप-2 डायबिटीज और प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली डायबिटीज टाइप 1 मधुमेह आमतौर पर एक ऑटो-प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के कारण होता है जहां शरीर की रक्षा प्रणाली इंसुलिन का उत्पादन करने वाली कोशिकाओं पर हमला करती है और शरीर में बहुत कम अथवा इंसुलिन बनती ही नहीं हैं। इसको नियंत्रित करने के लिए हर दिन इंसुलिन का इंजेक्शन लगवाना पड़ता है, अगर इन्सुलिन का इंजेक्शन न मिले तो मरीज की मौत भी हो जाती है।
 

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टाइप-2 डायबिटीज को नॉन-इंसुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज कहते हैं। - फोटो : फाइल फोटो
टाइप-2 डायबिटीज को नॉन-इंसुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज कहते हैं और सामान्यत यही डायबिटीज ज्यादातर लोगों को होती है। यह किसी भी उम्र में हो सकती है। कई बार सालों तक इसका पता नहीं चलता और ब्लड या यूरिन का चेकअप करवाने से ही इसका पता चलता है। यह मोटापे या ज्यादा वजन की वजह से भी होती है। इसका इलाज व्यायाम कर के या संतुलित आहार खा कर किया जा सकता है परन्तु समय के साथ ज्यादातर लोगों को दवाओं और इंसुलिन की आवश्यकता होती है।
 
तीसरा प्रकार होता है प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली डायबिटीज, लेकिन सामान्यत यह गर्भावस्था के बाद अपने आप सामान्य हो जाता है लेकिन बच्चों के साथ साथ महिलाओं उसके बाद टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है।
 
डायबिटीज की वजह से कई अन्य बीमारियां भी शरीर को घेर लेती है जैसे की किडनी की ख़राबी, हृदय आघात, पैरों का गैन्ग्रीन और आंखों का अन्धापन।
 
आज की इस बदलते जीवन शैली में जहां पर हम फ़ास्ट फ़ूड और टेस्ट पर ज्यादा ध्यान देते हैं, वहां जरूरत है हमें एक स्वस्थ जीवन शैली को अपनाने की। ज्यादा महत्वपूर्ण है की पौष्टिक आहार खाएं और नियमित व्यायाम करें। आज की आरामदायक ज़िन्दगी में जहां कई बार पूरा दिन ऑफिस या घर पर बैठे बैठे निकल जाता है वहां जरूरत है उठकर टहल लगाने की, सुबह शाम सैर करने की। वो कहते है न की इलाज से बेहतर है एहतियात। 
 
वरना सोचिये कैसी होगी ज़िन्दगी जब खाने में आप न आलू खा पाए और न ही चाय में चीनी हो। दिवाली आए तो मिठाई देख के मन भरना पड़े तो बेहतर है की अभी से जागरूक हो और एक स्वस्थ जीवन शैली को अपनाएं।
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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