टाइप-2 डायबिटीज को नॉन-इंसुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज कहते हैं।
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टाइप-2 डायबिटीज को नॉन-इंसुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज कहते हैं और सामान्यत यही डायबिटीज ज्यादातर लोगों को होती है। यह किसी भी उम्र में हो सकती है। कई बार सालों तक इसका पता नहीं चलता और ब्लड या यूरिन का चेकअप करवाने से ही इसका पता चलता है। यह मोटापे या ज्यादा वजन की वजह से भी होती है। इसका इलाज व्यायाम कर के या संतुलित आहार खा कर किया जा सकता है परन्तु समय के साथ ज्यादातर लोगों को दवाओं और इंसुलिन की आवश्यकता होती है।
तीसरा प्रकार होता है प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली डायबिटीज, लेकिन सामान्यत यह गर्भावस्था के बाद अपने आप सामान्य हो जाता है लेकिन बच्चों के साथ साथ महिलाओं उसके बाद टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है।
डायबिटीज की वजह से कई अन्य बीमारियां भी शरीर को घेर लेती है जैसे की किडनी की ख़राबी, हृदय आघात, पैरों का गैन्ग्रीन और आंखों का अन्धापन।
आज की इस बदलते जीवन शैली में जहां पर हम फ़ास्ट फ़ूड और टेस्ट पर ज्यादा ध्यान देते हैं, वहां जरूरत है हमें एक स्वस्थ जीवन शैली को अपनाने की। ज्यादा महत्वपूर्ण है की पौष्टिक आहार खाएं और नियमित व्यायाम करें। आज की आरामदायक ज़िन्दगी में जहां कई बार पूरा दिन ऑफिस या घर पर बैठे बैठे निकल जाता है वहां जरूरत है उठकर टहल लगाने की, सुबह शाम सैर करने की। वो कहते है न की इलाज से बेहतर है एहतियात।
वरना सोचिये कैसी होगी ज़िन्दगी जब खाने में आप न आलू खा पाए और न ही चाय में चीनी हो। दिवाली आए तो मिठाई देख के मन भरना पड़े तो बेहतर है की अभी से जागरूक हो और एक स्वस्थ जीवन शैली को अपनाएं।
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