नए अफगानिस्तान में औरतों को बाज़ार जाने की छूट तो होगी लेकिन बिना हिजाब वे घर से बाहर नहीं निकल सकेंगी
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खतेरा की दर्दनाक कहानी
पिछले दिनों सुर्खियों में रही खतेरा की कहानी तो आपने सुनी ही होगी। इस युवती के इंटरव्यू ने तालिबानियों की दरिंदगी की रोंगटे खड़े कर देने वाली तस्वीर दुनिया के सामने ला दी थी।
अफगान पुलिस में काम करने वाली इस युवती को पिछले साल तालिबानी लड़ाकों ने घेर लिया और उसका आईडी चैक करने के बाद उस पर 8 गोलियां दागीं। इतना करने पर भी वे नहीं रुके उसके बाद उन्होंने उसपर चाकू से कई वार किए और चाकू से ही उसकी आंखें निकाल कर उसे सड़क पर मरने के लिए छोड़ गए।
इसे खतेरा की अच्छी किस्मत कहिए या औरत होने की उसकी मजबूती, वो बच गई और फिर इलाज के लिए भारत आ पाई। फिलहाल उसने यहीं शरण ले रखी है।
खतेरा ने बताया था कि तालिबानी लड़ाके केवल औरतों को बेइज्जत करके मारते ही नहीं,बल्कि उनके शरीरों को अपने कुत्तों का पेट भरने के लिए उनके सामने फेंक देते हैं। खतेरा इलाज के लिए भारत आ पाई क्योंकि उसके पास थोड़ा बहुत पैसा था लेकिन वो औरतें जो इतनी खुशकिस्मत नहीं हैं उनके लिए अब अफगानिस्तान नरक से भी बदतर जगह है।
शर्तें लागू हैं और जिंदगी बदहाल है
बहरहाल, शायद दुनिया भर में अपनी छवि के प्रचार को देखते हुए तालिबानियों ने इस बात का प्रॉमिस तो किया है कि महिलाओं को उनके अधिकार दिए जाएंगे। लेकिन इसमें भी शर्तें लागू हैं।
पहली बात तो ये कि महिलाओं को ये अधिकार शरिया कानून के अंतर्गत ही मिलेंगें। शरिया कानून इस्लाम के कानून हैं जिनको हटाने को लेकर पहले भी बकायदा बहसें होती रही हैं। भारत में भी हुई हैं। ऊपर से तालिबानियों ने शरिया की अपनी अलग परिभाषाएं बना रखी हैं। यानी एक तो करेला ऊपर से नीम चढ़ा।
इसका एक उदाहरण समझिए-
नए अफगानिस्तान में औरतों को बाज़ार जाने की छूट तो होगी लेकिन बिना हिजाब वे घर से बाहर नहीं निकल सकेंगी और उनके साथ एक 'मर्द' का होना जरूरी होगा, चाहे वह मर्द 6 साल का बच्चा ही क्यों न हो।
इस एक उदाहरण से ही स्पष्ट है कि वहां आने वाले दिनों में औरतों की स्थिति क्या होने वाली है। फिलहाल तो जो औरतें अफगानिस्तान से बाहर हैं वे अपने बचे होने का जश्न मना रही हैं और जो औरतें पीछे छूट गई हैं वो दुनियाभर की तरफ हसरत भरी नजर से देख रही हैं। शायद किसी मानवाधिकार की नजरे इनायत कभी उनकी तरफ भी हो जाए।
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